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भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: 5 करोड़ के नोटिस पर भड़के RJD सांसद सुधाकर सिंह, लोकसभा अध्यक्ष को लिखा लेटर

Published: Mon, 19 Oct 2026 07:31 PM (IST)

सांसद सुधाकर सिंह ने आईपीएस कुंदन कृष्णन द्वारा भेजे गए 5 करोड़ के मानहानि नोटिस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है।

सांसद सुधाकर सिंह। (फोटो- ANI)

सांसद सुधाकर सिंह। (फोटो- ANI)

HighLights

  1. सांसद सुधाकर सिंह ने IPS मानहानि नोटिस पर स्पीकर को लिखा पत्र।

  2. नोटिस को संसदीय विशेषाधिकार हनन, जनप्रतिनिधियों पर दबाव की साजिश।

  3. भरत तिवारी केस में न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग।

डिजिटल डेस्क, भोजपुर। Bharat Tiwari Case: बिहार के बक्सर से RJD के सांसद सुधाकर सिंह ने भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी प्रकरण में 5 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस मिलने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखा है।

सांसद ने बिहार के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और तत्कालीन एसटीएफ महानिदेशक कुंदन कृष्णन द्वारा भेजे गए इस नोटिस को जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाने और संसदीय दायित्वों के निर्वहन में बाधा डालने की साजिश करार दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर से जुड़ा है। घटना के समय आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन बिहार एसटीएफ के महानिदेशक पद पर तैनात थे।

सांसद सुधाकर सिंह ने इस मामले में सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाते हुए जांच का दायरा केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों तक सीमित न रखकर वरिष्ठ अधिकारियों और तत्कालीन पुलिस नेतृत्व की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच करने की मांग की थी।

सांसद का कहना है कि इस घटना में संबंधित पुलिसकर्मियों का निलंबन हो चुका है, मृतक की माता की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई है और राज्य सरकार ने एक न्यायिक जांच समिति भी गठित की है। जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक हुए बिना किसी अधिकारी को स्वतः दोषमुक्त मान लेना अनुचित है।

5 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस और विवाद

इसी सार्वजनिक बयान और निष्पक्ष जांच की मांग के जवाब में आईपीएस कुंदन कृष्णन ने अपने निजी अधिवक्ता के माध्यम से सांसद सुधाकर सिंह को एक कानूनी नोटिस भेजा।

 

इसमें सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की शर्त रखी गई है और ऐसा न करने पर 5 करोड़ रुपये के मानहानि वाद व आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

संसदीय विशेषाधिकार और नियमों पर उठाए सवाल

लोकसभा अध्यक्ष को लिखे अपने पत्र में सुधाकर सिंह ने कई गंभीर संवैधानिक और कानूनी सवाल खड़े किए हैं।

  • संसदीय विशेषाधिकार का हनन: सांसद ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 105 जनप्रतिनिधियों को बिना किसी भय के जनहित के मुद्दे उठाने का अधिकार और संरक्षण देता है। अधिकारी द्वारा भारी-भरकम आर्थिक दावों और आपराधिक कार्रवाई का डर दिखाकर चुप कराने की कोशिश संसद की गरिमा और सदस्यों की स्वतंत्रता पर आघात है।
  • आचरण नियमों का उल्लंघन: अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के नियम 17 का हवाला देते हुए सांसद ने कहा कि किसी शासकीय कृत्य की आलोचना के खिलाफ अदालत का सहारा लेने से पहले सरकार से पूर्व स्वीकृति लेना अनिवार्य है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अधिकारी ने इसके लिए बिहार या केंद्र सरकार से पूर्व अनुमति ली थी?
  • निजी विधि फर्म का अनाधिकृत हस्तक्षेप: नोटिस में निजी विधि फर्म द्वारा बिहार सरकार की कार्रवाई और फैसलों का बचाव करने पर भी सवाल उठाया गया है। संविधान के अनुच्छेद 165 के तहत राज्य सरकार का पक्ष केवल महाधिवक्ता या सरकार द्वारा अधिकृत वकीलों के माध्यम से ही रखा जा सकता है। कोई निजी वकील या आईपीएस अधिकारी स्वयं बिहार सरकार नहीं हो सकता।

सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष से की ये मुख्य मांगें:

इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेते हुए जांच कराई जाए कि क्या यह नोटिस संसदीय आचरण को प्रभावित करने का प्रयास है। प्रथमदृष्टया आधार मिलने पर इस मामले को संसद की विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाए।

  • बिहार सरकार से यह स्पष्टीकरण और रिकॉर्ड मांगा जाए कि आईपीएस कुंदन कृष्णन ने किस कानूनी प्रावधान और अनुमति के आधार पर यह नोटिस जारी किया।
  • निजी विधि फर्म द्वारा बिना अधिकार बिहार सरकार का पक्ष प्रस्तुत करने के दावे पर सक्षम कानूनी प्राधिकार के जरिए सख्त कार्रवाई की जाए।
  • संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि कथित मुठभेड़ की न्यायिक जांच की वर्तमान स्थिति और निष्कर्षों को अविलंब सार्वजनिक किया जाए।
  • कार्यपालिका द्वारा जनप्रतिनिधियों पर किसी भी प्रकार के दबाव या प्रतिशोध की कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
  • सांसद सुधाकर सिंह ने उम्मीद जताई है कि लोकसभा अध्यक्ष संसद की गरिमा और निर्वाचित प्रतिनिधियों की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए इस संवेदनशील मामले में त्वरित और उचित कार्रवाई करेंगे।

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