बक्सर : आज देश के दिल्ली समेत कई शहरों में प्रदूषण का स्तर इस कदर अधिक बढ़ चुका है कि लोगों को सांस लेने में भी तकलीफें होने लगी है। सर्वेक्षण में यह बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि हवा में दिनों-दिन इस कदर जहर घुलता जा रहा है कि आने वाले कुछ वर्षों में धरती पर जीवन की संभावना तक समाप्त हो सकती है। वैज्ञानिकों की जांच में इस बात का खुलासा किया गया है कि हवा में जहर घोलने का काम मुख्य रूप से वाहनों और फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं के अलावा आम तौर पर खेतों में जलाई जाने वाली पराली की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसको लेकर सरकार भी सचेत हो गई है और प्रदूषण फैलाने वाले कारकों पर रोक लगाने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

अभी हाल में किए गए हवाई सर्वेक्षण में इस बात का खुलासा हुआ है कि दिल्ली की हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ाने में हरियाणा और पंजाब के खेतों में जलाई जाने वाली पराली की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके पूर्व नासा ने भी उपग्रह से ली गई तस्वीरों के आधार पर एक रिपोर्ट जारी करते हुए बताया था कि पृथ्वी पर बढ़ रहे प्रदूषण में भारत के खेतों में आए दिन जलाए जा रहे पराली की अहम् भूमिका है। इधर, सर्वेक्षण रिपोर्टों के आने के बाद अब सरकारें भी सचेत हो गई हैं। और इसके लिए कई प्रकार के प्रतिबंध समेत जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। जिसके तहत अभी कुछ ही दिनों पूर्व सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजधानी पटना के प्रदूषण स्तर को देखते हुए 15 साल से अधिक पुराने हो चुके वाहनों पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।

कृषि विभाग ने जारी किया था पराली जलाने का आदेश

सरकार द्वारा खेतों में पराली जलाने पर पहले ही रोक लगाते हुए कृषि विभाग द्वारा जागरूकता अभियान चलाने का आदेश जारी किया गया था। बावजूद इन सबके विभाग इस ओर से पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। और अब तक इसको लेकर जिले में कभी कोई अभियान नहीं चलाया गया। पूर्व में तत्कालीन जिलाधिकारी रमण कुमार ने इसको ले सख्त आदेश जारी करते हुए सजा का भी प्रावधान लागू किया था। रमण कुमार के यहां से तबादला होने के साथ ही इस संबंध में जारी आदेश भी हवा हवाई हो गए।

पराली बेचकर करें आमदनी

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा राज्य सरकारों को जागरूकता लाने का संदेश पहुंचाने के साथ ही एनटीपीसी को कोयले के अलावा पराली के उपयोग करने की भी सिफारिश की है। वहीं, आइआइटी के तीन छात्र खेतों से उत्पन्न अपशिष्ट पराली को लुगदी में बदलने के बाद उसकी मदद से कप प्लेट थाली आदि बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं। जिसमें प्रतिदिन टनों पराली की आसानी से खपत होगी। यह योजना पूरी हो गई है और जल्द ही अधिकतम परली निकलने वाले क्षेत्रों में इसके प्लांट स्थापित किए जाने की योजना है। इस प्रकार खेतों से निकलने वाले अपशिष्ट भी अब किसानों की आमदनी का जरिया बन जाएगा।

Posted By: Jagran

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