भोजपुर में घर-घर बनेंगे आयुष्मान कार्ड, डिजिटल रिकॉर्ड से सुधरेगी आरोग्य मंदिरों की तस्वीर
भोजपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने की पहल शुरू हुई है, जिसमें 16 लाख आभा कार्ड और 10.90 लाख आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं।

आभा कार्ड से डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं, आरोग्य मंदिरों की निगरानी से ग्रामीण स्वास्थ्य में सुधार
HighLights
भोजपुर में 16 लाख आभा कार्ड, 10.90 लाख आयुष्मान कार्ड बने।
'साक्षी' प्लेटफॉर्म से आरोग्य मंदिरों की गुणवत्ता की डिजिटल निगरानी।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की भी डिजिटल ट्रैकिंग होगी।
अरुण प्रसाद, आरा। भोजपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में दोहरी पहल शुरू की गई है। एक ओर जिले में अब तक करीब 16 लाख लोगों का आभा कार्ड और 10 लाख 90 हजार लोगों का आयुष्मान कार्ड बनाया जा चुका है, वहीं दूसरी ओर आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की सेवाओं की गुणवत्ता की निगरानी डिजिटल प्लेटफॉर्म से करने की तैयारी है।
स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि मरीजों को छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए शहर का रुख न करना पड़े और गांव में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें।
सिविल सर्जन डॉ. शिवेंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि जिन लोगों का अब तक आभा कार्ड नहीं बना है, उन्हें चिह्नित कर आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर घर-घर जाकर कार्ड बनवाने में सहयोग करेंगे। पात्र लाभार्थियों का आयुष्मान कार्ड भी बनाया जाएगा।
प्रत्येक आयुष्मान कार्ड बनाने पर आशा कार्यकर्ता या फैसिलिटेटर को 15 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों का पंजीकरण भी आभा के माध्यम से किया जाएगा। जांच, इलाज, दवा और रिपोर्ट से जुड़ी जानकारी इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड में दर्ज होगी।
पर्ची से दवा तक हर कदम का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड
अब स्वास्थ्य केंद्र के खुले रहने भर की निगरानी नहीं होगी, बल्कि मरीज के पर्ची कटवाने से लेकर चिकित्सक से परामर्श और दवा मिलने तक की प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा। दवाओं की उपलब्धता, साफ-सफाई और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का भी नियमित मूल्यांकन होगा।
'साक्षी' प्लेटफॉर्म बताएगा- कहां है कमी
स्वास्थ्य विभाग आरोग्य मंदिरों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) के अनुरूप विकसित करने की तैयारी में है। इसके लिए 'साक्षी' डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वास्थ्य केंद्रों की कमियों की पहचान की जाएगी।
ओपीडी में मरीजों की संख्या, इलाज में लगा समय, दवा की उपलब्धता और दवा वितरण से जुड़ी जानकारी डिजिटल डैशबोर्ड पर उपलब्ध होगी।
गर्भधारण से टीकाकरण तक निगरानी
इस पहल में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर विशेष जोर रहेगा। गर्भवती महिलाओं की प्रसव-पूर्व जांच, संस्थागत प्रसव, नवजात की देखभाल और बच्चों के नियमित टीकाकरण की निगरानी डिजिटल माध्यम से की जाएगी।
गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरने वाले स्वास्थ्य केंद्रों को प्रमाणन के साथ अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन भी मिलेगा। स्वास्थ्यकर्मियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेटा दर्ज करने और गुणवत्ता मानकों के पालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
