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बिहार के लाल का कमाल: बेंगलुरु में प्रशिक्षण... श्रीनगर में चयन, भारत ने फ्रांस में जीता साइकिल पोलो स्वर्ण पदक

Published: Tue, 13 Oct 2026 08:36 AM (IST)

बिहार के भोजपुर जिले के चंदन कुमार पांडेय के नेतृत्व में भारतीय साइकिल पोलो टीम ने फ्रांस में आयोजित इंटरनेशनल ...और पढ़ें

गांव की मिट्टी से अंतरराष्ट्रीय मंच तक चमके चंदन

गांव की मिट्टी से अंतरराष्ट्रीय मंच तक चमके चंदन

HighLights

  1. चंदन पांडेय के नेतृत्व में भारत ने स्वर्ण जीता।

  2. फ्रांस में इंटरनेशनल यूरोपियन चैंपियनशिप-2026 में जीत।

  3. बेंगलुरु प्रशिक्षण, श्रीनगर चयन के बाद ऐतिहासिक सफलता।

जागरण संवाददाता, आरा (भोजपुर)। बिहार के भोजपुर जिले के लाल चंदन कुमार पांडेय ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाते हुए देश का मान बढ़ाया है। फ्रांस में आयोजित इंटरनेशनल यूरोपियन साइकिल पोलो चैंपियनशिप-2026 में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।

चंदन पांडेय के नेतृत्व में भारतीय दल ने पूरे टूर्नामेंट में जीत का सिलसिला बरकरार रखा और मेजबान फ्रांस सहित इंग्लैंड, बेल्जियम व ओकेनडॉन को शिकस्त देकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।

प्रतियोगिता में फ्रांस की टीम को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। भोजपुर के बड़की सनदियां गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर भारतीय दल का नेतृत्व करना चंदन की उपलब्धि को और खास बनाता है।

गांव की मिट्टी से अंतरराष्ट्रीय मंच तक चमके चंदन

आरा प्रखंड के बड़की सनदियां गांव निवासी चंदन कुमार पांडेय को इस प्रतियोगिता में भारतीय दल का चीफ डी मिशन नियुक्त किया गया था।

उनकी जिम्मेदारी टीम के समन्वय, खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने और पूरे दल को एकजुट रखने की थी। उनके नेतृत्व में भारतीय टीम ने अनुशासन, रणनीति और टीम भावना का बेहतरीन परिचय दिया।

चंदन की इस उपलब्धि ने न केवल भोजपुर, बल्कि पूरे बिहार को गौरवान्वित किया है। उनकी सफलता ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

फ्रांस में भारतीय खिलाड़ियों ने दिखाया दम

11 अक्टूबर को संपन्न हुई इस चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही दमदार खेल दिखाया। टीम ने इंग्लैंड, बेल्जियम, ओकेनडॉन और मेजबान फ्रांस के खिलाफ जीत दर्ज कर अपनी श्रेष्ठता साबित की।

पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम अजेय रही। खिलाड़ियों के शानदार तालमेल, बेहतर रणनीति और दृढ़ संकल्प ने भारत को खिताब तक पहुंचाया। अंतरराष्ट्रीय धरती पर तिरंगे की शान बढ़ाने वाली इस जीत से भारतीय साइकिल पोलो को नई पहचान मिली है।

बेंगलुरु में प्रशिक्षण, श्रीनगर में हुआ अंतिम चयन

चंदन कुमार पांडेय के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी के लिए भारतीय टीम का कोचिंग कैंप 3 से 20 सितंबर 2026 तक बेंगलुरु में आयोजित किया गया था।

इसके बाद 26 से 29 सितंबर तक श्रीनगर में आयोजित मेंस फेडरेशन कप-2026 के दौरान भारतीय टीम का अंतिम चयन किया गया।

खिलाड़ियों ने प्रशिक्षण शिविर में अपनी तकनीक, फिटनेस, आपसी तालमेल और खेल रणनीति पर मेहनत की। इसी तैयारी का परिणाम फ्रांस में मिली ऐतिहासिक सफलता के रूप में सामने आया।

कप्तान असरुद्दीन शाह के नेतृत्व में खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन

स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम में कप्तान असरुद्दीन शाह के साथ विष्णु एस., जिजिराज आर., अनफर जे. और अल्दीन रियास शामिल रहे।

टीम कोच कमल किशोर सोनी ने खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया। खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में एकजुटता और अनुशासन बनाए रखा। टीम के सामूहिक प्रयास और मजबूत इच्छाशक्ति ने भारत को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई।

8 अक्टूबर को फ्रांस के लिए रवाना हुआ था भारतीय दल

चंदन पांडेय ने बताया कि भारतीय दल 8 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से एतिहाद एयरवेज के माध्यम से फ्रांस के लिए रवाना हुआ था।

निर्धारित तैयारियों के साथ प्रतियोगिता में उतरी भारतीय टीम ने अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया। 11 अक्टूबर को प्रतियोगिता संपन्न होने के साथ ही भारत की स्वर्णिम सफलता ने देशवासियों को गौरवान्वित कर दिया।

चंदन की उपलब्धि बिहार के युवाओं के लिए बनी प्रेरणा

साइकिल पोलो फेडरेशन ऑफ इंडिया के सचिव और भारतीय दल के चीफ ऑफ द मिशन चंदन कुमार पांडेय ने फ्रांस से दूरभाष पर बातचीत में कहा कि यह जीत भारतीय युवाओं की प्रतिभा, मेहनत और अनुशासन का प्रतीक है।

उन्होंने खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर प्रसन्नता जताते हुए इसे पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। भोजपुर के एक गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारतीय दल का नेतृत्व करने तक का उनका सफर बिहार के युवा खिलाड़ियों को बड़े सपने देखने और उन्हें मेहनत से पूरा करने की प्रेरणा देता है। इस ऐतिहासिक जीत से भोजपुर जिले के खेल जगत में खुशी की लहर है।