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आरा में NH किनारे 'मैच फिक्सिंग' बाजार: 10 साल से बंदोबस्ती ठप, वसूली जारी, लाखों का राजस्व घाटा

Published: Mon, 28 Sep 2026 04:33 PM (IST)

शाहपुर नगर पंचायत का पुराना बाजार एक दशक से बंदोबस्ती न होने और अवैध वसूली को लेकर चर्चा में है, ...और पढ़ें

लाखों के राजस्व नुकसान

लाखों के राजस्व नुकसान

HighLights

  1. शाहपुर बाजार की दस साल से नहीं हुई बंदोबस्ती।

  2. एनएच-84 किनारे अतिक्रमण हटाकर फिर से सजी दुकानें।

  3. सरकारी खजाने को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान।

जागरण संवाददाता, शाहपुर (भोजपुर)। शाहपुर नगर पंचायत का पुराना बाजार इन दिनों बंदोबस्ती और वसूली को लेकर चर्चा में है। आरोप है कि करीब एक दशक से बाजार की बंदोबस्ती नहीं हुई, लेकिन विभागीय वसूली का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान सरकारी खाते में हर साल अपेक्षाकृत कम राशि जमा होने की बात सामने आ रही है।

दूसरी ओर एनएच-84 के किनारे बाजार लगने और फिर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हाल में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की, लेकिन कुछ ही दिनों बाद सब्जी, फल, मीट और अंडे समेत अन्य दुकानें फिर से सज गईं।

अतिक्रमण हटाया, फिर दोबारा सज गया बाजार

एनएच-84 के किनारे बाजार लगाने को लेकर पहले भी आपत्तियां उठती रही हैं। कार्रवाई के दौरान सड़क किनारे से दुकानें हटाई गईं, लेकिन बाद में वही जगह दोबारा दुकानों से भर गई।

स्थानीय स्तर पर आरोप है कि बाजार दोबारा लगने के साथ ही दुकानदारों से बाजारी वसूली भी शुरू हो जाती है। इससे प्रशासन की कार्रवाई और वसूली की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

दस साल से नहीं हुई बाजार की बंदोबस्ती

बताया जाता है कि शाहपुर बाजार की करीब 10 वर्षों से बंदोबस्ती नहीं हो सकी है। वर्ष 2026-27 के लिए सुरक्षित जमा राशि करीब 5.93 लाख रुपये निर्धारित बताई गई है।

बाजार से होने वाली आय को देखते हुए इतनी बड़ी सुरक्षित जमा राशि पर बंदोबस्ती लेने में संभावित ठेकेदारों की दिलचस्पी नहीं होने की बात कही जा रही है। ऐसे में हर वर्ष नीलामी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

लाखों के राजस्व नुकसान का दावा

जानकारी के अनुसार विभागीय वसूली के जरिए हर साल करीब 60 हजार से एक लाख रुपये तक सरकारी खाते में जमा किए जाते रहे हैं। वहीं बंदोबस्ती नहीं होने से अपेक्षित राजस्व प्राप्त नहीं हो पा रहा है।

जानकारों का अनुमान है कि इस व्यवस्था के चलते पिछले एक दशक में सरकार को करीब 30 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ हो सकता है। हालांकि इस नुकसान की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग के आंकड़ों से ही हो सकेगी।

जिला प्रशासन से नगर पंचायत को मिली जिम्मेदारी

पहले शाहपुर बाजार की बंदोबस्ती जिला प्रशासन के स्तर से कराई जाती थी। वित्तीय वर्ष 2023-24 में इसकी जिम्मेदारी नगर पंचायत को सौंप दी गई।

जिम्मेदारी बदलने के बावजूद बाजार की वसूली व्यवस्था में अपेक्षित बदलाव नहीं होने का आरोप है। यही वजह है कि बंदोबस्ती, विभागीय वसूली और बाजार के संचालन को लेकर सवाल लगातार बने हुए हैं।

तीन साल बाद समीक्षा का है प्रावधान

राजस्व विभाग के नियमों के अनुसार, यदि किसी सैरात की लगातार तीन वर्षों तक बंदोबस्ती नहीं होती है तो उसकी समीक्षा की जानी चाहिए। विभागीय वसूली से प्राप्त आय के आधार पर सुरक्षित जमा राशि का पुनर्निर्धारण भी किया जाना है।

ऐसे में करीब एक दशक तक बंदोबस्ती नहीं होने के बावजूद सुरक्षित जमा राशि में बढ़ोतरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामले में नियमों के अनुरूप समीक्षा हुई या नहीं, यह विभागीय रिकॉर्ड से स्पष्ट हो सकता है।

जानकार ने अधिकारियों की मंशा पर उठाए सवाल

खांटी एग्रो के निदेशक उमेश चंद्र पांडे का आरोप है कि अधिकारी बाजार की बंदोबस्ती कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं। उनका कहना है कि सुरक्षित जमा राशि बढ़ाए जाने और लंबे समय तक समीक्षा नहीं होने की स्थिति की जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक दशक तक बंदोबस्ती नहीं होना अपने आप में सवाल खड़ा करता है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।

एनएच किनारे बाजार लगाने पर कानूनी सवाल

पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता अभय कुमार पांडे के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग या उसके किनारे बाजार लगाना नियमों के विपरीत है। ऐसे में एनएच-84 के किनारे बाजार लगने और वहां से वसूली होने की स्थिति पर कानूनी सवाल उठते हैं।

अब सवाल यह है कि यदि एनएच किनारे बाजार लगाना नियमों के अनुरूप नहीं है, तो वहां दोबारा दुकानें कैसे लग रही हैं और वसूली की अनुमति किस व्यवस्था के तहत दी जा रही है। इन बिंदुओं पर प्रशासन और संबंधित विभाग का स्पष्ट पक्ष सामने आने पर तस्वीर और साफ होगी।