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बक्सर में बारिश का रौद्र रूप, 48 घंटों में सामान्य से 302% ज्यादा बरसे मेघ; केसठ में सबसे अधिक वर्षा

Published: Wed, 02 Sep 2026 04:52 PM (GMT+05:30)

बक्सर जिले में पिछले 48 घंटों में सामान्य से 302.55% अधिक वर्षा दर्ज की गई, जिससे धान की फसलों को ...और पढ़ें

केसठ में सबसे ज्यादा 86.40 मिमी बारिश

केसठ में सबसे ज्यादा 86.40 मिमी बारिश

HighLights

  1. बक्सर में सामान्य से 302% अधिक वर्षा दर्ज।

  2. केसठ में सर्वाधिक 86.40 मिमी बारिश हुई।

  3. धान की फसल को लाभ, जलजमाव की चिंता।

जागरण संवाददाता, बक्सर। जिले में पिछले 48 घंटे के दौरान हुई भारी वर्षा ने सामान्य वर्षापात के आंकड़े को काफी पीछे छोड़ दिया है। जिला कृषि कार्यालय की प्रखंडवार रिपोर्ट के अनुसार दो सितंबर तक जिले में औसत 53.73 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि इस अवधि का सामान्य वर्षापात महज 13.35 मिमी है। इस तरह वर्षा सामान्य से 302.55 प्रतिशत अधिक रही।

आंकड़े प्रतिदिन सुबह आठ बजे तक हुई वर्षा पर आधारित हैं। इसके बाद भी आसमान में बादल छाए रहे और रुक-रुककर बारिश होती रही। इससे आने वाले दिनों में वर्षा का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है।

केसठ में सबसे ज्यादा 86.40 मिमी बारिश

जिला कृषि कार्यालय के अनुसार दो दिनों में प्रखंडवार सबसे अधिक वर्षा केसठ में 86.40 मिमी दर्ज की गई। इसके बाद राजपुर में 75.20 मिमी, ब्रह्मपुर में 65.80 मिमी और डुमरांव में 65.40 मिमी बारिश हुई।

चौसा में 61.40 मिमी, बक्सर में 61.20 मिमी, इटाढ़ी में 55.40 मिमी और चौगाईं में 51.20 मिमी वर्षा दर्ज की गई। नावानगर में 43 मिमी, सिमरी में 33 मिमी और चक्की में 23 मिमी बारिश हुई।

सितंबर की शुरुआत में ही मानसून ने पकड़ी रफ्तार

जिले में सितंबर माह का सामान्य औसत वर्षापात 200.2 मिलीमीटर है। महीने की शुरुआत में ही तेज बारिश होने से आंकड़ों के आधार पर मानसून की स्थिति अचानक मजबूत हुई है।

लगातार बारिश से खेतों में नमी बढ़ी है और धान की फसल को फायदा मिलने की उम्मीद है। खरीफ फसलों के लिए यह बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आई है। हालांकि जरूरत से ज्यादा पानी निचले इलाकों में परेशानी भी बढ़ा सकता है।

किसानों को राहत, जलजमाव की भी चिंता

लगातार वर्षा से खेतों में पर्याप्त नमी पहुंची है, जिससे धान समेत खरीफ फसलों को लाभ मिलने की संभावना है। किसानों को सिंचाई पर होने वाले खर्च में भी राहत मिल सकती है।

दूसरी ओर निचले इलाकों में लगातार बारिश के कारण जलजमाव की स्थिति बनने की आशंका है। ऐसे में खेतों और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की निकासी चुनौती बन सकती है। जिले में आने वाले दिनों की बारिश पर अब किसानों के साथ प्रशासन की भी नजर रहेगी।