विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Wetlands in Bhojpur: भोजपुर में 157 हेक्टेयर आर्द्रभूमि की पहचान, अवैध कब्जे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट सख्त

Published: Fri, 11 Sep 2026 03:13 PM (IST)

भोजपुर जिले में 27 आर्द्रभूमियों की पहचान की गई है, जिनका कुल क्षेत्रफल 156.91 हेक्टेयर है, जो जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

भोजपुर में 157 हेक्टेयर आर्द्रभूमि की पहचान (AI Generated Image)

भोजपुर में 157 हेक्टेयर आर्द्रभूमि की पहचान (AI Generated Image)

HighLights

  1. भोजपुर में 27 आर्द्रभूमियां चिह्नित, कुल 156.91 हेक्टेयर क्षेत्र।

  2. जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और मिट्टी बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका।

  3. पर्यावरण संतुलन, जैव विविधता और कार्बन अवशोषण के लिए आवश्यक।

जागरण संवाददाता, आरा। भोजपुर जैसे कृषि प्रधान जिले में हरियाली और जल संरक्षण के लिए चिह्नित वन आर्द्रभूमि का महत्व बढ़ गया है। जिले में विभिन्न प्रखंडों के 27 स्थानों को आर्द्रभूमि के रूप में चिह्नित किया गया है। इन सभी स्थानों का कुल क्षेत्रफल 156.91 हेक्टेयर है।

इन भूखंडों का संरक्षण केवल आर्द्रभूमि संपदा बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भूजल रिचार्ज, मिट्टी संरक्षण और स्थानीय पर्यावरण को संतुलित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

भोजपुर वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रद्युमन गौरव ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में आर्द्रभूमि बचाने के लिए पदाधिकारियों और वन रक्षियों को प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने बताया कि आर्द्रभूमि का संरक्षण जरूरी है।

बताते चलें कि जिले के अधिकांश आर्द्रभूमि पर स्थानीय लोगों ने कब्जा कर लिया है। इसके कारण आर्द्रभूमि का क्षेत्र सिकुड़ता जा रहा है।

विभिन्न प्रखंडों में निम्न है आर्द्रभूमि

जिले के आरा, बड़हरा, कोईलवर, तरारी, पीरो, जगदीशपुर, उदवंतनगर और शाहपुर प्रखंड में ये आर्द्रभूमि फैले हुए हैं। इनमें सबसे बड़ा क्षेत्र बड़हरा प्रखंड के नथमलपुर में 26.83 हेक्टेयर है।

इसके बाद शाहपुर के सहजौली में 17.27 हेक्टेयर आर्द्रभूमि चिह्नित है। बड़हरा के ज्ञानपुर में 12.26 हेक्टेयर और सरैया में 3.54 हेक्टेयर आर्द्रभूमि दर्ज है।

नेखाम क्षेत्र के शेओ दियारा में भी 10.89 और 4.63 हेक्टेयर के दो आर्द्रभूमि दर्ज हैं। आरा क्षेत्र में 3.26, 2.34, 2.26, 10.76 और 2.21 हेक्टेयर के कई भूखंड चिह्नित किए गए हैं।

बिहिया के महुआवन में 7.84 हेक्टेयर, जबकि उदवंतनगर के बेलाउर में 2.59 और 3.07 हेक्टेयर क्षेत्र दर्ज है।

तरारी के इतमन में 2.77 और देव में 4.50 हेक्टेयर आर्द्रभूमि है। पीरो के नोनार में 4.38 तथा पीरो क्षेत्र में 3.75 हेक्टेयर भूमि दर्ज की गई है। जगदीशपुर समेत अन्य इलाकों में भी छोटे-छोटे आर्द्र भूखंड मौजूद हैं।

पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि

वन विभाग के रेंजर कन्हैया कुमार ने बताया कि पर्यावरण की दृष्टि से आर्द्रभूमि क्षेत्रों की भूमिका अहम है। पेड़-पौधे वर्षा के पानी को जमीन में पहुंचाने में मदद करते हैं। इससे भूजल स्तर को बनाए रखने में सहायता मिलती है।

पेड़ों की जड़ें मिट्टी के कटाव को रोकती हैं। साथ ही आर्द्रभूमि स्थानीय तापमान को नियंत्रित करने, जैव विविधता को आश्रय देने और कार्बन अवशोषण में भी योगदान करते हैं।