आरा। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार को जिले के गंगा व सोन नद के विभिन्न घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। भक्ति में लीन श्रद्धालुओं ने दान-पुण्य के अलावा मंदिरों में दीप जलाकर पूजा पाठ किया। विभिन्न घाटों पर भीड़ का अनुमान करते हुए प्रशासन द्वारा विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई थी। बता दें कि हर साल दूर-दूर से सैकड़ों श्रद्धालु घाटों पर पवित्र स्नान करने आते हैं। इसके तहत महुली घाट, सिन्हा घाट, बड़हरा, सहार व संदेश से जुड़े सोन नद घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। जिन घाटों के पास मंदिर था, उसमें चहल-पहल विशेष देखी गई। मान्यताओं के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का खास महत्व है। हालांकि कोरोना को देखते हुए प्रशासन ने पंडित व श्रद्धालुओं से घर पर ही स्नान-दान करने की अपील की थी। जिसका असर घाटों पर पिछले वर्ष की अपेक्षा कम संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं को देखा गया। 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों और 10 साल से कम उम्र के बच्चों के अलावा गर्भवती तथा बीमार लोगों को घर पर ही रहने का सुझाव दिया गया था। घाटों पर सुबह 5 बजे से ही निजी वाहनों और पैदल श्रद्धालुओं द्वारा आने वालों का सिलसिला शुरू हो गया था। पंडित मनोज पांडेय ने बताया कि व्रत पूर्णिमा 29 नवंबर, रविवार मध्याह्न 12:35 बजे से प्रारंभ था। आज ही देव दीपावली मनाई गई। पंडित पांडेय ने बताया कि पूर्णिमा के स्नान दान से सभी पापों का नाश हो जाता है। इसी दिन बाबा शंकर की पूजा-अर्चना करने से सात जन्मों का पापों का नाश हो जाता है। इस प्रकार स्वार्थ सिद्धि योग में स्नान दान का संयोग बनता है। पूर्णिमा व्रत सबके लिए कल्याणकारी है।

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