बक्सर में गंगा और कर्मनाशा नदियां उफान पर, कई गांवों में भरा पानी; प्रशासन अलर्ट
बक्सर में गंगा और कर्मनाशा नदियां उफान पर हैं, गंगा खतरे के निशान के करीब जबकि कर्मनाशा डेढ़ मीटर ऊपर ...और पढ़ें

कई गांवों में भरा पानी (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब।
कर्मनाशा नदी खतरे के निशान से डेढ़ मीटर ऊपर।
लगातार बारिश से बक्सर में बाढ़ का खतरा।
जागरण संवाददाता, बक्सर। गंगा का जलस्तर मंगलवार शाम 60.21 मीटर पर पहुंचने के बाद करीब 15 घंटे तक स्थिर रहा, लेकिन बुधवार सुबह फिर इसमें एक सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। सुबह नौ बजे बक्सर में गंगा का जलस्तर 60.22 मीटर पहुंच गया, जो खतरे के निशान 60.32 मीटर से महज 10 सेंटीमीटर नीचे है।
जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी के बीच जिले में वर्षा का सिलसिला भी जारी है। ऐसे में तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का संकट अभी टला नहीं है। केंद्रीय जल आयोग ने मंगलवार से गंगा के जलस्तर में गिरावट का पूर्वानुमान जारी किया है।
जिले में गंगा के साथ कर्मनाशा, धर्मावती और ठोरा नदियों के उफान से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। कर्मनाशा खतरे के निशान से करीब डेढ़ मीटर ऊपर बह रही है। जिले में लगातार हो रही वर्षा भी बाढ़ की स्थिति को प्रभावित कर रही है।
सदर प्रखंड में बीते 48 घंटे के दौरान औसत से करीब तीन गुना अधिक वर्षा दर्ज की गई है। ऐसे में नदियों के जलस्तर और निचले इलाकों में जलजमाव पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।
वाराणसी-प्रयागराज में भी बदला जलस्तर का रुख
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार वाराणसी में सोमवार रात आठ बजे से बुधवार सुबह चार बजे तक गंगा का जलस्तर लगातार प्रति घंटे घट रहा था। इसके बाद बुधवार सुबह फिर करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वृद्धि शुरू हो गई। प्रयागराज में भी जलस्तर के रुख में ऐसी ही स्थिति देखने को मिली है। इससे बक्सर में जलस्तर में कमी के पूर्वानुमान के बावजूद निगरानी बढ़ाने की जरूरत बनी हुई है।
कर्मनाशा अब भी ज्यादा खतरनाक
चौसा में गंगा के संगम से पहले कर्मनाशा नदी का जलस्तर बुधवार की दोपहर दो बजे 61.91 मीटर पर दर्ज किया गया। इस नदी में गंगा के मुकाबले अधिक तेजी है। यह खतरे के निशान 60.39 मीटर से 1.52 मीटर ऊपर है। गंगा जहां खतरे के निशान के बेहद करीब है, वहीं कर्मनाशा का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर होने के कारण चौसा क्षेत्र के सिकरौल और बनारपुर गांव अधिक प्रभावित हैं।
