बक्सर : भोजपुरी में पहली लघु फिल्म बना कर चर्चा में आए निर्देशक अमित मिश्रा का कहना है कि भोजपुरी सिनेमा को संक्रमण काल से बचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री हजारों करोड़ रुपये के आकार की हो गई है, लेकिन हाल के दशकों में एक कालजयी फिल्म नहीं दे सकी है। भोजपुरी सिनेमा के परिप्रेक्ष्य में यह कथन एकदम आधारहीन और वास्तविकता से कोसों दूर लगता है। यह बेसिर पैर की कहानियों, उल-जलूल अभिनय और अश्लीलता का पर्याय बन चुकी है।

पेशे से इंजीनयर डुमरांव के इस युवा निर्देशक की पहली लघु फिल्म ललका गुलाब शुक्रवार को यू-ट्यूब पर रिलीज हुई। पहले ही दिन फिल्म को जबरदस्त रिस्पांस मिला और हजारों लोगों ने इस फिल्म को देखा। बा•ारवाद की भेंट चढ़ी घिसी पिटी पटकथा के उलट ललका ़गुलाब आज के दौर में एक परिवार में पिता-पुत्र और पोते के बीच के आपसी रिश्ते पर प्रकाश डालती है। श्री मिश्रा ने बताया कि उनकी लघु फिल्म में रिश्तों के बीच के अहसास को प्रदर्शित करने का एक पवित्र प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि भोजपुरी फिल्मों ने सबके मन में एक ऐसी छवि बना ली है कि बड़ा वर्ग इससे दूर हो गया है। ललका गुलाब के लेखक सह निर्माता अश्विनी रुद्र हैं जो न्यूयॉर्क में रहते हैं। रूद्र का कहना है कि अमित की पहली लघु फिल्म Þअंडर द रॉकÞ देखकर उन्होंने ललका गुलाब की कहानी उनसे शेयर की। अमित को भी लगा कि भोजपुरी भाषा में अपनी बात कहने का यह अवसर हे और उन्होंने तुरंत हामी भर दी।

Posted By: Jagran