भोजपुर । आरा-छपरा पुल का कार्य प्रगति पर जरूर है। मगर पूर्व निर्धारित कार्य समाप्ति की समय सीमा 2014 के एक वर्ष बाद भी अभी कार्य बाकी है। विभाग के तकनीकी जानकार वर्ष 2016 में पुल व सड़क को चालू कराने की बात बताते हैं। मगर आम लोगों को वर्ष 2016 में पूर्ण रूप से कार्य समाप्ति की संभावना नजर नहीं आती। गंगा नदी के बहाव के बीच अभी भी कुछ पाये नहीं बने हैं।

कहां-कहां से जुड़ेगा पुल :

पुल आरा के कोईलवर में राष्ट्रीय उच्च पथ-30 तथा छपरा के डोरीगंज में राष्ट्रीय उच्च पथ-19 से सीधा फोरलेन सड़क से जुड़ेगा। चार किलोमीटर पुल व 17.5 किलोमीटर सड़क को बनाने के लिए प्रारंभ में 539 करोड़ की प्राक्कलित राशि स्वीकृत थी। कार्यादेश 5 जुलाई, 2010 के अनुसार कार्य 2014 में समाप्त कर देना था। मगर अवधि विस्तार के साथ-साथ लागत में भी भारी वृद्धि संभव है।

पुल की स्थिति :

पुल दो हिस्सों में बन रहा है। एक कम लंबाई का पुल बबुरा के आजाद में तथा दूसरा वृहद पुल गंगा-सरयू के मिलन बिंदु के समीप सूरतपुर-डोरीगंज घाट पर। डोरीगंज घाट से भिखारीपथ द्वारा एन.एच. 19 से जुड़ेगा। पुल की गुणवत्ता को लेकर शंका चाहे जो हो पर पुल के बनने से लाभ की अपार संभावनाएं दूर-दूर से लाखों लोग देख रहे हैं।

पुल बनने के बाद दूरियों में बदलाव इस हिसाब से होगा :

कहां से कहां

वर्तमान पुल के अंतर दूरी - बाद की दूरी कि.मी. में

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आरा-छपरा 160 - 25 कि.मी.

बचत 135 कि.मी. की दूरी

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आरा-सिवान 200 - 85 कि.मी.

बचत 115 कि.मी. की दूरी

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आरा-गोपालगंज 240 - 120 कि.मी.

बचत 120 कि.मी. की दूरी

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आरा-बेतिया 260 - 150 110 कि.मी.

बचत 110 कि.मी. की दूरी

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आरा-मोतिहारी 210 - 120 बचत 90 कि.मी. की दूरी

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आरा-मुजफ्फरपुर 125 - 85 कि.मी.

बचत 40 कि.मी. की दूरी

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आरा-हाजीपुर 90 - 65 कि.मी.

बचत 25 कि.मी. की दूरी

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आरा-सोनपुर 100 - 50 कि.मी.

बचत 50 कि.मी. की दूरी

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आरा-सीतामढ़ी 190 - 105 कि.मी.

बचत 85 कि.मी. की दूरी

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आरा-शिवहर 180- 95 कि.मी.

बचत 85 कि.मी. की दूरी

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आरा-रक्सौल

बीरगंज बार्डर 240 - 150

कि.मी.

बचत 90 की दूरी

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बढ़ेंगी काफी संभावनाएं :

आरा से उक्त जिलों की दूरियों में जितनी कमी हो रही है। लगभग उतनी ही कम सासाराम, भभुआ से उक्त जिलों की दूरी कम हो जायेगी। जिससे बिहार के पश्चिमी भाग में बसे जिलों में आपस की दूरियां काफी सिमट जायेंगी। इतना ही नहीं बिहार में गंगा नदी के दक्षिण बसे पश्चिमी जिलों का जुड़ाव उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिले बलिया, देवरिया, गोरखपुर, महाराजगंज, मउ व गाजीपुर से बड़ा आसानी से हो जायेगा। यह दोनों राज्यों के समूचे भोजपुरी भाषी जिलों को एक सूत्र में बांधने का काम करेगा। बिहार के पश्चिमी व उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों का संबंध और गहरा इसलिए हो जायेगा, क्योंकि इन जिलों में पहले से ही रीति-रिवाज, रहन-सहन, बोली भाषा, शादी-ब्याह, जातिगत-सरोकार, लोक संस्कृति व खेती गृहस्थी का तानाबाना एक रंग में रंगा हुआ है। ऐसे में आरा-छपरा का यह पुल दोनों राज्यों के बंधुत्व-संस्कृति को एक नई पहचान दिलाने में सक्षम होगा। इससे यह भी संभव होगा कि भोजपुरी राज्य की पुरानी व मंद पड़ी मांग भी जोर पकड़ने लगे। गंगा व सरयू के पार वार की बाधा खत्म हो जायेगी। नये रिश्तों की भरमार होगी। कृषि व व्यापार की संभावनाएं बढ़ेंगी। भोजपुर, बक्सर, छपरा व बलिया जिले के दियारे इलाके की सूरत बदलेगी। भौगोलिक रूप से अलग-अलग, नीरस व वीरान सा लगने वाले दियारे क्षेत्रों में एक नई रौनक आयेगी। दियारे के गांवों को आपस में जोड़ने वाले संपर्क पथों का विकास तेज होगा। बिजली की रोशनी से महरूम रहे क्षेत्र बिजली से चकाचौंध होगा। आवागमन को ले कोईलवर पुल पार का झंझट खत्म होगा। अच्छे स्कूलों में जाकर पढ़ाई तथा शहर में जाकर दवाई कराना दुर्लभ काम नहीं रह जायेगा। आरा-छपरा का यह पुल सिर्फ आवागमन का एक पुल नहीं, अपितु दो राज्यों के कई जिलों व एक देश नेपाल से विभिन्न रूपों में जोड़ने वाला एक सेतु सिद्ध होगा। जो जीवन संस्कृतियों को एक नया आयाम देगा।