मोटी हो रहीं बक्सर की महिलाएं, सर्वे में सामने आई तस्वीर; कम वजन की समस्या भी बरकरार
बक्सर में महिलाओं के स्वास्थ्य की दोहरी चुनौती सामने आई है, जहां NFHS-6 रिपोर्ट के अनुसार 15-49 आयु वर्ग की ...और पढ़ें

बक्सर की महिलाओं में बढ़ रहा मोटापा। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
बक्सर में 27.2% महिलाएं मोटापे या ओवरवेट की श्रेणी में।
पांच साल में मोटापे में 10.6% अंक की वृद्धि दर्ज।
24.6% महिलाएं अभी भी कम वजन की समस्या से जूझ रहीं।
जागरण संवाददाता, बक्सर। बक्सर में महिलाओं के बीच मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
2023-24 के आंकड़ों के अनुसार जिले में 15 से 49 वर्ष की 27.2 प्रतिशत महिलाएं सामान्य से अधिक वजन या मोटापे (BMI 25 या उससे अधिक) की श्रेणी में हैं।
पांच साल पहले हुए एनएफएचएस-5 (2019-21) में यह आंकड़ा 16.6 प्रतिशत था। यानी इस अवधि में ओवरवेट या मोटापे की हिस्सेदारी में 10.6 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई है।
NFHS-6 में 27.2 प्रतिशत महिलाएं ओवरवेट या मोटापे की श्रेणी में
सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं में एक तरफ मोटापे की स्थिति बढ़ी है, तो दूसरी ओर कम वजन की समस्या भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
एनएफएचएस-6 में बक्सर की 24.6 प्रतिशत महिलाएं कम बाडी मास इंडेक्स (बीएमआई 18.5 से कम) की श्रेणी में पाई गईं।
एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 21.1 प्रतिशत था। इससे जिले में महिलाओं के पोषण की तस्वीर में एक साथ दो विपरीत स्थितियां सामने आती हैं, एक वर्ग में कम वजन की समस्या बनी हुई है।
वहीं दूसरे वर्ग में अधिक वजन और मोटापा बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए महिलाओं में बढ़ता मोटापा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिक वजन गैर-संचारी रोगों के जोखिम से जुड़ा होता है।
2019-21 में एनएफएचएस- 5 में यह आंकड़ा था 16.6 प्रतिशत
इसी सर्वे में जिले की महिलाओं में 12.4 प्रतिशत का रक्त शर्करा स्तर 140 एमजी/डीएल से अधिक या वे मधुमेह की दवा ले रही हैं। हालांकि यह आंकड़ा एनएफएचएस-5 के 12.9 प्रतिशत से थोड़ा कम है।
रक्तचाप के मामले में भी सर्वे ने जिले की महिलाओं की स्थिति दर्ज की है। एनएफएचएस-6 के अनुसार 12.7 प्रतिशत महिलाएं उच्च रक्तचाप या इसके लिए दवा लेने की श्रेणी में हैं।
एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 13.9 प्रतिशत था। महिलाओं के पोषण से जुड़े ये आंकड़े संकेत देते हैं कि बक्सर में स्वास्थ्य की चुनौती केवल कुपोषण तक सीमित नहीं है।
कम वजन के साथ-साथ अधिक वजन और मोटापा भी अब महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मुद्दा बनकर सामने आ रहा है। खासकर महिलाओं में पांच साल के भीतर ओवरवेट/मोटापे की हिस्सेदारी में हुई 10.6 प्रतिशत अंक की वृद्धि इस बदलाव को रेखांकित करती है।
महिलाओं में बढ़ते मोटापे के पीछे बदलती जीवनशैली, खानपान की आदतें और शारीरिक गतिविधियों में कमी प्रमुख है। नियमित व्यायाम का अभाव, फास्ट फूड, तले-भुने खाद्य पदार्थों और मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन भी वजन बढ़ने की आशंका बढ़ाता है। पर्याप्त नींद नहीं लेना, मानसिक तनाव और लंबे समय तक बैठकर काम करने जैसी आदतें भी वजन बढ़ाती हैं।
डाॅ. स्वाति भारती, चिकित्सा पदाधिकारी, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बक्सर।
