सड़कें बनीं नदियां, पुल बने नाव पड़ाव; शाहपुर में 10 से 12 किमी का सफर नाव से करने को मजबूर ग्रामीण
बाढ़ के कारण शाहपुर प्रखंड में सड़कें नदियों में तब्दील हो गई हैं, जिससे यातायात के लिए नावों का सहारा ...और पढ़ें

HighLights
शाहपुर में बाढ़ से सड़कें डूबीं, नावों से आवागमन।
दूध व्यवसायी नावों से पहुंचा रहे दूध-छेना बाजार।
दैनिक जरूरतें, खाद्यान्न भी नावों से गांवों तक।
दिलीप कुमार ओझा, शाहपुर (आरा)। हरिहरपुर के दूध व्यवसायी बरमेश्वर यादव को दूध और छेना लेकर बिहिया जाना है, लेकिन सारे राश्ते पानी में डूबे हुए हैं। ऐसे में वे किश्ती(नौका) का सहारा ले रहे हैं और दूध-छेना को बिहिया के बाजार तक पहुंचा रहे हैं। दरअसल, बाढ़ ने शाहपुर प्रखंड में यातायात की पूरी व्यवस्था बदलकर रख दी है। जिन स्थानों पर पहले टेम्पो और अन्य वाहनों की आवाजाही होती थी, वहां अब नावों की कतार नजर आ रही है।
प्रखंड के दर्जनों गांवों तक पहुंचने के लिए नाव ही एकमात्र साधन रह गई है। प्रशासन ने अंचल में 80 नावों के परिचालन की अनुमति दी है।
नाव के सहारे 10 से 12 किलोमीटर तक की दूरी तय कर रहे
प्रतिदिन विभिन्न नाव पड़ावों से करीब पांच से सात हजार लोग आवागमन कर रहे हैं। सरकारी और निजी स्तर पर छोटी-बड़ी तथा मशीन चालित करीब दो सौ से अधिक नावों का परिचालन हो रहा है। लोग नाव के सहारे 10 से 12 किलोमीटर तक की दूरी तय कर रहे हैं।
दैनिक जरूरत की वस्तुओं को गांवों और घरों तक पहुंचाने में भी नावों का इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि, इसमें खतरा भी बहुत है, लेकिन ग्रामीणों के पास विकल्प भी नहीं है।
नावें ग्रामीणों को उनके गंतव्य तक पहुंचा रही
शाहपुर-करनामेपुर सड़क पर भरौली पुल के समीप कभी दर्जनों वाहनों की आवाजाही होती थी। वर्तमान में यहां नाव पड़ाव बन गया है। यहां से दर्जनों नावें ग्रामीणों को उनके गंतव्य तक पहुंचा रही हैं। नावों के माध्यम से खाद्य सामग्री, किराना सामान और गैस सिलेंडर तक गांवों में पहुंचाए जा रहे हैं।
इसी तरह बिहिया चौरास्ता-दामोदरपुर पथ पर गौरा पुल के समीप से भी दर्जनों गांवों के लिए नावों का परिचालन हो रहा है। ग्रामीणों की जरूरत की विभिन्न सामग्री नावों के माध्यम से ही गांवों तक पहुंचाई जा रही है। पीडीएस का खाद्यान्न भी नाव के जरिये डीलरों तक पहुंचाया जा रहा है।
नाव के सहारे जारी है दूध-छेना का कारोबार
बाढ़ के कारण जहां आम लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई है, वहीं पशुपालकों और दूध व्यवसायियों ने नाव के सहारे अपना कारोबार जारी रखा है। लालू के डेरा और सुहिया क्षेत्र के पशुपालक नाव के माध्यम से दूध, छेना और खोया शाहपुर व बिहिया के दुकानदारों तक पहुंचा रहे हैं। इससे बाढ़ की विषम परिस्थितियों के बावजूद उनका व्यवसाय किसी तरह चलता हुआ नजर आ रहा है।
शाहपुर व्यापार मंडल अध्यक्ष पवन सिंह, सुहिया पैक्स अध्यक्ष राजेश पांडेय और लालू के डेरा पैक्स अध्यक्ष प्रतिनिधि मेहीलाल यादव ने बताया कि बाढ़ की स्थिति में पशुपालकों के लिए नाव ही सबसे बड़ा सहारा बनी हुई है। नाव के माध्यम से दूध और दुग्ध उत्पाद बाजार तक पहुंचाए जा रहे हैं। जिससे पशुपालकों को अपने उत्पाद बेचने में मदद मिल रही है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था बनाए रखने के लिए 80 नौकाओं के परिचालन की अनुमति दी गई है। जरूरत पड़ने पर इसकी संख्या और बढ़ाई जा सकती है। - आनंद प्रकाश, अंचलाधिकारी, शाहपुर(भोजपुर) ।
