आरा। उत्तर प्रदेश के लखनऊ से आई एनआईए की टीम ने बुधवार को भोजपुर जिला के मसाढ़ गांव निवासी एक संदिग्ध जय प्रकाश सिंह के घर में सघन छापेमारी कर करीब 93 विदेशी गोली बरामद की। इसके अलावा टीम ने घर से छह मोबाइल, एक लैपटॉप और आवश्यक कागजात जब्त कर अपने साथ लखनऊ ले गई है। इसकी पुष्टि भोजपुर एसपी सुशील कुमार ने की। मामला लखनऊ से जुड़ा है। हालांकि, इस दौरान गृहस्वामी टीम के हाथ नहीं लग सका। छापेमारी को लेकर एके -47 समेत विदेशी हथियारों की तस्करी में संलिप्त तस्करों में हड़कंप मचा रहा। एनआईए की टीम घर से बरामद विदेशी गोलियों समेत अन्य तथ्यों को लेकर जेपी सिंह से भी पूछताछ कर सकती हैं। गौरतलब हो कि गजराजगंज ओपी क्षेत्र के मसाढ़ गांव निवासी जेपी सिंह पूर्व में नागालैंड से निर्गत आ‌र्म्स और गांजा के मामले में जेल जा चुका है। बाद में कोर्ट से उसे राहत मिली थी।

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गोदरेज में छिपाकर रखा गया था कारतूस

बताया जाता है कि यूपी के लखनऊ से एनआईए डीएसपी विपिन कुमार के नेतृत्व में छह सदस्यीय टीम आरा पहुंच हुई थी। जिसके बाद टीम ने भोजपुर एसपी सुशील कुमार से सहयोग मांगा। एसपी के निर्देश पर डीआईयू टीम को सहयोग के लिए भेजा गया। एनआईए की टीम ने डीआईयू के सहयोग से गजराजगंज ओपी के मसाढ़ गांव निवासी जय प्रकाश सिंह के घर सुबह छह बजे से छापेमारी शुरू की। दोपहर बारह बजे तक यानी लगातार छह घंटे तक चली छापेमारी के दौरान कोई प्रतिबंधित या विदेशी हथियार तो घर से नहीं मिला। लेकिन, गोदरेज में छिपाकर रखा गया 7.62 और .38 का 93 विदेशी गोली जरूर बरामद किया गया। इसके अलावा छह मोबाइल, एक लैपटॉप और कुछ आवश्यक कागजात जब्त किया गया। बाद में टीम जब्त सामानों को अपने साथ लेकर लखनऊ रवाना हो गई। हालांकि, गृहस्वामी, पुलिस के हाथ नहीं लग सका। भोजपुर एसपी ने बताया कि यूपी के लखनऊ में हथियार से जुड़ा कोई मामला दर्ज है। जिसकी जांच और प्रतिबंधित हथियार होने की सूचना पर एनआईए की टीम यहां आई हुई थी।

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छापेमारी के दौरान 33 कमरों की ली गई तलाशी, पर नहीं मिले प्रतिबंधित हथियार इधर, एसपी सुशील कुमार के निर्देश पर डीआईयू प्रभारी दीपक नारायण सिंह के नेतृत्व में सहयोग के लिए यहां से टीम को भेजा गया था। किसी तरह की विधि व्यवस्था की समस्या उत्पन्न नहीं हो, इसके लिए पुलिस केन्द्र से बीस सशस्त्र बल जवानों को भी टीम के साथ भेजा गया था। टीम ने मसाढ़ गांव स्थित जय प्रकाश सिंह के आलीशान मकान के करीब 33 कमरों की सघन ली। एक-एक कर तलाशी लिए जाने के बावजूद कोई प्रतिबंधित हथियार घर से बरामद नहीं हो सका। और न ही गृहस्वामी ही पकड़ में आ सका। कमरे की तलाशी के दौरान एनआईए टीम ने हर कमरे का नंबर दिया था। जिससे की किसी तरह की परेशानी नहीं हो सके। डीआईयू की टीम सादे लिबास में थी। इसे लेकर सुबह से दोपहर तक गांव में हड़कंप मचा रहा। --

पांच साल पहले ईंट-भट्ठे पर गोलीबारी के बाद पकड़ा गया था जेपी सिंह गजराजगंज ओपी क्षेत्र के मसाढ़ गांव में करीब पांच साल पहले ईंट-भट्ठे पर हिस्सेदारी को लेकर दो गुटों में घटित गोलीबारी के बाद पुलिस ने जेपी सिंह को पकड़ा था। 18 दिसंबर 2015 को दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट व गोलीबारी की घटना घटित हुई थी। जिससे दो लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने 17 किलो गांजा के दो पैकेट, दो राइफल और 60 कारतूस के साथ जेपी सिंह समेत दो लोगों को उस समय गिरफ्तार किया था। घटना में प्रयुक्त की जाने वाली बोलेरो को भी जब्त किया गया था। उस समय मसाढ़ गांव स्थित ईंट-भट्ठे में हिस्सेदारी को लेकर रामनाथ सिंह और जय प्रकाश सिंह के बीच गोलीबारी व मारपीट की घटना घटित हुई थी। जय प्रकाश सिंह पर अपने समर्थकों के साथ हथियार लेकर भट्ठे पर पहुंचने और फायरिग करने का आरोप लगा था। तब रामनाथ सिंह के समर्थकों ने जय प्रकाश सिंह की जमकर पिटाई भी कर दी थी। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची थी और जेपी सिंह और पंकज सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। घटनास्थल से गांजा, दो राइफल व 60 कारतूस तथा एक बोलेरो को जब्त किया गया था। दोनों तरफ से प्राथमिकियां दर्ज कराई गई थी। जब्त हथियारों का लाईसेंस नागालैंड से निर्गत था। बाद में कोर्ट से राहत मिली थी।

