आरा में भाई ने 12 घंटे की ड्यूटी के बाद भी निभाई जिम्मेदारी, पहले ही प्रयास में बहन बबली राज बनीं जज
भाई विवेक राज के अटूट समर्थन और संसाधनों की मदद से बबली राज ने बक्सर सिविल न्यायालय में न्यायिक मजिस्ट्रेट का पद हासिल किया।

भाई की मेहनत लाई रंग। (जागरण)
HighLights
बबली राज बक्सर सिविल न्यायालय में न्यायिक मजिस्ट्रेट बनीं।
भाई विवेक राज ने बहन की पढ़ाई में पूरा सहयोग दिया।
मध्यमवर्गीय परिवार से आकर हासिल की बड़ी सफलता।
राणा अमरेश सिंह, आरा। सफलता की राह में परिवार का साथ मिल जाए तो मुश्किलें आसान हो जाती हैं। खासतौर पर भाई-बहन का रिश्ता सिर्फ प्यार और अपनत्व का नहीं, बल्कि भरोसे, सुरक्षा और भावनात्मक सहारे का भी रिश्ता है।
आरा शहर में प्रखंड कार्यालय के सामने वाली गली की रहने वाले परिवार के भाई-बहन विवेक राज और बबली राज की कहानी इस रिश्ते की गहराई को बयां करती है।
बबली राज वर्तमान में बक्सर सिविल न्यायालय में न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय श्रेणी के पद पर कार्यरत हैं। उनकी सफलता का आधार भाई ने तैयार किया और लक्ष्य हासिल करने में अपना सबकुछ झोंक दिया।
मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली बबली ने छोटे शहर से पढ़ाई करते हुए क्लैट की परीक्षा उत्तीर्ण की और पटना स्थित चाणक्या नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया।
इसके बाद उन्होंने पहले ही प्रयास में न्यायिक मजिस्ट्रेट की परीक्षा में सफलता हासिल की। उनकी इस सफलता के पीछे बड़े भाई का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
बबली बताती हैं कि उनके बड़े भाई विवेक राज पटना मेट्रो में इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। करीब 12 घंटे की ड्यूटी के बाद भी वे उनकी तैयारी में साथ देते थे और जरूरी किताबों से लेकर संसाधन तक मुहैया कराने में तत्पर रहते थे।
मुश्किल समय में भाई का यह साथ उनके लिए मजबूत संबल बना। बबली कहती हैं कि भाई केवल परिवार का हिस्सा नहीं, बल्कि बहन का पहला पक्का दोस्त और जीवनभर का मार्गदर्शक होता है, वह बहन की खामोशी और परेशानी को बिना कहे समझ लेता है।
बहन पर था भरोसा
विवेक कहते हैं कि उन्हें अपनी बहन की क्षमता पर पूरा भरोसा था और वे हमेशा सोचते थे कि कलाई पर राखी बांधने वाली बहन को कोई ऐसा उपहार दें, जो उसकी जिंदगी बदल दे, आज खशुी है कि उनकी बहन जज बन गईं।
बबली की मां प्रो. नीलम सिंह एसबी कॉलेज में मनोविज्ञान की असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, जबकि पिता धर्मेंद्र कुमार सिंह मध्य विद्यालय कहथू में शिक्षक हैं। तीन संतानों में बबली दूसरे नंबर पर हैं।
एक छोटी बहन भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहीं हैं। रक्षा बंधन पर उनका अनुभव भाई-बहन के उस अनमोल रिश्ते को रेखांकित करता है, जो जीवन की हर चुनौती में एक-दूसरे का सहारा बनता है।
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