भोजपुर [जेएनएन]। नाबालिग से दुष्कर्म समेत तमाम कुकर्मों में जोधपुर की जेल में सजा काट रहे आसाराम की जीवनी को एक निजी स्कूल ने कक्षा तीन के पाठ्यक्रम में शामिल कर रखा है। इसमें आसाराम को देश के उत्थान में अहम योगदान देने वाला संत बताया गया है। सोशल मीडिया में मामला प्रकाश में आते ही स्कूल की प्रधानाचार्य कुंदन कुमारी ने आनन-फानन में छात्राओं से किताबें वापस ले ली हैं।
महान संतों की श्रेणी में छठे स्थान पर
आरा के भगिनी निवेदिता गल्र्स स्कूल में स्कूल की तीसरी कक्षा में चलाई जा रही ज्ञान सेतु नामक यह पुस्तक प्रीमियम पब्लिकेशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित है। इसमें आसाराम बापू को संत बता उनके महान कार्यों का जिक्र है। उन्हें देश के उत्थान में अमूल्य योगदान देने वाले संतों की श्रेणी में छठे स्थान पर रखा गया है। डीईओ कार्यालय द्वारा स्वीकृत इस गर्ल्‍स स्कूल में छात्राओं की संख्या करीब पांच सौ है।

शिकायत पर होगी कार्रवाई
जिला शिक्षा पदाधिकारी सूर्यनारायण ने कहा कि स्कूल में तीसरी कक्षा के पाठ्यक्रम में आसाराम को पढ़ाए जाने की  जानकारी नहीं है। यदि लिखित शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई की जाएगी। जबकि, स्कूल की प्रिंसिपल कुंदन कुमारी ने कहा कि लड़कियों से किताबें वापस लेकर शिक्षकों को दूसरी किताबें पढ़ाने के लिए दे दी गई हैं। आसाराम बापू से कॉलेज प्रबंधन का कोई रिश्ता नहीं है।

गड़बड़ी बर्दाश्‍त नहीं
प्रबंधक अजय सिंह के अनुसार जैसे ही जानकारी मिली प्रिंसिपल से जवाब-तलब किया गया। यह लड़कियों का स्कूल है, यहां गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हो सकता है कि जब यह चैप्टर किताब में शामिल हुआ हो उस समय आसाराम विवाद में ना रहे हों।

Posted By: Amit Alok