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शाहपुर की राजमणि देवी बनीं मिसाल; दोनों बेटियों ने BPSC में पाई सफलता, प्रेरक है कहानी

Published: Sat, 09 May 2026 12:10 PM (IST)

राजमणि देवी ने पति के लापता होने के बाद आंगनबाड़ी सेविका के रूप में संघर्ष करते हुए अपनी बेटियों को ...और पढ़ें

दोनों बेटियों के साथ राजमण‍ि देवी।

दोनों बेटियों के साथ राजमण‍ि देवी।

दिलीप ओझा, शाहपुर (आरा)। संघर्ष और हौसले की मिसाल बनीं शाहपुर प्रखंड की राजमणि देवी आज पूरे क्षेत्र में नारी सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुकी हैं।

पति के अचानक लापता हो जाने के बाद जिस परिवार पर संकट का पहाड़ टूट पड़ा था, उसी परिवार की दोनों बेटियों ने आज सफलता की नई इबारत लिख दी है।

आर्थिक तंगी, सामाजिक चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बावजूद राजमणि देवी ने हार नहीं मानी। उन्होंने आंगनबाड़ी सेविका के रूप में कार्य करते हुए परिवार की जिम्मेदारी संभाली और बेटियों की पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी। 

बड़ी बेटी बनीं वाण‍िज्‍य कर अधिकारी 

राजमणि देवी की बड़ी बेटी सौम्या पांडे ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर वर्ष 2024 की बीपीएससी परीक्षा में 67वीं रैंक हासिल कर सहायक वाणिज्य कर आयुक्त का पद प्राप्त किया।

वहीं छोटी बेटी ऐश्वर्या पांडे ने भी बीपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर शिक्षिका बन परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया।

राजमणि देवी बताती हैं कि पति के लापता होने के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। कई बार आर्थिक संकट इतना गहरा था कि घर चलाना भी मुश्किल हो जाता था।

सीमि‍त आय में भी नहीं रुकने दी बेटियों की पढ़ाई

लेकिन उन्होंने बेटियों की पढ़ाई नहीं रुकने दी। सीमित आय में उन्होंने हर जरूरत पूरी करने का प्रयास किया और बेटियों को आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित किया।

ग्रामीण परिवेश में जहां आज भी बेटियों की शिक्षा को लेकर कई तरह की चुनौतियां सामने आती हैं, वहां राजमणि देवी ने अपने संघर्ष और दृढ़ संकल्प से यह साबित कर दिया कि यदि मां मजबूत इरादों वाली हो तो बेटियां किसी भी मुकाम तक पहुंच सकती हैं।

आज राजमणि देवी की कहानी शाहपुर ही नहीं, पूरे इलाके में प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। उनकी संघर्षगाथा यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियां कभी सपनों की राह नहीं रोक सकतीं।

शिक्षा, आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।