पहले बहस, अब सम्मान से संवाद; ट्रेन में बदल रहा टीटीई का व्यवहार, बिहार में यात्रियों का सफर हुआ आसान
बिहार की ट्रेनों में टीटीई का व्यवहार अब बहस की जगह सम्मानजनक संवाद की ओर बदल रहा है, जिससे यात्रियों ...और पढ़ें

सम्मान से बात हो तो टिकट जांच भी लगती है सहज
HighLights
टीटीई अब यात्रियों से सम्मानजनक तरीके से बातचीत कर रहे हैं।
यात्रियों के बीच रेलवे के प्रति सकारात्मक नजरिया बन रहा है।
यात्री भी अपने कोच और सीट को लेकर अधिक सजग हैं।
जागरण संवाददाता, आरा(भोजपुर)। ट्रेनों में यात्रियों के साथ टीटीई के व्यवहार को लेकर लोगों की धारणा धीरे-धीरे बदल रही है। पहले जहां टिकट जांच के दौरान यात्रियों और टीटीई के बीच बहस या सख्ती की शिकायतें आम होती थीं, वहीं अब कई ट्रेनों में टीटीई यात्रियों से सम्मानजनक तरीके से बातचीत करते नजर आ रहे हैं।
आम यात्रियों को भी अब सम्मान के साथ संबोधित करने और उनकी बात शांतिपूर्वक सुनने की पहल देखने को मिल रही है। इससे यात्रियों के बीच रेलवे के प्रति सकारात्मक नजरिया बन रहा है।
सम्मान से बात हो तो टिकट जांच भी लगती है सहज
यात्री मुस्कान कुमारी का कहना है कि टीटीई का व्यवहार ट्रेन यात्रा के अनुभव को काफी हद तक प्रभावित करता है। टिकट और आरक्षण की जांच करना टीटीई की जिम्मेदारी है, लेकिन जांच के दौरान यात्री के साथ किस तरह बातचीत की जाती है, इसका असर पूरे सफर पर पड़ता है।
राजा सिंह सहित अन्य यात्रियों ने बताया कि जब टीटीई सम्मान के साथ बात करते हैं तो टिकट जांच जैसी सामान्य प्रक्रिया भी सहज लगती है।
टीटीई का काम केवल टिकट जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर यात्रियों को सही जानकारी देना और उनकी समस्याओं का समाधान कराने में मदद करना भी यात्रा व्यवस्था का हिस्सा है।
यात्रियों से भी नियमों के पालन की अपेक्षा
रेल यात्रियों उषा देवी, मीनू कुमारी और मनोज कुमार का कहना है कि टीटीई को टिकट जांच के दौरान नियमों का पालन कराने के साथ ही संयम और शालीनता बनाए रखनी चाहिए। वहीं यात्रियों को भी बिना टिकट यात्रा, निर्धारित सीट पर कब्जा करने या नियमों की अनदेखी से बचना चाहिए।
दोनों पक्ष अपनी जिम्मेदारी समझें तो यात्रा के दौरान होने वाले विवाद को कम किया जा सकता है। इससे ट्रेन का माहौल भी बेहतर रहेगा।
अपने कोच और सीट को लेकर यात्री भी सजग
ट्रेनों में यात्रियों के व्यवहार में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। यात्री अपने निर्धारित कोच और सीट को लेकर पहले की अपेक्षा अधिक सजग नजर आते हैं।
आरक्षित टिकट के अनुसार अपनी सीट पर बैठना और दूसरे यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखना यात्रा के दौरान आपसी विवाद को कम करने में मदद करता है।
टीटीई भी ऐसे मामलों में यात्रियों को समझाकर स्थिति सामान्य करने की कोशिश करते हैं। यात्रियों का कहना है कि यदि टीटीई और यात्री दोनों अपनी जिम्मेदारियों को समझें तो ट्रेन का माहौल बेहतर बनाया जा सकता है।
कुछ टीटीई के व्यवहार से अब भी शिकायत
हालांकि सभी ट्रेनों में स्थिति एक जैसी नहीं है। यात्रियों के अनुसार कुछ टीटीई के व्यवहार को लेकर अब भी शिकायतें सामने आती हैं।
टिकट जांच के दौरान ऊंची आवाज में बात करना, अनावश्यक बहस करना या यात्रियों के साथ अभद्र व्यवहार करने की शिकायतें कभी-कभी सुनने को मिलती हैं।
ऐसे मामलों से यात्रियों में असहजता पैदा होती है और रेलवे की छवि भी प्रभावित होती है। यात्रियों का कहना है कि ऐसे मामलों में शिकायतों पर उचित ध्यान दिया जाना चाहिए।
बेहतर व्यवहार से बढ़ेगा यात्रियों का भरोसा
रेल यात्रियों के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि टीटीई के व्यवहार में पहले की तुलना में कई जगह सुधार आया है। यात्रियों का मानना है कि यदि इसी तरह व्यवहार में निरंतर सुधार किया जाए और शिकायतों पर भी गंभीरता से कार्रवाई हो तो ट्रेनों का माहौल और बेहतर बनाया जा सकता है।
यात्रियों की अपेक्षा है कि रेलवे अपने कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर प्रशिक्षण और निगरानी की व्यवस्था को लगातार मजबूत करे। सम्मानजनक संवाद, नियमों की स्पष्ट जानकारी और शिकायतों का त्वरित समाधान यात्री सुविधा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सरस्वती चंद्र, मुख्य सूचना जनसंपर्क पदाधिकारी, हाजीपुर रेलवे जोन ने भी यात्री सुविधा और बेहतर संवाद को महत्वपूर्ण बताया है। इससे यात्रियों और टीटीई के बीच विश्वास बढ़ेगा और ट्रेन यात्रा को अधिक सहज एवं सुखद बनाया जा सकेगा।
