भोजपुर: 3 वर्षों के बाद कॉलेज में नहीं पहुंचा मूल प्रमाणपत्र, BPSC TRE-4 का फॉर्म भरने में परेशानी
वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के छात्रों को शुल्क जमा करने के बावजूद मूल प्रमाणपत्र नहीं मिल रहे हैं, जिससे उन्हें टीआरई-4 परीक्षा का फॉर्म भरने में परेशानी हो रही है।

वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में मूल प्रमाणपत्रों का इंतजार, टीआरई-4 आवेदन में बाधा
HighLights
वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के छात्रों को मूल प्रमाणपत्र नहीं मिले।
टीआरई-4 शिक्षक नियुक्ति परीक्षा फॉर्म भरने में परेशानी।
प्रमाणपत्र के लिए छात्रों को दोबारा शुल्क देना पड़ रहा।
जागरण संवाददाता, आरा। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर की परीक्षा के दौरान मूल प्रमाणपत्र के लिए शुल्क जमा करने वाले विद्यार्थियों को अब तक प्रमाणपत्र नहीं मिल सका है।
विश्वविद्यालय के कई सत्रों के मूल प्रमाणपत्र संबंधित कॉलेजों और विभागों में नहीं पहुंचने से छात्र-छात्राओं को परेशानी हो रही है। इसका असर शिक्षक नियुक्ति की टीआरई-4 परीक्षा का फॉर्म भरने की प्रक्रिया पर भी पड़ रहा है।
प्रमाणपत्र के अभाव में अभ्यर्थियों को जरूरी दस्तावेज जुटाने के लिए कॉलेजों और विश्वविद्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
स्थिति यह है कि कई छात्र-छात्राओं ने करीब एक माह पहले ही आवेदन के साथ चालान कटवाकर परीक्षा विभाग में जमा कर दिया था।
परीक्षा उत्तीर्ण होने के तीन वर्षों के बाद भी कॉलेजों में मूल प्रमाणपत्र नहीं पहुंचाया गया है। अब प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को फिर से 500 रुपये का चालान जमा करना पड़ रहा है। इससे विद्यार्थियों में असंतोष है।
कई सत्रों के विद्यार्थियों को नहीं मिला प्रमाणपत्र
विश्वविद्यालय में स्नातक के सत्र 2007-10, 2008-11, 2009-12, 2010-13 और 2019-22 के परीक्षा फॉर्म भरने के दौरान मूल प्रमाणपत्र के लिए राशि जमा कराई गई थी।
इसके बावजूद इन सत्रों के कई विद्यार्थियों के प्रमाणपत्र संबंधित कॉलेजों तक नहीं पहुंचे हैं।
इसी तरह स्नातकोत्तर के सत्र 2020-22 और 2021-23 के विद्यार्थियों से भी मूल प्रमाणपत्र के लिए शुल्क लिया गया था। शिक्षा विभाग में सत्र 2021-23 के विद्यार्थियों की ओर से भी राशि जमा कराई गई थी।
एमएम महिला कॉलेज की छात्राएं परेशान
एमएम महिला कॉलेज से वर्ष 2022 में स्नातक उत्तीर्ण ममता कुमारी, ऐश्वर्या राज और साजिदा ने बताया कि वे मूल प्रमाणपत्र लेने कॉलेज पहुंचीं तो उन्हें बताया गया कि विश्वविद्यालय से प्रमाणपत्र आया ही नहीं है। इसके कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कॉलेज के प्राचार्य प्रो. नरेंद्र प्रताप पालित ने भी पुष्टि की कि विश्वविद्यालय की ओर से मूल प्रमाणपत्र नहीं भेजे जाने के कारण छात्राएं परेशान हैं।
वहीं, बीएड विभाग के सहायक सुनील कुमार सिंह ने बताया कि उनके विभाग में मूल प्रमाणपत्र पहुंचा दिए गए थे और सभी विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र सौंप दिए गए हैं।
तीन वर्षों में बांटे गए दो लाख से अधिक प्रमाणपत्र
विश्वविद्यालय के संबंधित पदाधिकारी ने बताया कि जिन सत्रों के मूल प्रमाणपत्र अभी तक नहीं भेजे गए हैं, उन्हें भेजने की तैयारी की जा रही है। अधिकांश मूल प्रमाणपत्र विद्यार्थियों को दिए जा चुके हैं। पिछले तीन वर्षों में दो लाख से अधिक मूल प्रमाणपत्र वितरित किए गए हैं।
जिन सत्रों का मूल प्रमाणपत्र नहीं भेजा गया है, उन्हें भेजने की तैयारी की जा रही है। अधिकांश मूल प्रमाणपत्रों को संबंधित छात्र छात्राओं को दिया जा चुका है। तीन वर्षों में दो लाख से अधिक मूल प्रमाणपत्र बांटे गए हैं।
