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नवरात्र कब से शुरू? हाथी पर आएंगी मां दुर्गा, 16 अक्टूबर की शाम खुलेगा पट

Published: Sun, 04 Oct 2026 09:11 PM (IST)

शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ समाप्त होगा, जिसमें मां दुर्गा का आगमन ...और पढ़ें

अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना का अवसर

अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना का अवसर

HighLights

  1. शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू, मां दुर्गा का आगमन हाथी पर।

  2. 11 अक्टूबर को कलश स्थापना, 18 को महाअष्टमी, 19 को नवमी।

  3. 20 अक्टूबर को विजयादशमी और रावण दहन के साथ नवरात्र का समापन।

संवादसूत्र, उदवंतनगर (भोजपुर)। शारदीय नवरात्र इस बार 11 अक्टूबर से शुरू होगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा, जिसे सुख, समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हाथी पर माता का आगमन अच्छी वर्षा और बेहतर कृषि उत्पादन का संकेत देता है।

वहीं, माता की विदाई चरणायुध यानी मुर्गे पर होने की बात कही गई है, जिसे प्राकृतिक आपदा और राजनीतिक क्षेत्र में उथल-पुथल की आशंका से जोड़कर देखा जाता है।

11 अक्टूबर को होगी कलश स्थापना

शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होगी। इस बार नवरात्र पूरे नौ दिनों का रहेगा। पंडित दिनेश पांडेय के अनुसार आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 8:33 बजे से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 8:37 बजे तक रहेगी। इसी दिन घरों और पूजा पंडालों में कलश स्थापना कर मां दुर्गा का आह्वान किया जाएगा।

अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना का अवसर

11 अक्टूबर को कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त दिन में 10:57 बजे से दोपहर 1:09 बजे तक रहेगा। प्रतिपदा के दिन चित्रा नक्षत्र रहने से रचनात्मकता, आकर्षण और ऊर्जा में वृद्धि के संकेत बताए गए हैं। श्रद्धालु विधि-विधान से कलश स्थापना कर नवरात्र की पूजा शुरू करेंगे।

मूल नक्षत्र में होगा देवी का आह्वान

16 अक्टूबर शुक्रवार की सुबह 6:22 बजे मूल नक्षत्र शुरू होगा, जो 17 अक्टूबर की सुबह 8:48 बजे तक रहेगा। धार्मिक परंपरा के अनुसार मूल नक्षत्र में देवी का आह्वान किया जाता है।

इसी दौरान सप्तमी तिथि में सरस्वती आवाहन, पत्रिका प्रवेश और पूजा पंडालों में देवी-देवताओं की प्रतिष्ठा की जाएगी।

16 अक्टूबर की शाम खुलेगा मां का पट

पूजा पंडालों में देवी-देवताओं की प्रतिष्ठा और पूजा-अर्चना के बाद 16 अक्टूबर की संध्या बेला में मां का पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोला जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा पंडालों में पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे।

महाअष्टमी का व्रत 18 अक्टूबर को

पंडित दिनेश पांडेय और विवेकानंद पांडेय के अनुसार अष्टमी तिथि 17 अक्टूबर की सुबह 5:49 बजे से शुरू होकर 18 अक्टूबर की सुबह 6:53 बजे तक रहेगी।

इसलिए 18 अक्टूबर को महाअष्टमी व्रत और विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। श्रद्धालु इस दिन मां दुर्गा की आराधना के साथ व्रत रखेंगे।

19 अक्टूबर को नवमी, होगा हवन

नवमी तिथि 19 अक्टूबर की सुबह 6:54 बजे शुरू होकर 20 अक्टूबर को दिन में 9:34 बजे तक रहेगी। नवमी के दिन हवन समेत अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे।

नौ दिनों तक उपवास रखने वाले श्रद्धालु विजयादशमी के दिन पारण करेंगे। 19 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 6:05 बजे और सूर्यास्त शाम 5:56 बजे होगा।

श्रवणा नक्षत्र में विसर्जन की परंपरा

19 अक्टूबर को दिन में 2:01 बजे श्रवणा नक्षत्र का आगमन होगा, जो 20 अक्टूबर को दिन में 4:09 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रवणा नक्षत्र में देवी की प्रतिमाओं के विसर्जन की परंपरा है। इसके अनुसार विजयादशमी के दिन प्रतिमा विसर्जन की तैयारियां की जाएंगी।

20 अक्टूबर को रावण दहन और मां की विदाई

20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। इस दिन नीलकंठ दर्शन, रावण दहन और मां दुर्गा सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।

श्रद्धालु विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा कर उन्हें विदाई देंगे। इसके साथ ही नौ दिनों से चल रहे शारदीय नवरात्र का समापन होगा।