भोजपुर के बखोरापुर में मां काली का चमत्कारिक मंदिर: 1862 में हैजा के प्रकोप के बीच स्थापित हुईं मां काली की पिंड
भोजपुर के बड़हरा प्रखंड स्थित बखोरापुर का भव्य मां काली मंदिर भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है, जिसकी स्थापना ...और पढ़ें

बखोरापुरवाली माता का मंदिर। जागरण
HighLights
1862 में हैजा महामारी के दौरान हुई मंदिर की स्थापना।
नवरात्रि में विशेष पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित।
बिहार सहित अन्य राज्यों से आते हैं श्रद्धालु दर्शन को।
राकेश कुमार तिवारी, भोजपुर। Navratra 2026: बड़हरा प्रखंड अंतर्गत भव्य मां काली मंदिर बखोरापुर अपने भव्यता व विस्तृत क्षेत्रफल में फैलाव के कारण यह मंदिर भक्तों व पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।
वर्ष में यहां भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षक होता है। शारदीय नवरात्रि पर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। इस भव्य काली मंदिर का कई चमत्कारिक महत्व भी है।
काली मंदिर के बारे में कहा जाता है कि सन 1862 में बखोरापुर गांव में भयंकर हैजा फैला था और कई लोगों की मौत हुई थी। तब इस संकट से उबारने के लिए एक साधु ने माता काली के पिंड की स्थापना कराई थी।
नवरात्र में होती है विशेष पूजा अर्चना
नवरात्र के मौके पर भव्य काली मंदिर बखोरापुर को भव्य ढंग से सजाया जाता है। इसके साथ विद्वान आचार्योंं द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विशेष पूजा अर्चना की जाती है। इस मंदिर में बिहार समेत दूसरे प्रदेश से भी भक्तों के आने का तांता लगा रहता है।
भव्य काली मंदिर बखोरापुर में कैसे पहुंचें
भव्य काली मंदिर बखोरापुर में दानापुर-मुगलसराय रेलखंड के आरा रेलवे स्टेशन से करीब 15 किलोमीटर उत्तर गंगा के तट पर बड़हरा प्रखंड के बखोरापुर गांव में स्थित है।
काली मंदिर पूरे प्रदेश में काफी प्रसिद्ध मंदिर है। यहां आने जाने के लिए रेलवे स्टेशन से तथा गांगी के से वाहन बराबर मिलते रहते हैं। पटना की तरफ से आने वाले श्रद्धालु कोईलवर बबुरा फोरलेन के रास्ते आ सकते हैं।

इस वर्ष शारदीय नवरात्र पूजा में माता हाथी पर सवार होकर आ रही है। इससे सुख शांति हम लोगों में रहेगा। चरण से जाने के कारण चरण योग होने के वजह से प्राकृतिक आपदा और सत्ता परिवर्तन का संभावना बनी रहती है।
सुनील उपाध्याय, पुजारी
काली मंदिर बखोरापुर की महिमा अपरंपार है और सालोंभर यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। नवरात्र में अत्यधिक भीड़ उमड़ती है, लेकिन श्रद्धालुओं को परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन के साथ मिलकर मंदिर ट्रस्ट के सेवक मुस्तैद हैं।
सुनील सिंह गोपाल, मंदिर ट्रस्ट के संरक्षक

