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फसल थी नहीं, नुकसान कैसे हुआ? अनुदान के दावों ने कृषि विभाग को चौंकाया, भोजपुर में अब रिपोर्ट खोलेगी राज

Published: Fri, 02 Oct 2026 04:39 PM (IST)

भोजपुर में फसल क्षति अनुदान के लिए कुछ किसानों द्वारा बिना फसल वाले क्षेत्रों से भी दावा करने पर कृषि ...और पढ़ें

लछूटोला के आसपास की जमीन में बाढ़ का पानी। जागरण

लछूटोला के आसपास की जमीन में बाढ़ का पानी। जागरण

HighLights

  1. भोजपुर में बिना फसल वाले क्षेत्रों से भी अनुदान के दावे।

  2. कृषि विभाग ऑनलाइन आवेदनों का सर्वेक्षण रिपोर्ट से करेगा मिलान।

  3. वास्तविक प्रभावित किसानों को ही मिलेगा फसल क्षति अनुदान।

जागरण संवाददाता, आरा। भोजपुर जिले में फसल क्षति अनुदान हासिल करने के लिए कुछ किसानों ने ऐसा दावा किया है, जिसने कृषि विभाग की जांच बढ़ा दी है।

बाढ़ से प्रभावित किसानों को फसल क्षति का अनुदान देने के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगा गया था। आवेदन की प्रक्रिया में कुछ ऐसी पंचायतों के किसानों ने भी फसल क्षति का दावा कर दिया है, जहां बाढ़ से पहले खेतों में फसल ही नहीं थी।

आवेदन और सर्वेक्षण का होगा म‍िलान 

मामला सामने आने के बाद विभाग अब आवेदन और पूर्व में कराए गए सर्वेक्षण का मिलान करने की तैयारी में है। जिला कृषि पदाधिकारी डाॅ. नीरज कुमार ने बताया कि शाहपुर प्रखंड के लछुटोला, लालू का डेरा, दामोदरपुर जैसे एक दर्जन पंचायतों में खरीफ फसल नहीं लगाई गई थी।

क्यों कि वहां प्रत्येक वर्ष बाढ़ आती है और खेतों में पानी जमा हो जाता है, वहां के किसान फसल क्षति अनुदान के लिए दावे सामने आए हैं।

इन क्षेत्रों में कृषि विभाग बाढ़ से पहले ही फसल की स्थिति का सर्वेक्षण करा चुका है। डिजिटल तरीके से अपलोड किया है। ऐसे में अब किसानों की ओर से किए गए दावों की जांच पुराने सर्वेक्षण के आंकड़ों से की जाएगी।

विभाग के पास संबंधित क्षेत्रों में फसल की स्थिति का रिकॉर्ड उपलब्ध होने के कारण वास्तविक क्षति और कागज पर किए गए दावे में अंतर पकड़ना आसान होगा। भोजपुर में सात प्रखंडों में करीब 21,489 हेक्टेयर में फसल क्षति का आकलन किया गया है।

दावा सही तो राहत, गलत तो आवेदन रद

कृषि विभाग का जोर वास्तविक क्षति वाले किसानों तक अनुदान पहुंचाने पर है। इसके लिए आवेदन में दर्ज जानकारी का विभागीय सर्वेक्षण से सत्यापन किया जा रहा है।

जिन किसानों के खेतों में वास्तव में फसल थी और बाढ़ से नुकसान हुआ है, उन्हें नियमानुसार अनुदान मिलेगा। वहीं, बिना फसल के क्षति का दावा करने वाले आवेदनों की जांच में यदि गड़बड़ी सामने आती है तो ऐसे दावों को निरस्त किया जा रहा है।

शाहपुर में सामने आए इस मामले ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि आपदा राहत की राशि पाने के लिए गलत दावे करने की कोशिश आखिर कब तक चलती रहेगी। विभागीय सत्यापन अब ऐसे दावों की हकीकत सामने लाएगा।

अनुदान में बढ़ेगी पारदर्शिता

बाढ़ से पहले डाटा अपलोड से पारदर्शिता बढ़ेगी। कृषि पदाधिकारी डाॅ. नीरज ने बताया कि कई किसान गड़बड़ी करने की शिकायत करते हैं।

अब ऐसा कहने का मौका किसी के पास नहीं है। किस खेत में कौन फसल है और उसका रकबा, खेसरा, अक्षांस व देशांतर के साथ सुरक्षित है।