बक्सर । सदर और अनुमंडलीय अस्पताल समेत जिलेभर के सरकारी स्वास्थ्य केद्रों के एंबुलेंस चालक बुधवार से अचानक एक दिन के लिए हड़ताल पर चले गए। इससे स्वास्थ्य सेवा चरमरा गई, वहीं निजी एंबुलेंस संचालकों ने जमकर चांदी काटी। एंबुलेंस चालकों की हड़ताल का असर इमरजेंसी कॉल 102 पर भी पड़ा और यहां से कोई एंबुलेंस नहीं भेजा गया।

एंबुलेंस कर्मियों ने आरोप लगाया कि जिले में इस सेवा को प्रदान करने वाली एनजीओ पीडीपीएल और सम्मान फाउंडेशन उनके साथ अत्याचार कर रही है। चालक संघ के अध्यक्ष कृष्णादत्त मिश्रा ने बताया कि एजेंसी के द्वारा समय पर मानदेय का भुगतान नहीं किया जाता है। 12 घंटे की सेवा ली जाती है, लेकिन मानदेय आठ घंटे का दिया जाता है। एजेंसी द्वारा न तो किसी चालक का पहचान पत्र बनाया गया और न ही नियुक्ति पत्र दिया गया। एंबुलेंस चालकों की मांग थी कि उनका भुगतान बक्सर के माध्यम से किया जाए। कर्मियों को अस्थाई रूप से बिश्राम गृह की व्यवस्था किया जाय। वहीं, अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर एम्बुलेंस चालकों ने बताया कि लेबर एक्ट के तहत मिलने वाली सारी सुविधाएं एवं समय से मानदेय भुगतान की व्यवस्था नहीं होने पर वे लोग अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाएंगे। दूसरी ओर एम्बुलेंस कर्मियों की हड़ताल को लेकर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ.डीएन पांडेय ने बताया वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। लोग अपने ही संसाधन से मरीज को लेकर आ रहे हैं।

Posted By: Jagran