Dr Arun Kumar: बक्सर के लाल की दुनियाभर में धूम, UK के जर्नल में प्रकाशित हुई नई शोध
बक्सर के डॉ. अरुण कुमार के नए शोध ने दुनिया भर में प्रशंसा बटोरी है। उनका शोध यूके के एक प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित हुआ है, जिससे वैज्ञानिक समुदाय में उत्साह है। इस उपलब्धि से बक्सर क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है और लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं।

डॉक्टर अरुण कुमार परिवार के साथ। फाइल फोटो
अरूण विक्रांत, डुमरांव (बक्सर)। बक्सर जिले के डुमरांव अनुमंडल क्षेत्रान्र्तगत खड़रिचा गांव के युवा वैज्ञानिक डॉ. अरूण कुमार ने मानव कल्याण कारी रिर्सच की दुनिया में धमाल मचा रखा है। प्रसूति महिलाओं के स्तन दूध में यूरेनियम पाए जाने से नवजात शिशुओं के स्वास्थ पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। शिशुओं में अपनी माताओं की तुलना में गैर कैंसर जन्य जोखिम की संभावना अधिक है।
पहली बार इसका खुलासा महावीर कैंसर संस्थान और अनुसंधान संस्थान, पटना के वरीय वैज्ञानिक Dr Arun Kumar समेत उनकी शोध टीम ने रिर्सच के बाद किया है। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध कार्य को यूके के नेचर सांइटिफिक रिपोर्टस जर्नल ने गत 21 नवंबर, 2025 को प्रकाशित किया है।
क्या है रिसर्च?
यह रिसर्च दुनिया में प्रकाशित होने वाला पहला रिर्सच है। इस रिर्सच का उद्येश्य शिशुओं को स्तन कराने वाली प्रसूति माताओं के स्तन दूध के माध्यम से शिशुओं में यूरेनियम के संपर्क का मूल्यांकन करना था। इस रिर्सच कार्य के लिए बिहार के विभिन्न जिलों से 40 शिशुओं को स्तन पान कराने वाली प्रसूति महिलाओं का यादृच्छिक चयन किया गया था।
महावीर कैंसर संस्थान व शोध संस्थान,पटना के युवा वैज्ञानिक डॉ. कुमार ने बताया कि अध्ययन के बाद स्तन के दूध में यूरेनियम की मात्रा 0 से 5.25 माइक्रोग्राम प्रति लीटर के बीच मौजूद थी, लेकिन यह पानी में विश्व स्वास्थ संगठन(डब्लूएचओ) द्वारा निर्धारित यूरेनियम की अनुमानित सीमा 10 माइक्रोग्राम प्रति लीटर की तुलना में अधिक सुरक्षित थी।
सत्तर प्रतिशत शिशु आबादी में गैर कैंसर कारी स्वास्थ संबंधी प्रभाव पैदा करने की क्षमता थी। महावीर कैंसर संस्थान सह शोध संस्थान के वरीय वैज्ञानिक शोधार्थी डॉ. कुमार ने बताया कि शोध के दौरान बिहार के विभिन्न अन्य जिला की तुलना में कटिहार जिला के स्तन दूध के नमूनों का अध्ययन के बाद सबसे अधिक यूरेनियम 238 की मात्रा पाई गई थी। इन क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर यू 238 की जैव निगरानी की आवश्यकता है।
‘स्तन दूध में यूरेनियम की मौजूदगी का शिशु के स्वास्थ पर संभावित परिणाम’ स्तन के दूध में यूरेनियम की मौजूदगी से शिशु के स्वास्थ पर कई संभावित परिणाम हो सकते है। संभावित परिणामों में नेफ्रोटाॅक्सिसिटी शामिल है। जो शैशवास्था में इसके संपर्क में आने पर दीर्घकालिक गुर्दे को नुकसान पहुंचा सकता है।
साथ ही तंत्रिका संबंधी विकास पर असर पड़ने की संभावना हो सकती है। वैज्ञानिक डॉ. कुमार ने बताया कि डब्लूएचओ द्वारा अब तक स्तन दूध में यूरेनियम का स्तर तय नही किया जा सका है। माता अपने शिशुओं का स्तन का दूध आसानी से पीला सकती है। यूरेनियम पानी और मिट्टी में पाया जाता है।
शोध टीम में बक्सर के अरुण कुमार शामिल
रिसर्च टीम-स्तन के दूध में यूरेनियम की शोध कार्य में शामिल विज्ञानियों की टीम में महावीर कैंसर संस्थान सह अनुसंधान संस्थान के विभागाध्यक्ष प्रो.अशोक कुमार घोष, डॉ. तेजस्वी पांडेय, डॉ. मोहम्मद अली, डॉ. अभिनव श्रीवास्तव, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. चिंरजीवी खंडेलवाल एवं डॉ. मनीषा सिंह के अलावा भूगर्भ सर्वे आफ इंडिया के वैज्ञानिक डॉ. अखौरी प्रिया, यूपीइएस देहरादून के वैज्ञानिक डॉ. ध्रुव कुमार, वैज्ञानिक रामलिंगन पीरामन, आइपर हाजीपुर के राहुल लक्ष्मण, डॉ. अशोक शर्मा एवं डॉ. समीर ढींगवाल आदि के नाम शामिल हैं।
साथ ही शोध टीम में अन्य सहयोगी के तौर पर महावीर अनुसंधान संस्थान के कन्हैया कुमार, गोविंद कुमार, राधिका अग्रवाल एवं शिवकुमार भी शामिल थे। जीवन वृत-बक्सर जिले के खड़रिचा गांव के मूल निवासी एयरफोर्स के अवकाश प्राप्त अभियंता मोती प्रसाद एवं माता प्रभावती देवी के तीन पुत्रों में सबसे छोटे पुत्र है डॉ. अरूण कुमार।
महावीर कैंसर संस्थान सह अनुसंधान संस्थान में गत 15 सालों से वरीय वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत डॉ. कुमार कैंसर से जुड़े मसले पर कई महत्वपूर्ण शोध, पानी में आर्सेनिक, पीत्ताशय की थैली में कैंसर जैसे रोग पर रिसर्च कार्य को अंजाम दे चुके है।इनके रिसर्च के दौरान वर्ष 2021 में जापान विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी एजेंसी, टोक्यो की सहायता से महावीर कैंसर संस्थान में शोध केंद्र की स्थापना हुई थी।
डॉ. कुमार इस जिले के गंगा तटवर्तीय इलाके के दर्जन भर गांव में जल का मीठा जहर आर्सेनिक पर रिसर्च कर चुके है। उनके रिसर्च का सुखद परिणाम है, सिमरी प्रखंड क्षेत्र के लोगो को आर्सेनिक मुक्त शुद्ध पेयजल सुविधा के लिए वाटर प्लांट की शुरूआत।

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