बिहार की बिजली रानी के डांस का क्रेज, शादी की तारीख भी पूछकर तय होती थी
लोक गायिका व नृत्यांगना बिजली रानी की 24 अक्टूबर को पहली पुण्यतिथि है। उनके कार्यक्रम इतने लोकप्रिय थे कि लोग ...और पढ़ें

बिजली रानी की पुण्यतिथि: जब शादी की तारीख भी उनके कार्यक्रम से तय होती थी
HighLights
बिजली रानी की 24 अक्टूबर को पहली पुण्यतिथि है।
उनके कार्यक्रम इतने लोकप्रिय थे कि शादी की तारीख तय होती थी।
उन्होंने भोजपुरी लोक कला को नई पहचान और सम्मान दिलाया।
शमशाद प्रेम, आरा। भोजपुरी लोक संगीत और नृत्य की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली चर्चित लोक गायिका व नृत्यांगना बिजली रानी (Bijli Rani Bihar) की 24 अक्टूबर को प्रथम पुण्यतथि है।
आज शादी-विवाह और कार्यक्रमों के स्टेज शो में अक्सर अश्लीलता की शिकायत मिलती है। कभी बिजली रानी ने इसे लोक कला का रूप दिया था और उनके कार्यक्रमों का ऐसा जलवा था कि शाहाबाद से लेकर उत्तर प्रदेश तक दूर-दूर से दर्शक उन्हें देखने और सुनने पहुंचते थे।
शादी-विवाह में बिजली रानी का कार्यक्रम कराना सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था। स्थिति यह थी कि लोग अपने बेटे-बेटियों की शादी की तारीख तक उनके कार्यक्रम की उपलब्धता पूछकर तय करते थे।
अपनी गायकी, आकर्षक नृत्य और खास अंदाज से दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली बिजली रानी आज भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी प्रस्तुतियों की यादें आज भी लोककला प्रेमियों के जेहन में ताजा हैं।
नृत्य कंपनी की दुनिया में बिजली रानी और उनकी बहन चांद की खूब चर्चा थी। करीब 30-40 वर्ष पहले उनके कार्यक्रम काफी महंगे होने के बावजूद लोकप्रिय थे।
शाहाबाद क्षेत्र के अलावा उत्तर प्रदेश में भी उनके कार्यक्रमों की काफी मांग रहती थी। क्लब रोड के अभिजीत सिंह कहते हैं कि उनकी प्रस्तुति सामाजिक प्रतिष्ठा से भी जुड़ी थी।
कई लोग पहले उनसे कार्यक्रम की तारीख पूछते थे और जिस दिन उनका साटा यानी कार्यक्रम तय नहीं होता था, उसी दिन अपने बेटे-बेटियों की शादी की तिथि निर्धारित करते थे।
निधन से कुछ माह पहले बीमारी की हालत में बिजली रानी का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह उनसे मिलने पहुंचे थे। उन्होंने उनके इलाज में भी सहायता की थी।
दर्शकों को बांधे रहता था गायन-नृत्य:
अखिल भारतीय हिंदी साहित्य समागम के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा पुष्कर ने बताया कि उन्हें बिजली रानी से मिलने और उनका कार्यक्रम देखने के कई अवसर मिले।
उनके छोटे बेटे विनय पुष्कर की कुल्हड़िया में हुई शादी में भी बिजली रानी का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उनकी ‘द ग्रेट बिजली रानी म्यूजिकल एंड थियेटिकल कंपनी’ थी। कुशल साजिंदों की संगत में उनका नृत्य और गायन लोगों को खूब प्रभावित करता था।
बिजली रानी अपने कार्यक्रम की शुरुआत ‘पचरा-रेशम के डोरी लागल सोने के खटोलवा...’ से करती थीं। ‘देसवा भारत नेतागिरी के बजार भइल बा...’ जैसे व्यंग्य गीत और ‘पिया जात बाड़े पुलिस के बहलिया में...’ भी उनके चर्चित गीतों में शामिल थे।
गाने के कई कैसेट हुए थे जारी
राजेन्द्र शर्मा पुष्कर के मुताबिक, बिजली रानी के दर्जनों कैसेट जारी हुए थे और वह टी-सीरीज की पहली भोजपुरी गायिका थीं।
लोककला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 23 अगस्त 2025 को गाजीपुर में जीवनोदय शिक्षा समिति की ओर से उन्हें कमरूनिया बाई सम्मान से सम्मानित किया गया था।
शिक्षक रामेश्वर सिंह ने बताया कि उन्होंने बिजली रानी का नृत्य भोजपुर जिले के छतरपुरा और मोपती में देखा था। उनका प्रदर्शन ऐसा होता था कि दर्शकों का मन कार्यक्रम छोड़कर जाने का नहीं करता था।
