आरा। लगातार बदलते मौसम और बेमौसम बरसात ने किसानों की चिता बढ़ा दी है। फरवरी और मार्च महीने में होने वाली बरसात और तेज हवाओं ने दलहनी, तेलहनी और रबी फसल को नुकसान पहुंचाया है। वहीं सब्जियों की खेती पर कीट प्रकोप का खतरा बढ़ गया है। चना, मसूर एवं अन्य दलहनी और तेलहनी फसलों में नुकसान होने की संभावना बढ़ गई है। रबी और दलहनी फसल बुवाई के बाद से ही लगभग हर माह वर्षा हुई है। मगर फरवरी और मार्च माह की वर्षा ने किसानों की कमर तोड़ दी है। दलहनी फसल पर ज्योंहि फूल आया बरसात ने फसलों के फूल धो दिए, जिसका फसल उत्पादन पर सीधा प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। वर्षा से चना फसल का कवच कहलाने वाला नमकीन तत्व नष्ट होने से फसल प्रभावित हुई है। मार्च माह की बरसात ने गेहूं की खड़ी फसल को अधिक नुकसान पहुंचाया है। रिमझिम बारिश और तेज हवाओं ने गेहूं की जड़ों को हिला दिया जिससे खड़ी फसल गिर गई। वैसे में अन्न का दाना आने की संभावना कम ही रहती है। पकने के कगार पर खड़ी गेहूं, चना व सरसों की फसलों में नुकसान की आशंका बढ़ गई है। टमाटर की फसल काफी प्रभावित हुआ है। कीटों का प्रकोप बढ़ने के साथ ही फलन में कमी देखी जा सकती है। फसलों में लाही का प्रकोप भी बढ़ने की संभावना है।

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फसलों की बर्बादी के बाद मुआवजे की उठने लगी मांग

संवाद सूत्र,शाहपुर: प्रखंड क्षेत्र में दलहनी फसलों में मसूर, चना, मटर व खेसारी की फसलें लगभग 80 प्रतिशत से ज्यादा बर्बाद हो चुकी है। वही गेंहू के फसल के उत्पादन में भी भारी गिरावट की आशंका जताई जा रही है। प्रखंड में करीब 13 हजार एकड़ से ज्यादा कृषि योग्य भूमि पर दलहनी फसलों की खेती की जाती है।

शाहपुर के एफपीओ खांटी एग्रो फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी के निदेशक सह प्रखंड किसानश्री उमेश चंद्र पांडेय ने बताया कि किसानों को फसल क्षति मुआवजा मिलना चाहिए।

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फसल के साथ आम के लिए भी बारिश खतरनाक

संवाद सूत्र,बड़हरा: प्रखंड के प्रभावित किसानों ने बताया कि सरसों की कटी हुई फसल या काटी जाने वाली फसलें बारिश से काला पड़ने लगी है। दाने झड़ने लगे हैं। पिछले कई दिनों से खराब मौसम से चना के फूल गंदे होकर गिर गये।पके हुए मसूर के फसल बारिश में भींग कर खेत में ही सड़ने लगे हैं। रात-दिन के लगातार फुहारों से गेहूं की खड़ी फसलों जमीन पर धारासाई होने लगी है। आम में लगे मंजर काले पड़ने लगे हैं।

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कहते हैं किसान:

किसान दीपा सिंह, उदवंतनगर, श्रीराम सिंह,भूपौली, चंद्रमा सिंह, उदवन्तनगर, सुनील कुमार सिंह, सोनपुरा, चंद्र भूषण सिंह, सोनपुरा, श्री भगवान सिंह, छोटी सासाराम, कमलेश सिंह, उदवंतनगर, अभय कुमार सिंह,सखुआं, हरेराम सिंह, श्रीरामपुर,सुरपति उपाध्याय, सोनपुरा,योगेंद्र ओझा कोहड़ा, कामेश्वर सिंह, उदवंतनगर के अलावा कई किसानों ने बारिश को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। बेमौसम बरसात ने किसानों की कमर तोड़ दिया है। खरीफ फसल जहां सूखे की चपेट में रहा, वहीं रबी फसल को बरसात ने नष्ट कर दिया। अब किसान बेबस और लाचार हैं। किसान दीपा सिंह ने कहा कि अधिकांश फसल बर्बाद हो चुकी है। फसलों की बुआई में किसानों ने घर की जमा पूंजी खर्च कर दिए हैं। वैसे में सरकार को किसानों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। भूपौली निवासी किसान श्रीराम सिंह ने कहा कि वर्षा का चना और मसूर के फसल पर सीधा प्रभाव पड़ा है। चना का नोनी धूल जाने के कारण फसल में कमी आना स्वभाविक होगा। सखुआ निवासी किसान सह मुखिया कुसुम्हां पंचायत अभय कुमार सिंह ने बताया कि बरसात ने किसानों की कमर तोड़ दी है। तेज हवाओं से सरसों और तीसी की पौधे में लगे फूल तोड़ दिए। साथ ही फसल पकने के कगार पर खड़े गेहूं गिरने से उत्पादन प्रभावित होगा। किसान हरेराम सिंह ने कहा कि फरवरी और मार्च महीने में वर्षा होने से फसलों के फूल झड़ गए जिससे उत्पादन में कमी आएगी। दलहन के साथ-साथ गेहूं फसल भी बर्बाद होने की संभावना है।

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बॉक्स

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जिले में हुई बारिश से किसानों को रबी फसल में काफी क्षति हुई है। किसानों की क्षतिपूर्ति के लिए सरकार द्वारा अनुदान देने की घोषणा की गई है। किसानों को इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करने का सुझाव दिया गया है। जिले में रबी फसल की कितनी क्षति हुई है इसका आकलन एवं सर्वे करने का आदेश सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को दिया गया है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उस दिशा में अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी।

संजय नाथ तिवारी

जिला कृषि पदाधिकारी, भोजपुर।

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