बक्सर । प्रखण्ड का मनोहरपुर गांव सिकरौल-बक्सर मुख्य नहर पर बसा है। यहां के लोग आवागमन के लिए दुपहिया-चारपहिया वाहन भी रखे हैं। लेकिन, दुर्भाग्य कि ये वाहन किसी के दरवाजे पर नहीं जाते। क्योंकि उनके घर तक जाने का रास्ता ही नहीं है। लोग नहर पर बिजली का पोल रखकर उसके माध्यम से आना-जाना करते हैं। यहां विकास को आईना दिखा रहा नहर पर बनाया गया यह रास्ता जिले की व्यवस्था को भी उजागर कर रहा है। असल में, नहर के ऊपर आजतक पुलिया का निर्माण नहीं हुआ है। इस परिस्थिति में लोग किसी तरह आवागमन के लिए उस पर बिजली का खंभा रखकर काम चला रहे हैं। यह भी कितना खतरनाक है यह तस्वीर में ही दिख रहा है। यहां लोग मजबूरी में टूटे बिजली के खंभों को नहर के ऊपर रख आवागमन करते हैं। जिससे कभी भी अनहोनी की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि इसके लिए कई बार जन प्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई लेकिन, आश्वासन देकर छोड़ देते हैं। बहरहाल, इस व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। वे कहते हैं यह कैसी व्यवस्था है कि वर्षों से उनकी अनदेखी की जा रही है। रात में हुई तबीयत खराब तो बढ़ जाती है परेशानी

यूं तो बच्चे हों या वृद्ध, महिला हों या पुरुष कहीं जाने के लिए सभी इसी रास्ते नहर पार कर वाहन पकड़ते हैं। लेकिन, अधिक परेशानी तब होती है जब रात के समय किसी की तबीयत खराब हो जाए। उस परिस्थिति में पोल के रास्ते मरीज को नहर पार कराना टेढ़ी खीर साबित होता है। कई बार इसके चलते मरीजों की जान पर बन आती है। बगल में निर्माण अधूरा छोड़ भाग गई एजेंसी

बताया जाता है कि गांव के पास सात साल पहले एक पुलिया का निर्माण शुरू हुआ था लेकिन, आधा निर्माण के बाद एजेंसी भाग गई। पुलिया के निर्माण के दौरान उसकी शट¨रग धंस गई थी। इसके बाद अर्धनिर्मित हालत में पुलिया पड़ी है। हैरत की बात यह कि उसके बाद से लेकर आज तक संबंधित विभाग ने इसकी फिक्र नहीं की कि एजेंसी के भागने के बाद पुलिया की स्थिति क्या है। वह बनेगी भी या नहीं। लोकसभा चुनाव को ले बंधी उम्मीदें

आसन्न लोकसभा चुनाव को देखते हुए एक बार फिर पुलिया को लेकर ग्रामीणों की उम्मीदें बंधी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव से पूर्व हर बार जन प्रतिनिधियों से पुलिया को लेकर गुहार लगाई जाती है। इसको लेकर वे आश्वासन भी देते हैं। परन्तु, उनका आश्वासन आज तक पूरा नहीं हुआ है। इस बार देखना है कि लोगों की उम्मीद पूरी हो पाती है अथवा नहीं। क्या कहते हैं ग्रामीण

ग्रामीण चुनमुन पांडेय, शशि उपाध्याय व प्रियांक उपाध्याय आदि ने बताया कि आजादी के बाद विकास का पहिया कहां से कहां पहुंच गया। गांव के लोग भी विकास कर गए। उनके पास गाड़ियां हो गईं। लेकिन, आज भी गांव से आने-जाने के लिए पुलिया का नहीं बनना सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है।

Posted By: Jagran