भूल जाइए लंगड़ा-बीजू, बिहार में मिलेंगे अमेरिकन 'टॉमी एटकिंस' और अफ्रीकी 'सेंसेशन' आम.. क्या है खासियत?
भोजपुर के किसान अब धान-गेहूं से हटकर बागवानी, खासकर आम की खेती पर ध्यान दे रहे हैं। जिले में 100 ...और पढ़ें

100 एकड़ में नए आम के पौधे लगाने का लक्ष्य लगभग पूरा

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जागरण संवाददाता, आरा(भोजपुर)। भोजपुर जिला के किसान अब पारंपरिक धान-गेहूं की खेती से आगे बढ़कर बागवानी की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। विशेष रूप से आम की खेती ने जिले को एक नई पहचान दिलानी शुरू कर दी है। कृषि विभाग द्वारा निर्धारित 100 एकड़ में नए आम के पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था।
किसानों की सक्रिय भागीदारी से इस लक्ष्य को लगभग पूरा कर लिया गया है। अब यहां देशी किस्मों के साथ विदेशी प्रजातियों की भी खेती हो रही है। इससे जिले के बागवानी क्षेत्र को नई दिशा और ऊर्जा मिली है।
लंगड़ा-बीजू के साथ विदेशी किस्मों का विस्तार
अब तक जिले में लंगड़ा और बीजू जैसी पारंपरिक किस्में ही अधिक लगाई जाती थीं। लेकिन अब अमेरिकन 'टॉमी एटकिंस' और दक्षिण अफ्रीका की 'सेंसेशन' किस्म भी लगाई जा रही है।
ये दोनों किस्में अपने आकर्षक रंग और बेहतर बाजार मांग के लिए जानी जाती हैं। लाल, हरे और पीले रंग के ये आम ग्राहकों को खास आकर्षित करते हैं। विदेशी किस्मों के आने से किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है। बाजार में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
655 हेक्टेयर में फैले हैं आम के बाग
जिले में वर्तमान में लगभग 655 हेक्टेयर में आम के बगीचे फैले हुए हैं। परंपरागत किस्मों के साथ उन्नत और बाजारोन्मुख प्रजातियों का भी रोपण हुआ है।
वर्ष 2025-26 में 100 एकड़ में पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया था। जिसमें अब तक करीब 80 एकड़ में पौधे लगाए जा चुके हैं। किसान अब बागवानी को स्थायी आय का माध्यम मानने लगे हैं। बेहतर मुनाफे की संभावना ने किसानों का रुझान बढ़ाया है।
आयर गांव बना उन्नत खेती का मॉडल
आयर गांव (जगदीशपुर प्रखंड) के किसान उपेंद्र सिंह ने आठ एकड़ जमीन में उद्यानिक खेती विकसित की है। चार एकड़ में करीब 80 प्रजातियों के आम के पौधे लगाए गए हैं।
इनमें 50 से अधिक पौधे अमेरिकन 'टॉमी एटकिंस' और 'सेंसेशन' के हैं। साथ ही 25 पौधे अल्फांसो किस्म के भी लगाए गए हैं। सभी पौधों में इस समय मंजर आ चुका है। उनके बाग में कुल मिलाकर लगभग पांच हजार आम के पौधे हैं।
अल्फांसो से बढ़ी आय की उम्मीद
तीन दर्जन से अधिक बगीचों में विशेष रूप से अल्फांसो आम की खेती की जा रही है। यह किस्म अपनी खुशबू, स्वाद और आकर्षक रंग के लिए देशभर में प्रसिद्ध है।
बेहतर उत्पादन से किसानों को अच्छा लाभ मिलने की उम्मीद जगी है। उपेंद्र सिंह के बाग से प्रतिवर्ष लगभग तीन लाख रुपये की आय हो रही है।पौधे इंडो-इजरायल कृषि विश्वविद्यालय, बस्ती से लाए गए हैं। इससे उन्नत तकनीक और गुणवत्तापूर्ण पौधों का लाभ मिल रहा है।
वैज्ञानिक पद्धति से बढ़ रहा उत्पादन
कृषि विज्ञानी डॉ. सचिदानंद सिंह के अनुसार क्षेत्र की जलवायु आम उत्पादन के अनुकूल है। उपजाऊ मिट्टी और वैज्ञानिक पद्धति से खेती का सकारात्मक असर दिख रहा है। गुणवत्तापूर्ण पौधों के चयन से उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है।
बड़हरा प्रखंड में 202 हेक्टेयर में आम के बाग हैं। शाहपुर में 85 और कोईलवर में 87 हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती हो रही है। इस वर्ष अनुकूल मौसम के कारण पेड़ों में भरपूर मंजर आए हैं।
मंजर के बाद न करें सिंचाई
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को विशेष सलाह दी है। मंजर निकलने के बाद आम के पेड़ों की सिंचाई नहीं करनी चाहिए। इससे उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
जब तक 20-30 ग्राम के टिकोले न लगें, तब तक पानी देने से बचें। सही समय पर देखभाल से बेहतर फलन संभव है। किसानों में इस बार बेहतर पैदावार को लेकर खासा उत्साह है।
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