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मुस्लिम को दुर्गापूजा का लाइसेंस, हिंदू के नाम ताजिया; बक्सर के नावानगर में 65 साल से अनोखी परंपरा

Published: Mon, 28 Sep 2026 09:50 AM (IST)

नावानगर (बक्सर) में 65 वर्षों से एक अनूठी परंपरा कायम है, जहाँ दुर्गापूजा का लाइसेंस मुस्लिम परिवार के नाम और ...और पढ़ें

नावानगर का पूजा पंडाल और लाइसेंस लेने वाले मुस्लिम परिवार के रिंटू मियां। जागरण

नावानगर का पूजा पंडाल और लाइसेंस लेने वाले मुस्लिम परिवार के रिंटू मियां। जागरण

HighLights

  1. नावानगर में 65 साल से हिंदू-मुस्लिम एकता की परंपरा।

  2. दुर्गापूजा लाइसेंस मुस्लिम परिवार, ताजिया लाइसेंस हिंदू परिवार के नाम।

  3. दोनों समुदाय मिलकर निभाते हैं पर्वों की जिम्मेदारियाँ, सौहार्द की मिसाल।

संवाद सहयोगी, नावानगर (बक्सर)। पर्वों की पहचान केवल पूजा-पंडाल और जुलूसों से नहीं होती, बल्कि उन रिश्तों से भी होती है, जो पीढ़ियों को जोड़ते हैं। नावानगर के पड़ाव पोखरा में ऐसी ही एक परंपरा पिछले 65 वर्षों से कायम है।

यहां हिंदू समाज के लोग मां दुर्गा की पूजा करते हैं, लेकिन दुर्गापूजा समिति का लाइसेंस मुस्लिम परिवार के नाम पर है। इसी तरह ताजिया जुलूस का लाइसेंस हिंदू समाज के लोगों के नाम पर रहता है।

छह दशक से अधिक समय से चली आ रही यह परंपरा गांव में आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बनी हुई है। शारदीय नवरात्र को लेकर इस समय पड़ाव पोखरा स्थित श्री दुर्गा पूजा समिति एवं छात्र कला परिषद में तैयारियां तेज हैं।

समिति की स्थापना वर्ष 1960 में भटौली गांव निवासी तत्कालीन चेयरमैन शिवजी सिंह, लल्लू सिंह, विक्रमादित्य सिंह समेत ग्रामीणों ने की थी।

उस समय दुर्गापूजा का लाइसेंस मुस्लिम समुदाय के निजाम मियां के नाम से बनाया गया था। उनके निधन के बाद अब यह लाइसेंस उनके पुत्र अमजद हुसैन उर्फ रिंटू मियां के नाम पर है।

Avinash

(ताज‍िया का लाइसेंस लेते हैं अविनाश कुमार स‍िंह।)

पूजा में हिंदू-मुस्लिम मिलकर निभाते हैं जिम्मेदारी

समिति से जुड़े लोगों के अनुसार, पर्व के दौरान दोनों समुदायों के लोग एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करते हुए सहयोग करते हैं। दुर्गापूजा हो या ताजिया जुलूस, जिम्मेदारियां समुदाय की सीमा में नहीं बंटतीं।

यही वजह है कि छह दशक से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी रूप में आगे बढ़ रही है। समिति के अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने बताया कि वर्ष 1960 से यहां लगातार मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जा रही है।

इस बार बिक्रमगंज के राजू एंड टीम के कलाकार करीब 50 फीट ऊंचा पंडाल तैयार कर रहे हैं। इसमें मां दुर्गा के साथ मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी।

पांच लाख रुपये की लागत से तैयार हो रहा पंडाल

समिति के कोषाध्यक्ष उमेश कुमार के अनुसार पंडाल और प्रतिमा निर्माण पर करीब पांच लाख रुपये खर्च होंगे। पंडाल निर्माण में करीब 400 बांस, रस्सी, 50 किलो कांटी, 600 ईंट, 2500 मीटर कपड़ा और 300 शीट थर्मोकोल का इस्तेमाल किया जा रहा है।

पंडाल की ऊंचाई करीब 50 फीट होगी। दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। पंडाल परिसर में निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे।

कमल महल में शेर पर सवार दिखेंगी मां दुर्गा

मूर्ति कलाकार रवि शर्मा और मंगल शर्मा के अनुसार इस बार मां दुर्गा की प्रतिमा को कमल महल की थीम वाले पंडाल में स्थापित किया जाएगा। इसमें मां दुर्गा शेर पर सवार नजर आएंगी। पं

डाल डिजाइनर विकास शर्मा ने बताया कि 50 फीट ऊंचा पंडाल आकर्षण का केंद्र होगा। इसमें मां दुर्गा के साथ अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित की जाएंगी।

पूजा की तैयारियों में समिति के अध्यक्ष राजेश गुप्ता, उपाध्यक्ष सुजीत सिंह उर्फ छोटू, कोषाध्यक्ष उमेश यादव, सह कोषाध्यक्ष गोलू मिश्रा, सचिव अभिषेक सिंह, व्यवस्थापक श्रीकांत गोविंद, प्रिंस गुप्ता, दीपनारायण शर्मा, शैलेश बाबू, राजू यादव, राकेश यादव समेत अन्य सदस्य जुटे हैं। ग्रामीणों और बाजार के व्यवसायियों का भी पूजा आयोजन में सहयोग मिलता है।