आरा के स्कूल से निकले, IIT मुंबई में पढ़े और अमेरिका में मिला 6.5 करोड़ का रिसर्च अवार्ड; इस शोध पर लगाएंगे ताकत
भोजपुर के मूल निवासी प्रो. तारकेश्वर सिंह को अमेरिका की नेशनल साइंस फाउंडेशन ने प्रतिष्ठित करियर अवार्ड से सम्मानित किया ...और पढ़ें

भोजपुर के नवादा बेन निवासी प्रो. तारकेश्वर सिंह। सौ-स्वजन
HighLights
प्रो. तारकेश्वर को अमेरिका में प्रतिष्ठित करियर अवार्ड मिला।
मस्तिष्क-शरीर समन्वय शोध के लिए 6.5 करोड़ रुपये प्राप्त।
पार्किंसन इलाज में सहायक, भोजपुर के लिए गौरव।
राणा अमरेश सिंह, आरा। भोजपुर की माटी से निकलकर दुनियाभर में कई लोग अपनी प्रतिभा से देश का नाम रौशन कर रहे हैं। उन्हीं में एक नाम प्रो.तारकेश्वर सिंह का है।
जिले के नवादा बेन के मूल निवासी और भारतीय तकनीकी संस्थान, मुंबई के पूर्व छात्र प्रो. तारकेश्वर को अमेरिका की नेशनल साइंस फाउंडेशन (NSF) ने प्रतिष्ठित करियर अवार्ड से सम्मानित किया है।
अमेरिका के कॉलेज में हैं एसोसिएट प्रोफेसर
अवार्ड के तहत उन्हें करीब साढ़े छह करोड़ रुपये (7,75,450 अमेरिकी डाॅलर) की शोध राशि प्रदान की गई है। 42 वर्षीय प्रो. सिंह वर्तमान में अमेरिका की प्रतिष्ठित पेन स्टेट यूनिवर्सिटी के अंतर्गत हेल्थ एंड ह्युमन डेवलपमेंट काॅलेज में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।
प्रो. सिंह को यह सम्मान मस्तिष्क और शरीर के बीच समन्वय की प्रक्रिया को समझने के लिए पांच वर्षों तक किए जाने वाले शोध के लिए मिला है।
उनका शोध चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में पार्किंसन के इलाज के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे सर्जरी कराने वाले मरीजों, खिलाड़ियों और पार्किंसन जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों की मदद के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।
1996 में आरा से की मैट्रिक
अमेरिका में युवा वैज्ञानिकों को मिलने वाले प्रतिष्ठित सम्मानों में इस अवार्ड की खास पहचान है। प्रो. तारकेश्वर सिंह की शैक्षणिक यात्रा भी उनकी प्रतिभा और लगन की कहानी बयां करती है।
उन्होंने वर्ष 1996 में आरा के कैथोलिक हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद लखनऊ के सैनिक स्कूल से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की और आगे चलकर आईआईटी मुंबई से रसायन में बीटेक किया।
उनकी माता कमला सिंह बताती हैं कि तारकेश्वर बचपन से ही पढ़ाई और अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर थे। पढ़ाई के साथ उनकी रुचि खेलों में भी थी।
पिता रहे हैं सेना में अधिकारी
विद्यालय में शतरंज और टेबल टेनिस प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते थे और पुरस्कार भी प्राप्त करते थे। उनके पिता कैप्टन राजेश्वर सिंह सेना में अधिकारी रहे हैं।
छोटी बहन आशीता सिंह ने भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ से प्रबंधन की डिग्री हासिल की है और वर्तमान में कनाडा में कार्यरत हैं।
सेवानिवृत्त शिक्षक महेंद्र सिंह कहते हैं कि भोजपुर की मिट्टी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विज्ञान के क्षेत्र में पहचान बनाने वाले प्रो.तारकेश्वर की उपलब्धि जिले के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
