बेड पर पड़े पति के जीवन की आस में तीज का उपवास, आरा की यह तस्वीर कर देगी भावुक
आरा सदर अस्पताल में एक पत्नी ने अपने किडनी पीड़ित पति के लिए अस्पताल के वार्ड में निर्जला तीज का ...और पढ़ें

विनोद गिरी के पास निर्जला उपवास में बैठीं लालती देवी। जागरण
HighLights
आरा सदर अस्पताल में पत्नी ने पति के लिए तीज व्रत रखा।
किडनी की बीमारी से जूझ रहे पति के स्वास्थ्य की कामना।
अस्पताल में अन्य महिलाओं ने भी पति की लंबी उम्र हेतु व्रत रखा।
रितेश चौरसिया, आरा। अखंड सौभाग्य की कामना के साथ सुहागिनों की हाथों में मेहंदी, माथे से नाक तक खिंची सिंदूर और पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत, यही तीज है।
लेकिन आरा सदर अस्पताल में सोमवार को एक तस्वीर ऐसी भी दिखी, जिसने पर्व की आस्था को भावनाओं की एक अलग ही गहराई दे दी।
यहां एक पत्नी ने घर के आंगन में नहीं, बल्कि अस्पताल के वार्ड में तीज का व्रत रखा। सामने उसका पति अस्पताल के बेड पर जिंदगी की जंग लड़ रहा था।
आसपास दवाइयों की गंध थी, मरीजों की आवाजें थीं और इलाज की चिंता, लेकिन पत्नी के मन में सिर्फ एक प्रार्थना थी 'मेरे पति ठीक हो जाएं।'
किडनी की समस्या से पीड़ित हैं विनोद गिरी
उदवंतनगर प्रखंड के डेमा बसौरी गांव निवासी विनोद गिरी पिछले कुछ दिनों से किडनी की बीमारी का इलाज करा रहे हैं। उनके साथ उनकी पत्नी लालती देवी भी पांच दिनों से अस्पताल में रह रही हैं।
पति की हालत और अस्पताल की परेशानियों के बीच भी लालती देवी ने तीज का निर्जला व्रत रखने का फैसला किया। लालती देवी के लिए यह सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं थी।
यह उस रिश्ते के लिए उनकी प्रार्थना थी, जिसके सहारे उन्होंने जिंदगी का सफर तय किया है। लालती देवी कहती हैं एक तरफ पति की बीमारी की चिंता है, दूसरी तरफ स्वस्थ होने की उम्मीद।
तीज उनके लिए पति के प्रति प्रेम, विश्वास और समर्पण का पर्व है। पति अस्पताल में हैं, इसलिए इस बार घर जैसा माहौल नहीं है, लेकिन मन में उनकी सलामती की कामना पहले से भी ज्यादा है।

अस्पताल की अन्य महिलाओं ने भी रखा व्रत
उन्होंने अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए निर्जला व्रत रखा। अस्पताल में सिर्फ लालती देवी ही नहीं थीं। बिहिया की गुड़िया देवी और मनी कुमारी समेत कई अन्य महिलाओं ने भी अस्पताल में रहकर अपने पति की लंबी उम्र के लिए तीज का व्रत रखा।
कसाप की सरिता देवी समेत कई व्रती महिलाओं ने अस्पताल की परिस्थितियों के बीच पूजा की परंपरा निभाई। महिलाएं अपने पति की तस्वीर या उनके बेड की ओर देखते हुए मन ही मन प्रार्थना कर रही थीं। स्वजन भी व्रती महिलाओं की मदद में जुटे रहे।
