आरा। सीएए, एनआरसी, एनपीआर तथा एससी-एसटी आरक्षण बिल के खिलाफ भीम आर्मी द्वारा आहूत भारत बंद के समर्थन में उतरे बंद समर्थकों ने रेल और सड़क मार्ग को खास निशाना बनाया। सबसे पहले भारी संख्या में बंद समर्थक आरा रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। कितु वहा भारी संख्या में रेल पुलिस की तैनाती के कारण बंद समर्थकों की एक नहीं चली। बाद में बंद समर्थकों ने पूर्वी रेलवे गुमट के समीप रेलवे ट्रैक को जाम कर दिया, जिसके चलते सुबह 7:40 बजे से 8:45 बजे तक डाउन लाइन में आई लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस आरा रेलवे स्टेशन पर ही खड़ी रही। बाद में जीआरपी और आरपीएफ के सहयोग से रेलवे ट्रैक से बंद समर्थकों को हटाया गया। तब जाकर रेल परिचालन सामान्य हो सका। भीम आर्मी द्वारा आहूत बंद के समर्थन में भाकपा माले और जाप के नेता और कार्यकर्ता भी सड़क पर उतर आए थे। बंद समर्थकों ने जीरो माइल, धोबीघटवा, पूर्व रेलवे गुमटी, पटेल बस पड़ाव, धरहरा, अबरपुर समेत कई चौक चौराहों को जामकर केंद्र और बिहार सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान इन मार्गों पर यातायात बुरी तरह अवरूद्ध रहा, जिसमें सैकड़ों वाहन घंटो फंसे रहे। इधर धोबीघटवा मोड़ के समीप जाप कार्यकर्ता अर्धनग्न हो सड़क जाम कर प्रदर्शन करने लगे। जिसकी जानकारी मिलते ही नवादा थानाध्यक्ष संजीव कुमार पूरे दल बल के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने यहां से अर्धनग्न प्रदर्शन कर रहे लगभग आधा दर्जन बंद समर्थकों को हिरासत में ले लिया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। बंद को सफल करार देते हुए जाप जिलाध्यक्ष ब्रजेश कुमार सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि सीएए, एनपीआर, एनआरसी तथा एससी-एसटी आरक्षण बिल के खिलाफ भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर द्वारा भारत बंद का जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने समर्थन किया है। जिसमें जाप भोजपुर आरा के जिला अध्यक्ष डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में आरा-पटना मुख्य मार्ग को धरहरा पुल पर करीब तीन घंटे तक जाम किया गया। प्रशासन के हस्तक्षेप पर जाम को छोड़ा गया। वहीं जाप के युवा अध्यक्ष रघुपति यादव ने के नेतृत्व में आरा पूर्वी गुमटी सड़क रेल मार्ग को घंटों जाम रखा गया। अध्यक्ष ने कहा कि यह सरकार युवाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। दिन प्रतिदिन बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, पर केंद्र सरकार का थोड़ा सा भी ध्यान नहीं है। वही जन अधिकार छात्र परिषद के विश्वविद्यालय अध्यक्ष सुजीत कुशवाहा एवं छात्र अध्यक्ष रितेश कुमार के नेतृत्व में आरा सासाराम मुख्य मार्ग को अवरुद्ध कर अर्धनग्न प्रदर्शन 4 घंटे तक किया गया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। जहां से प्रशासन के द्वारा छात्रों को गिरफ्तार कर नवादा थाने में 4 घंटे रखने के बाद उन्हें रिहा किया गया। बंद में शामिल लोगों में जाप प्रदेश सचिव मनोज सिंह, प्रदेश युवा सचिव लडु यादव, जिला युवा अध्यक्ष रघुपति यादव, प्रखंड अध्यक्ष संतोष कुमार, सूर्यनाथ सिंह, मनोज यादव, मो. सनी राईन मो. परवेज आलम, मो. एहरार आलम, मो. साजिद, सोनू कुमार, दिनेश पंडित, ओम प्रकाश रजक, हरिहर बिद, गुड्डू, बंटी, अविनाश शर्मा, राजेंद्र यादव, अरविद पांडे, चंदन पांडे, सोनू, जेएन उपाध्याय, हरेन्द्र यादव, मो. आरिफ खान आदि प्रमुख थे।

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भारत बंद की सफलता को ले माले ने जताया आभार

आरा: आरा नगर में भारत बंदी की सफलता को ले भाकपा माले ने आरा वासियों के प्रति आभार प्रकट किया है। माले द्वारा जारी प्रेम विज्ञप्ति के मुताबिक आरक्षण बचाओ, नागरिकता बचाओ, संविधान बचाओ अभियान के तहत भाकपा माले भारत बंद में सक्रिय समर्थन देते हुए सड़क पर उतरा था। सुबह 7:00 बजे से 1:11 बजे तक भाकपा माले कार्यकर्ताओं ने बस पड़ाव में सड़क जाम कर सभा आयोजित की। उसके बाद पूरे शहर में घूम-घूमकर बंद कराते हुए जुलूस निकाला और शाहीन बाग अबरपुल में चल रहे आंदोलनकारियों से मुलाकात के बाद बंद को सफल बनाने की अपील की। आरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन जाम का नेतृत्व भाकपा-माले राज्य कमेटी के सदस्य सह तरारी के विधायक सुदामा प्रसाद, आइसा के राज्य के सचिव शब्बीर कुमार, पप्पू कुमार राम, विकास कुमार, राकेश कुमार सहित कई छात्र नेता कर रहे थे। वहीं दूसरी तरफ आरा बस स्टैंड में सड़क जाम का नेतृत्व कर रहे भाकपा माले केंद्रीय कमेटी सदस्य राजू यादव, नगर सचिव दिलराज प्रीतम, क्यामुद्दीन अंसारी, राजनाथ राम, गोपाल प्रसाद, शिवप्रकाश रंजन, अजय गांधी, सुरेश पासवान, अमित कुमार बंटी, सत्यदेव कुमार, सुरेंद्र पासवान, राजू प्रसाद, बिष्णू कुमार, प्रमोद रजक, शहाबुद्दीन कुरैशी, देवानंद पासवान, संत बिलास राम सहित कई माले कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम किया। इस दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए भाकपा-माले नेताओं ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार बाबा साहेब भीमराव द्वारा संविधान में प्रदत आरक्षण को खत्म करना चाहती है एवं आरक्षण के साथ-साथ संविधान व लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है। मोदी की सरकार ने एनपीआर एनआरसी जैसे काला कानून को लाकर इस देश के नागरिकों पर एक तरह से तबाही का मंजर थोप दिया है। जबकि इस देश में बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार जैसे ज्वलंत सवालों पर यह सरकार कुछ नहीं कर रही है। वहीं दूसरी तरफ इस बिहार में न्याय के साथ विकास का दावा करने वाली नीतीश कुमार की सरकार ने बिहार में एनपीआर नहीं लागू करने की घोषणा की है। जबकि इस सरकार के सांसद लोकसभा में सीएए, एनपीआर, एनआरसी कानून को बनाने में वोट देकर मदद करते है। इसके खिलाफ भाकपा माले की ओर से 25 फरवरी को विधानसभा का मार्च का आह्वान किया गया है। यह विधानसभा मार्च बिहार में एनपीआर के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाकर पारित करने, जल-जीवन-हरियाली के नाम पर गरीबों को उड़ाने की साजिश को बंद करने सवाल पर आयोजित की गई है।

Posted By: Jagran

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