बक्सर में 76.63 करोड़ की सड़क परियोजनाएं अधर में, पेड़-खंभे बने रोड़ा, नीतीश कुमार ने किया था शिलान्यास
बक्सर में 76.63 करोड़ की दो सड़क परियोजनाएं एनओसी के अभाव में अधर में लटकी हैं, जिससे शहर में भीषण जाम, धूल और दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं।

शहर के ज्योति चौक पर बाईपास का निर्माण अटका। फाइल
HighLights
बक्सर की दो प्रमुख सड़क परियोजनाएं अधर में।
वन विभाग की एनओसी के कारण काम ठप।
शहर में भीषण जाम और प्रदूषण से लोग परेशान।
जागरण संवाददाता, बक्सर। शहर को आए दिन लगने वाले ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने और आवागमन को सुगम बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई 76.63 करोड़ की दो सड़क परियोजनाएं अधर में लटक गई हैं।
बिहार सरकार द्वारा स्वीकृत गोलंबर से ज्योति चौक फोरलेन बाईपास और बड़ी मस्जिद से केंद्रीय कारा तक पथ चौड़ीकरण का निर्माण कार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) महीनों से अटका हुआ है।
कागजी लिखा-पढ़ी और विभागीय खींचतान का सीधा असर शहर के बुनियादी ढांचे पर पड़ रहा है, जहां जगह-जगह खोदी गई सड़कें और बिखरी निर्माण सामग्री आम नागरिकों के लिए दुर्घटना और धूल-प्रदूषण का सबब बन चुकी है।
अधूरे निर्माण कार्य के कारण धूल और जाम से आम आदमी परेशान
इन दोनों महत्वपूर्ण परियोजनाओं की नींव राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी प्रगति यात्रा के दौरान रखी थी।
फरवरी 2025 में बक्सर दौरे के क्रम में मुख्यमंत्री ने राजपुर प्रखंड मुख्यालय में आयोजित एक भव्य प्रशासनिक कार्यक्रम में इन योजनाओं की औपचारिक घोषणा करते हुए इनका शिलान्यास किया था।
राज्य सरकार के पथ निर्माण विभाग के अंतर्गत स्वीकृत पहली परियोजना गोलंबर से ज्योति चौक फोरलेन बाईपास की कुल लागत 41.52 करोड़ रुपए है।
इस 2.5 किलोमीटर लंबे मार्ग को 14 मीटर चौड़ा फोरलेन बनाने, बीच में तीन फीट का डिवाइडर और दोनों ओर आरसीसी नाला निर्माण का प्रविधान है, जिसकी पूर्णता की समय-सीमा नवंबर 2026 निर्धारित है।
वहीं, दूसरी परियोजना बड़ी मस्जिद से केंद्रीय कारा तक सड़क चौड़ीकरण एवं नाला निर्माणकी कुल लागत 35.11 करोड़ रुपए है।
4.20 किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण एजेंसी वैष्णव कंस्ट्रक्शन द्वारा कराया जा रहा है, जिसे अप्रैल 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।
पेड़ और खंभे हटाए बगैर आगे नहीं बढ़ रहा काम
परियोजनाओं की धीमी गति का मूल कारण निर्माण स्थल पर खड़े सैकड़ों पेड़ और बिजली के खंभे हैं। गोलंबर से ज्योति चौक फोरलेन मार्ग के निर्माण क्षेत्र में लगभग 300 वृक्ष बाधक बने हुए हैं।
वन संरक्षण नियमानुसार क्षतिपूर्ति वनीकरण के लिए वैकल्पिक भूमि का हस्तांतरण किए बिना वन विभाग पेड़ों की कटाई या स्थानांतरण की अनुमति नहीं दे सकता।
इसके लिए पथ निर्माण विभाग ने सिमरी प्रखंड के केशोपुर मौजा में भूमि चिह्नित कर वन विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय (रांची) को प्रस्ताव भेजा था।
हालांकि, रांची कार्यालय द्वारा भूमि के स्वामित्व और दाखिल-खारिज से जुड़ी अतिरिक्त जानकारियां मांगते हुए फाइल वापस लौटा दी गई।
पथ निर्माण विभाग के प्रभारी कार्यपालक अभियंता विभूति चंद्र के अनुसार, मांगी गई सभी वांछित जानकारियां जुटाकर फाइल दोबारा रांची भेज दी गई है और जल्द एनओसी मिलने की उम्मीद है।
दूसरी ओर, बड़ी मस्जिद से जेल रोड मार्ग पर पेड़ों के साथ-साथ बिजली के खंभे और ओवरहेड तार भी बाधक बने हुए हैं, जिससे निर्माण एजेंसी पूरे मार्ग पर एक समान काम करने के बजाय केवल अवरोध-मुक्त टुकड़ों (पैचवर्क) में काम करने को मजबूर है।
किला मैदान से पंचमुखी हनुमान मंदिर तक नाला खोदाई से समस्या
प्रशासनिक स्तर पर हो रही इस देरी का सबसे घातक खामियाजा बक्सर के आम नागरिकों और यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।
निर्माण कार्य अधूरा और बाधित होने से सुबह और शाम के व्यस्त समय में गोलंबर, बस स्टैंड, सिंडीगेट और ज्योति चौक पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं।
जाम की इस स्थिति में मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस और स्कूली बसें फंसी रहती हैं। वहीं, बड़ी मस्जिद से जेल रोड मार्ग पर किला मैदान से पंचमुखी हनुमान मंदिर तक नाला निर्माण के लिए की गई अनियोजित खुदाई ने सड़क को काफी संकरा और खतरनाक बना दिया है।
खुले छोड़े गए गड्ढों और सड़कों पर उड़ती धूल के कारण दोपहिया चालक लगातार दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं और स्थानीय आबादी सांस की बीमारियों की चपेट में आ रही है।
मुख्यमंत्री द्वारा शिलान्यास किए जाने के बावजूद केवल विभागीय एनओसी के चक्कर में परियोजनाओं का ठप होना स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यशैली पर गंभीर सवालिया निशान खड़ा करता है।