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नागालैंड के दीमापुर से जुड़ा हैं जय प्रकाश का कनेक्शन

गजराजगंज ओपी के मसाढ़ गांव निवासी जय प्रकाश सिंह उर्फ जेपी सिंह का कनेक्शन लंबे समय से नागालैंड के दीमापुर जुड़ा है। दीमापुर में कई तरह के कारोबार से भी जुड़ाव रहा है। दीमापुर से शस्त्र लाइसेंस लेने को लेकर भी चर्चा में रहा है। एक बार फिर लखनऊ के दीमापुर से टीम आने के बाद चर्चा में है।

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एके -47 की खरीद-बिक्री को लेकर पहले भी भोजपुर में हो चुकी हैं एनआईए की छापेमारी

आरा: एके- 47 जैसे प्रतिबंधित हथियारों की तस्करी को लेकर पूर्व में भी दो बार भोजपुर का नाम आ चुका है। एक मामला मुंगेर और दूसरा पूर्णिया जिला से जुड़ा था। जिसमें गिरफ्तारी और हथियारों की बरामदगी के लिए एनआईए नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआइए) की टीम यहां छापेमारी के लिए आई थी। 21 जून 2019 को एक पूर्व माननीय पांडेय के पटना, बक्सर, सासाराम और आरा के आवास व व्यापारिक प्रतिष्ठानों के साथ ही कुल 12 स्थानों पर एनआईए ने एक साथ छापेमारी की थी। एनआइए ने रिश्तेदारों के साथ पूर्व माननीय के अन्य ठिकानों को भी खंगाला था। मामला मुंगेर से एके-47 की खरीद-बिक्री की जांच से जुड़ा था। प्रतिबंधित हथियारों की जानकारी आरोपित शमशेर आलम द्वारा दी गई थी। उसकी बहन और आरोपित रिजवाना बेगम के घर से की गई थी। मुंगेर पुलिस ने इस संबंध में केस दर्ज किया था। एनआइए ने इसी मामले में दोबारा केस दर्ज किया था। उस दिन पटना में पटेल नगर स्थित आवास पर पहुंची एनआइए की टीम ने करीब चार घंटे तक यहां सर्च ऑपरेशन चलाया था और घर का कोना-कोना छान मारा था। एनआइए टीम को प्रतिबंधित तो नहीं पर राइफल समेत अन्य साजो सामान मिले थे। हालांकि दावा किया गया था कि यह राइफल लाइसेंसी है। उस लाइसेंस को नवीकरण के लिए भेजा गया था। जिस वजह से एनआइए टीम को लाइसेंस दिखाया नहीं जा सका था। भोजपुर जिले में एनआइए ने तीन टीमें बनाकर अलग-अलग जगह छापेमारी की थी। आरा के करमन टोला रोड स्थित एक निर्माणाधीन तीन मंजिला मार्केट सह मॉल की तलाशी ली गई थी। शहर के महाराजा हाता स्थित एक आवास पर की भी जांच की गई थी। लेकिन वहां कुछ नहीं मिला था। इसके बाद टीम पूर्व माननीय के रिश्तेदार व तिलाठ पैक्स अध्यक्ष के पीरो व तिलाठ स्थित घरों की जांच को पहुंची थी। तिलाठ गांव स्थित घर से राइफल के दो बट व 315 बोर के 28 कारतूस, अलग अलग बैंकों के नौ पासबुक व चेकबुक बरामद किए गए थे। इसी तरह 19 सितंबर 2019 को पूर्णिया एके 47 प्रकरण समेत अन्य मामले में फरार हथियार तस्कर संतोष ने आरा कोर्ट में सरेंडर किया था। जिसे बाद में न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। एनआइए को करीब सात महीने से उसकी तलाश थी। आरा में उसने नागालैंड आ‌र्म्स लाइसेंस बनवाने के एक मामले में सरेंडर किया था। एनआइए की टीम उसे पूर्णिया एके-47 मामले में रिमांड की थी। मालूम हो कि पूर्णिया जिले के वायसी थाने की पुलिस ने भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियारों के बैरल, एके-47, कारतूस, रॉकेट लांचर, ग्रेनेड आदि जब्त किया था। इस संबंध में वायसी थाने में 7 फरवरी, 2019 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उसके बाद मामले की जांच 26 फरवरी 2019 को एनआईए ने अपने हाथ में लिया था। आरा के एक दर्जन से अधिक लोगों से पूछताछ की गई थी।

Posted By: Jagran

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