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कैसे होगा महिलाओं का भला, कहीं खुला तो कहीं ताला; भोजपुर के थानों में महिला हेल्प डेस्क की बदहाल व्यवस्था

Published: Wed, 23 Sep 2026 04:04 PM (IST)

भोजपुर के थानों में चार साल पहले शुरू हुई महिला हेल्प डेस्क व्यवस्था कई जगह प्रभावी नहीं है। नामित कर्मियों ...और पढ़ें

महिला हेल्प डेस्क का उद्देश्य पुलिस और समुदाय के बीच संपर्क बेहतर करना

महिला हेल्प डेस्क का उद्देश्य पुलिस और समुदाय के बीच संपर्क बेहतर करना

HighLights

  1. भोजपुर में चार साल पहले शुरू हुई महिला हेल्प डेस्क व्यवस्था।

  2. कई थानों में नामित कर्मी अनुपलब्ध, नियमित निगरानी का अभाव।

  3. महिलाओं को शिकायत दर्ज कराने में अब भी होती है परेशानी।

दीपक, जागरण, आरा(भोजपुर)। महिलाओं और युवतियों की शिकायतों को प्राथमिकता से सुनने और उन्हें थाने में सहज माहौल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चार वर्ष पहले भोजपुर जिले के थानों में महिला हेल्प डेस्क की व्यवस्था शुरू की गई थी। समय बीतने के साथ कई थानों में यह व्यवस्था प्रभावी संचालन के बजाय महज कागजी बनकर रह गई है।

निर्धारित स्थान, कर्मी और सुविधाएं होने के बावजूद नियमित संचालन नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

चार साल में व्यवस्था का विस्तार, पर संचालन पर सवाल

वर्ष 2022 में 12 थानों और जुलाई 2024 में जिले के 27 थानों में महिला हेल्प डेस्क सेवा शुरू की गई थी। इसके साथ संबंधित थानों के मोबाइल नंबर भी जारी किए गए थे।

उद्देश्य था कि महिलाओं की शिकायत अलग से सुनी जाए, उनकी समस्या दर्ज हो और जरूरत के अनुसार त्वरित पुलिस कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। मगर कई थानों में शिकायत लेकर पहुंचने वाली महिलाओं को अब भी सामान्य पुलिसकर्मियों के पास ही जाना पड़ता है।

नामित कर्मी हर समय उपलब्ध नहीं

घरेलू हिंसा, छेड़खानी, दहेज प्रताड़ना, साइबर अपराध समेत महिला संबंधी मामलों में शिकायत लेकर पहुंचने वाली फरियादियों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है।

महिला हेल्प डेस्क के लिए नामित कर्मियों की उपलब्धता हर समय नहीं रहने से महिलाओं को सामान्य थाना व्यवस्था में ही अपनी शिकायत रखने की स्थिति बनती है। इससे अलग और सहज सुनवाई की मूल अवधारणा प्रभावित होती है।

अलग कक्ष और महिला पुलिसकर्मी जरूरी

महिला हेल्प डेस्क का मूल उद्देश्य ही ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां पीड़िता बिना झिझक अपनी बात पुलिस के सामने रख सके।

इसके लिए अलग कक्ष, प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मी और शिकायत की गोपनीयता महत्वपूर्ण है। इन व्यवस्थाओं के प्रभावी संचालन में कमी से हेल्प डेस्क की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं। वर्ष 2019-20 में करीब दो दर्जन थानों में इसके लिए कक्ष भी बनाए गए थे।

नंबर जारी हुए, अब नियमित निगरानी की जरूरत

महिला हेल्प डेस्क शुरू किए जाने के दौरान थानों के मोबाइल नंबर भी जारी किए गए थे, ताकि जरूरत पड़ने पर महिलाएं सीधे संपर्क कर सकें।

अब आवश्यकता इस बात की है कि हेल्प डेस्क की नियमित निगरानी हो और वहां महिला पुलिसकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

इससे शिकायतकर्ताओं को सामान्य थाना व्यवस्था में भटकने के बजाय निर्धारित स्थान पर अपनी समस्या रखने की सुविधा मिल सकेगी।

क्या है महिला हेल्प डेस्क का उद्देश्य

महिलाओं के साथ छेड़छाड़, घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, दहेज प्रताड़ना और एसिड अटैक जैसी घटनाओं की सूचना मिलने पर त्वरित सहायता उपलब्ध कराना इसका प्रमुख उद्देश्य है।

महिला संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए महिला पुलिस व्यवस्था उपलब्ध कराना भी इसकी जिम्मेदारी है, ताकि पीड़िता बिना संकोच अपनी बात महिला अधिकारी के सामने रख सके।

शिकायत से सहयोग तक, भरोसा कायम करना लक्ष्य

महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर ध्यान देने के साथ महिला हेल्प डेस्क का उद्देश्य पुलिस और समुदाय के बीच संपर्क बेहतर करना भी है।

पीड़ित महिलाओं में यह भरोसा पैदा करना कि उनकी शिकायत सुनी जाएगी और आवश्यक पुलिस सहायता मिलेगी, व्यवस्था का अहम हिस्सा है।

बातचीत, मध्यस्थता, परेशानी में सलाह और पुलिस सहयोग के साथ जरूरत के अनुसार अन्य सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में भी हेल्प डेस्क को प्रभावी बनाया जाना है।