भोजपुर के हरपुर का वेटलैंड मॉडल अब बनेगा देश की पंचायतों की मिसाल, दिल्ली तक पहुंची गूंज
भोजपुर के चरपोखरी प्रखंड स्थित हरपुर गांव का मानव निर्मित वेटलैंड मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। यह ग्रे-वाटर ...और पढ़ें

दिल्ली की बैठक में प्रस्तुत हुआ हरपुर का मॉडल
HighLights
भोजपुर के हरपुर का वेटलैंड मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।
ग्रे-वाटर प्लांट गंदे पानी का वैज्ञानिक शोधन करता है।
फायटोराइड तकनीक से बिना बिजली पानी साफ करने की पहल।
संवादसूत्र चरपोखरी (भोजपुर)। भोजपुर के चरपोखरी प्रखंड की मुकुंदपुर पंचायत के हरपुर गांव में तैयार किया गया मानव निर्मित वेटलैंड मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। गांव के गंदे पानी के वैज्ञानिक शोधन के लिए तैयार किए गए ग्रे-वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की सफलता ने केंद्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है।
राज्य स्तर पर सराहना मिलने के बाद अब इस मॉडल को देश की अन्य ग्राम पंचायतों तक पहुंचाने की तैयारी है। गांव के लिए शुरू हुई यह पहल अब जल प्रबंधन की मिसाल बनती दिख रही है।
दिल्ली की बैठक में प्रस्तुत हुआ हरपुर का मॉडल
23 सितंबर को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की ओर से आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुकुंदपुर पंचायत के मुखिया प्रवीण कुमार उर्फ राजू ने हिस्सा लिया।
बैठक में उन्होंने हरपुर में लगाए गए धूसर जल प्रबंधन प्लांट की कार्यप्रणाली और उससे मिले परिणामों की जानकारी अधिकारियों के सामने रखी।
गांव में जलजमाव और गंदे पानी की समस्या से निपटने के लिए तैयार किए गए इस मॉडल ने अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। इससे पहले दैनिक जागरण ने भी 20 अगस्त को इस पहल को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
16.93 लाख की लागत, बिजली और मशीन की जरूरत नहीं
हरपुर में बनाए गए प्लांट पर 16 लाख 93 हजार 500 रुपये खर्च हुए हैं। इसका निर्माण स्वच्छ भारत मिशन और 15वें वित्त आयोग की राशि से कराया गया है।
फायटोराइड तकनीक पर आधारित इस सिस्टम की खासियत है कि पानी के शोधन के लिए बिजली या किसी मशीन की जरूरत नहीं पड़ती।
सैटलिंग टैंक और स्टोरेज टैंक के साथ गिट्टियों, पत्थरों और करीब 1000 घन फीट कोयले की जैविक परतों का इस्तेमाल किया गया है।
पौधों की मदद से साफ होता है गांव का गंदा पानी
प्लांट के ऊपरी हिस्से में काना लिली के पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों की जड़ें पानी में मौजूद अशुद्धियों को सोखने में मदद करती हैं और दुर्गंध को भी कम करती हैं।
इस पूरी प्रक्रिया के बाद निकलने वाले पानी का इस्तेमाल गांव के किसान सिंचाई के लिए कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस व्यवस्था में नियमित मशीनरी संचालन और बिजली खर्च की जरूरत नहीं है।
हरपुर बनेगा अध्ययन और प्रशिक्षण का केंद्र
नई दिल्ली की बैठक में इस मॉडल को अन्य ग्राम पंचायतों के लिए उपयोगी मानते हुए देश के दूसरे हिस्सों में लागू करने की दिशा में सहमति बनी।
इसके साथ ही हरपुर को दूसरे राज्यों से आने वाले प्रतिनिधियों और तकनीकी टीमों के लिए अध्ययन एवं प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
इससे गांव की पहचान केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दूसरे राज्यों की पंचायतों के लिए भी यह एक उदाहरण बन सकता है।
गांव की समस्या से निकला राष्ट्रीय मॉडल
मुखिया प्रवीण कुमार उर्फ राजू के अनुसार, गांव में जलजमाव की समस्या को दूर करने के लिए जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारियों व तकनीकी विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया गया था।
इसी प्रक्रिया में फायटोराइड तकनीक आधारित प्लांट तैयार करने पर सहमति बनी। प्लांट के सफल संचालन के बाद दूषित पानी के शोधन का परिणाम सामने आया। अब इसी अनुभव को बड़े स्तर पर अपनाने की दिशा में पहल शुरू हुई है।
गांव की समस्या के समाधान के लिए शुरू किया गया यह प्रयास अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा है। दिल्ली में अपने गांव, भोजपुर और बिहार का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला, यह हमारे लिए गौरव की बात है।
प्रवीण कुमार उर्फ राजू, मुखिया, मुकुंदपुर पंचायत
