भोजपुर: डीजल का झंझट खत्म! खेतों में अब बिजली से चलेंगे पंपसेट, किसानों की बढ़ेगी आमदनी
भोजपुर में कृषि विभाग 1107 डीजल पंपसेट को बिजली से चलने वाले पंपसेट में बदलने की तैयारी कर रहा है। ...और पढ़ें

डीजल का झंझट खत्म! खेतों में अब बिजली से चलेंगे पंपसेट, किसानों की बढ़ेगी आमदनी (AI Generated Image)
जागरण संवाददाता, आरा। गांव-गांव तक बिजली की पहुंच बढ़ने और कृषि कार्यों के लिए विद्युत कनेक्शन उपलब्ध होने के बाद सिंचाई में डीजल चालित पंपसेट की उपयोगिता लगातार कम हो रही है। किसान अब डीजल की बढ़ती कीमत और रखरखाव के खर्च से बचने के लिए बिजली से संचालित पंपसेट का इस्तेमाल कर रहे हैं।
किसानों की बदलती जरूरत और कृषि कार्यों में बिजली के बढ़ते उपयोग को देखते हुए कृषि विभाग ने डीजल पंपसेट को बिजली पंपसेट में बदलने की तैयारी शुरू कर दी है।
कृषि निदेशालय ने भोजपुर समेत सभी जिलों से डीजल चालित पंपसेट की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसके तहत जिले में किसानों के पास मौजूद डीजल पंपसेट का ब्योरा जुटाया जाएगा।
सूची तैयार होने के बाद योग्य पंपसेट को विद्युत चालित पंप में परिवर्तित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। विभागीय स्तर पर इसके लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. नीरज कुमार ने बताया कि जिले में 1107 डीजल पंप सेट होने की पुष्टि हुई है।
सिंचाई पर होने वाले खर्च में आएगी कमी
कृषि विभाग के इस कदम से किसानों को सिंचाई पर होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिलेगी। डीजल पंपसेट चलाने के लिए किसानों को लगातार डीजल खरीदना पड़ता है। इसके अलावा इंजन के रखरखाव और मरम्मत पर भी खर्च होता है।
बिजली पंपसेट से इन खर्चों में कमी आने की उम्मीद है। इससे खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। कोईलवर प्रखंड के वीरमपुर के किसान श्याम बहादुर सिंह ने इसे किसानों के लिए फायदेमंद बताया।
उन्होंने कहा कि बिजली से कृषि में क्रांति आ आ गई है। जिले में धान, गेहूं, दलहन और सब्जी समेत विभिन्न फसलों की सिंचाई के लिए बड़ी संख्या में पंपसेट का उपयोग किया जाता है। विद्युत आपूर्ति का विस्तार होने के बाद किसानों के बीच बिजली पंपसेट की मांग बढ़ी है।
कृषि विभाग का मानना है कि पुराने डीजल पंपसेट को बिजली पंप में बदलने से किसानों को सस्ती और सुविधाजनक सिंचाई की सुविधा मिल सकेगी।
