आरा में लगातार 18वीं बार भी नहीं बिके बालू घाट, सरकार को 40 करोड़ के राजस्व का झटका
आरा जिले में 16 बालू घाटों की नीलामी लगातार 18वीं बार भी नहीं हो सकी, जिससे सरकार को करीब 40 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।

आरा में लगातार 18वीं बार भी नहीं बिके बालू घाट

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, आरा। जिले में बालू खनन से सरकार को राजस्व दिलाने की कोशिशों को एक बार फिर झटका लगा है। जिले के सोन और गंगा नदी के 16 बालू घाटों की नीलामी लगातार 18वीं बार भी नहीं हो सकी। निर्धारित प्रक्रिया के तहत इन घाटों के लिए खरीदार नहीं मिलने के कारण टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई।
अब खनन विभाग की ओर से एक बार फिर इन घाटों की नीलामी का प्रस्ताव राज्य मुख्यालय को भेजे जाने की तैयारी है। लगातार नीलामी नहीं होने से करोड़ों रुपये के राजस्व की संभावित आय अटकी हुई है। इन 16 घाटों में सोन नदी के 11 और गंगा नदी के पांच बालू घाट शामिल हैं।
नीलामी राशि करीब 38 करोड़ रुपये
सोन नदी के घाट संख्या तीन, पांच, छह, आठ, 16, 17, 22ए, 22बी, 39, 40 और 41ए की कुल नीलामी राशि करीब 38 करोड़ रुपये निर्धारित है। वहीं गंगा नदी के घाट संख्या तीनए, तीनबी, चारए, चारबी समेत पांच घाटों की कुल कीमत करीब दो करोड़ रुपये है। इस तरह सभी 16 घाटों की नीलामी से करीब 40 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद थी।
विभागीय स्तर पर लगातार नीलामी की प्रक्रिया कराने के बावजूद खरीदारों के सामने नहीं आने के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। सबसे बड़ी वजह घाटों के लिए निर्धारित अधिक राशि मानी जा रही है।
टेंडर निकालने के बाद भी घाटों का बंदोबस्त नहीं
इसके अलावा कई घाटों की भौगोलिक एवं परिचालन स्थिति भी खरीदारों के लिए अनुकूल नहीं है। नदी के जलस्तर, पहुंच मार्ग, खनन योग्य क्षेत्र और बालू की उपलब्धता जैसे कारणों को देखते हुए कई संभावित बंदोबस्तधारी इतनी बड़ी राशि खर्च करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। यही वजह है कि बार-बार टेंडर निकालने के बाद भी घाटों का बंदोबस्त नहीं हो पा रहा है।
जिला खनन पदाधिकारी कुमार गौरव ने बताया कि इस संबंध में विभाग को विस्तृत जानकारी दी जाएगी, आगे जो मार्गदर्शन आएगा, उसी के अनुसार नीलामी होगी।
नीलामी नहीं होने से राजस्व के साथ रोजगार को भी लग रहा झटका
इन 16 बालू घाटों की लगातार 18 बार नीलामी नहीं होने का असर केवल सरकारी राजस्व पर ही नहीं, बल्कि इससे जुड़े कारोबार और रोजगार पर भी पड़ रहा है। घाटों का बंदोबस्त होने के बाद खनन और परिवहन गतिविधियां शुरू होने से बड़ी संख्या में मजदूरों को काम मिलता। इसके साथ ही ट्रक, ट्रैक्टर, लोडिंग-अनलोडिंग, मरम्मत, ईंधन और निर्माण सामग्री से जुड़े कारोबार को भी गति मिलती।
बालू की उपलब्धता बढ़ने से अन्य रोजगार भी बढ़ता
बालू की उपलब्धता बढ़ने से गिट्टी, छड़, सीमेंट समेत निर्माण सामग्री के कारोबार से जुड़े लोगों को भी लाभ मिलता। ऐसे में घाटों की नीलामी नहीं होने से सरकार को संभावित करोड़ों के राजस्व का नुकसान तो हो ही रहा है, स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के अवसर भी प्रभावित हो रहे हैं। विभाग अब नए सिरे से प्रस्ताव भेजकर इन घाटों की नीलामी कराने की दिशा में पहल करेगा।
