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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 24, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भाजपा नेता विशेश्वर ओझा हत्याकांड में जांच को लेकर डीजीपी से मिले स्वजन

By JagranEdited By:
Published: Fri, 24 Jan 2020 11:23 PM (IST)

भाजपा के तत्कालीन प्रदेश उपाध्यक्ष विशेश्वर ओझा हत्याकांड का मामला करीब चार सालों से पुलिस की जांच में उलझा हुआ है।

भाजपा नेता विशेश्वर ओझा हत्याकांड में जांच को लेकर डीजीपी से मिले स्वजन
भाजपा नेता विशेश्वर ओझा हत्याकांड में जांच को लेकर डीजीपी से मिले स्वजन

आरा। भाजपा के तत्कालीन प्रदेश उपाध्यक्ष विशेश्वर ओझा हत्याकांड का मामला करीब चार सालों से पुलिस की जांच में उलझा हुआ है। मुख्य रूप से साजिशकर्ता को लेकर पेंच फंसा हुआ है। इस बीच शुक्रवार को मारे गए भाजपा नेता के छोटे भाई व भाजपा नेता भुअर ओझा ने पटना में पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय से मिलकर हत्याकांड की निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई। साथ ही मांगों से संबंधित एक आवदेन भी पुलिस महानिदेशक को दिए। साथ ही जल्द से जल्द जांच पूर्ण कराकर स्पीडी ट्रायल कराए जाने का आग्रह किया। गौरतलब हो कि इस मामले की मॉनटरिग कर अपराध अनुसंधान विभाग, पटना के भी वरीय अधिकारी कर रहे है। अभी तक इस केस में एसपी का प्रतिवेदन पांच तक निकल चुका है। इधर, मृतक के छोटे भाई व भाजपा नेता भुवर ओझा ने कहा भाई के हत्यारों और साजिशकर्ताओं को उचित सजा दिलाकर वे अपने बड़े भाई स्वर्गीय विशेश्वर ओझा को सच्ची श्रद्धांजलि देंगे। विशेश्वर ओझा हत्याकांड की विभिन्न बिन्दुओ पर चल रही जांच को 12 फरवरी 2020 तक पूरा करने के लिए आग्रह किया है। पुलिस महानिदेशक ने दस दिनों के अंदर 15 बिन्दुओं पर चल रही जांच को पूर्ण कराने का आश्वासन दिया है। जिसमें स्थानीय विधायक राहुल तिवारी को बुलाकर पूछताछ करने की मांग भी शामिल है। दस दिनों बाद इस केस में समीक्षा के लिए बुलाया गया है।

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निर्देश के अनुरूप जांच नहीं करने का आरोप

सनद हो कि 12 फरवरी 2016 को भाजपा नेता विशेश्वर ओझा की सोनवर्षा में ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। राजनाथ ओझा के बयान पर हरेश मिश्रा व ब्रजेश मिश्रा समेत सात के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। कारबाइन समेत अन्य हथियार से गोली मारने का आरोप लगाया गया था। परिजनों का आरोप हैं कि 12 सितबर 2019 को एसपी द्वारा अनुसंधानकर्ता को करीब 15 बिदुओं पर जांच के लिए निर्देश दिया गया था। लेकिन, निर्देश के बावजूद अहम बिदुओं पर जांच नहीं की गई है।