विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

गंगा में नहीं गिरेगा शहर का गंदा पानी, बक्सर में 19 नालों की होगी टैपिंग; 51 MLD क्षमता के STP बनेंगे

Published: Sun, 23 Aug 2026 08:52 AM (IST)Updated: Sun, 23 Aug 2026 08:55 AM (IST)

बक्सर में 256 करोड़ रुपये की सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) परियोजना अंतिम चरण में है, जिससे शहर के गंदे पानी ...और पढ़ें

गंगा को निर्मल बनाने की कवायद। जागरण

गंगा को निर्मल बनाने की कवायद। जागरण

HighLights

  1. 256 करोड़ की एसटीपी परियोजना अंतिम चरण में।

  2. शहर के गंदे पानी को गंगा में गिरने से रोकेगी।

  3. दो एसटीपी और तीन पंपिंग स्टेशन बनेंगे।

जागरण संवाददाता, बक्सर। शहर से निकलने वाले गंदे पानी को सीधे गंगा नदी में गिरने से रोकने और नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच गई है।

बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) के माध्यम से नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत प्रस्तावित इस परियोजना की निविदा प्रक्रिया अंतिम दौर में है। निविदा पूरी होते ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

करीब 256 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के तहत शहर में दो एसटीपी का निर्माण किया जाएगा। इनकी कुल क्षमता 51 एमएलडी होगी।

शहर के 19 प्रमुख नालों से निकलने वाले गंदे पानी को सीवरेज नेटवर्क के माध्यम से एसटीपी तक पहुंचाकर उसका उपचार किया जाएगा। इससे गंदे पानी को सीधे गंगा में गिरने से रोका जा सकेगा और नदी के प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है।

तीन जगह बनाए जाएंगे पंपिंग स्टेशन

शहर के विभिन्न हिस्सों से निकलने वाले सीवेज को एसटीपी तक पहुंचाने के लिए तीन मध्यवर्ती पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इनकी क्षमता क्रमश: 2.17 एमएलडी, 8.60 एमएलडी और 11.62 एमएलडी होगी।

प्रस्तावित स्थलों में पहला पंपिंग स्टेशन श्मशान घाट के समीप, दूसरा नाथ बाबा मंदिर के सामने नहर किनारे किला मैदान के आसपास और तीसरा अहिरौली स्थित अहिल्या मंदिर के पास बनाया जाना है।

बुडको के कनीय अभियंता रितु राज के अनुसार, पंपिंग स्टेशन सीवेज के प्रवाह को नियंत्रित करते हुए उसे एसटीपी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे शहर की जल निकासी व्यवस्था भी मजबूत होगी।

दो तकनीक पर आधारित होंगे एसटीपी

परियोजना के तहत दो अलग-अलग तकनीक से एसटीपी बनाए जाएंगे। मुख्य एसटीपी 50 एमएलडी क्षमता का होगा, जो एसबीआर (सीक्वेंसिंग बैच रिएक्टर) तकनीक पर आधारित होगा।

वहीं, दूसरी इकाई की क्षमता एक एमएलडी होगी और इसमें नेचर बेस्ड साल्यूशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

सीवेज को एसटीपी तक पहुंचाने के लिए शहर के 19 प्रमुख नालों की इंटरसेप्शन ड्रेन टैपिंग की जाएगी। इसके अलावा करीब 8.68 किलोमीटर लंबा सीवर नेटवर्क बिछाया जाएगा।

इसमें मैनुअल और मैकेनिकल तरीके से संचालित स्क्रीन गेट लगाए जाएंगे। उपचारित पानी के सुरक्षित निस्तारण के लिए करीब 2.7 किलोमीटर लंबी राइजिंग मेन पाइपलाइन भी बिछाई जाएगी। मुख्य एसटीपी का निर्माण सारिमपुर में गंगा पुल के पास प्रस्तावित है।

24 महीने में पूरा करना है काम

परियोजना को पूरा करने की कुल अवधि 24 महीने निर्धारित की गई है। इसमें डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और कमीशनिंग का कार्य शामिल है।

शुरुआती तीन महीने ट्रायल और कमीशनिंग के लिए रखे गए हैं। निर्माण करने वाली एजेंसी को परियोजना पूरी होने के बाद 15 वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी जाएगी।

2011 से अधर में है परियोजना

बक्सर की सीवरेज परियोजना करीब 15 वर्षों से अधर में है। वर्ष 2011 में परियोजना की शुरुआत की गई थी और इसे 2013 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।

उस समय चीनी कंपनी ट्राईटेक ने करीब 52 करोड़ रुपये की निविदा पर काम शुरू किया था। हालांकि, निर्माण सामग्री की कीमत बढ़ने का हवाला देते हुए कंपनी ने करीब 10 प्रतिशत काम करने के बाद परियोजना से हाथ खींच लिया।

इसके बाद वर्ष 2014 में परियोजना का प्राक्कलन बढ़ाकर करीब 70 करोड़ रुपये किया गया और 18 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई।

इसके बावजूद काम पूरा नहीं हो सका। बाद के वर्षों में कई बार प्राक्कलन में संशोधन किया गया, लेकिन परियोजना धरातल पर नहीं उतर सकी।

नए स्थल को लेकर तकनीकी पेच की आशंका

परियोजना के दोबारा शुरू होने से उम्मीद जगी है, लेकिन नए स्थल के चयन को लेकर भविष्य में तकनीकी अड़चन की आशंका भी है। एसटीपी के लिए गोलंबर-छोटकी सारिमपुर रोड के पूर्व और गंगा पुल के बीच की जमीन चिह्नित की गई है।

पूर्व में चिह्नित स्थल पर किए गए आधे-अधूरे निर्माण का उपयोग नए स्थल के चयन के बाद नहीं हो पाएगा। वहीं, सबसे बड़ी चुनौती यह है कि प्रस्तावित नए स्थल के आसपास से गंगा नदी पर बनने वाला तीसरा पुल भी गुजर रहा है।

पुल का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। ऐसे में एसटीपी के निर्माण और पुल परियोजना के बीच भविष्य में किसी तरह का तकनीकी या भूमि संबंधी टकराव न हो, इसके लिए समन्वय जरूरी होगा।