विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना के बीच गंगा की धारा पर नया विवाद; बिहार में बढ़ी बेचैनी

Published: Fri, 19 Jun 2026 08:26 AM (IST)

उत्तर प्रदेश में ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए गंगा की धारा मोड़ने के प्रयास से बिहार के बक्सर और भोजपुर जिलों ...और पढ़ें

नैनीजोर में तेजी से हो रहा खेतों का कटाव। जागरण

नैनीजोर में तेजी से हो रहा खेतों का कटाव। जागरण

HighLights

  1. यूपी में एक्सप्रेसवे हेतु गंगा की धारा मोड़ने का प्रयास।

  2. बक्सर-भोजपुर में कटाव और बाढ़ का खतरा बढ़ा।

  3. ग्रामीणों ने निर्माण कार्य पर उठाए गंभीर सवाल।

संवाद सहयोगी, ब्रह्मपुर (बक्सर)। उत्तर प्रदेश में गाजीपुर से बलिया होते हुए मांझी तक बन रहे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की सुरक्षा के लिए गंगा नदी की धारा मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। 

इससे बिहार के बक्सर और भोजपुर जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों में कटाव और बाढ़ की आशंका गहरा गई है। जानकारी के अनुसार, यूपी सरकार बक्सर-बलिया सीमा पर गंगा की धारा को नियंत्रित करने के लिए 1200 मीटर लंबा स्पर (ठोकर) बना रही है।

यह निर्माण नदी की धारा के भीतर तक किया जा रहा है, जिससे गंगा का रुख बिहार की ओर मुड़ने की आशंका जताई जा रही है।

दक्ष‍िणी की ओर बढ़ेगा पानी का दबाव 

नैनीजोर के पूर्व मुखिया राजकिशोर प्रसाद और ग्रामीण नेता विजेंद्र यादव का कहना है कि ठोकर निर्माण से नदी का दबाव उत्तर दिशा में कम होकर दक्षिण की ओर बढ़ेगा।

इससे गंगा की धारा तेज होकर बक्सर जिले के केशवपुर से नैनीजोर तथा भोजपुर के शाहपुर प्रखंड के करीब एक दर्जन गांवों को प्रभावित कर सकती है। यह क्षेत्र पहले से ही कटाव की समस्या से जूझ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि हल्दिया-प्रयागराज जलमार्ग परियोजना के तहत पांच वर्ष पूर्व नैनीजोर में मुख्य धारा की बजाय दक्षिणी किनारे से मिट्टी निकाले जाने के कारण दक्षिणी तट पर कटाव लगातार बढ़ता गया है।

नैनीजोर के सामने डेल्टा से बने छाड़न क्षेत्र की ठोकर को भी ग्रामीण कटाव का प्रमुख कारण मान रहे हैं। इसे हटाने की मांग को लेकर ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं।

नदी की प्रकृत‍ि समझे बिना हो रहा काम  

उनका कहना है कि वर्तमान कटाव निरोधी कार्यस्थल से लगभग 500 मीटर पश्चिम स्थित इस ठोकर को काट देने से गंगा की धारा बक्सर की ओर मुड़ जाएगी, जिससे गांवों पर पानी का दबाव कम होगा और कटाव में भी कमी आएगी।

धरने पर बैठे मैनेजर यादव और विजेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि जल संसाधन विभाग के अधिकारी नदी की प्रकृति को समझे बिना कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में रात के समय फाउंडेशन में बालू के बजाय मिट्टी भरी बोरियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि वर्तमान योजना पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो कटाव और बाढ़ की समस्या और गंभीर हो सकती है तथा क्षेत्र के गांवों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।