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श्रावणी फुहार के बीच भोलेनाथ का जलाभिषेक; बक्सर के शिवालयों में उमड़ी आस्था की भीड़

Published: Mon, 17 Aug 2026 12:28 PM (IST)

सावन की तीसरी सोमवारी पर बक्सर के शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी, जहां बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं ने ...और पढ़ें

बक्‍सर के श‍िवालय में जलाभि‍षेक करते भक्‍त। जागरण

बक्‍सर के श‍िवालय में जलाभि‍षेक करते भक्‍त। जागरण

जागरण संवाददाता, बक्सर। सावन की तीसरी सोमवारी पर भोर करीब चार बजे मंगला आरती के बाद भोले भंडारी के दरबार श्रद्धालुओं के लिए खुलते ही हर-हर महादेव और बोलबम के जयघोष से शिवालय गूंज उठे।

सुबह हुई श्रावणी फुहार को देखकर ऐसा लगा, मानो इंद्रदेव भी देवों के देव महादेव का जलाभिषेक कर रहे हों। बारिश के बावजूद विभिन्न शिवालयों में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।

शिवालयों में सुबह से लगी रही भक्‍तों की कतार 

शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए पौराणिक एवं प्रसिद्ध रामरेखाघाट स्थित श्री रामेश्वर नाथ मंदिर, चरित्रवन स्थित श्री आदिनाथ अखाड़ा (नाथ बाबा घाट) के महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। 

इसी तरह जेल रोड स्थित सोमेश्वर नाथ मंदिर, वामनेश्वर महादेव मंदिर, सोहनीपट्टी स्थित श्री गौरीशंकर मंदिर, सिविल लाइन स्थित सिद्धेश्वरनाथ मंदिर तथा अंबेडकर चौक के निकट स्थित पातालेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली।

मंदिरों के पुजारियों ने शिवलिंग का विभिन्न रंगों के फूल-मालाओं, बिल्वपत्र और चंदन आदि से मनोहारी शृंगार किया। रामेश्वर नाथ मंदिर के पुजारी विक्की बाबा ने बताया कि संध्या आरती के दौरान भी बाबा का विशेष शृंगार किया जाएगा।

भोले भंडारी का जलाभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे। कतारबद्ध होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था।

Buxar 2

श‍िवभक्‍त‍ि में डूबे रहे भक्‍त 

श्रद्धालुओं के उल्लास से मंदिर परिसर पूरी तरह शिवमय नजर आया। हाथों में पूजन सामग्री लिए भक्तों के मुख से 'ओम नमः शिवाय', 'हर-हर महादेव' और 'बोलबम' के जयघोष लगातार गूंजते रहे।

श्रद्धालुओं के चेहरों पर शिवदर्शन की आतुरता साफ झलक रही थी। पुजारी गोवर्धन पांडेय ने कहा कि श्रद्धालुओं ने दूध और जल से शिवलिंग का अभिषेक करते हुए अपनी अटूट आस्था अर्पित की।

सावन की चौथी एवं अंतिम सोमवारी 24 अगस्त को होगी। अंतिम सोमवारी होने के कारण उस दिन श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।