भागलपुर। ग्रामीण क्षेत्र की रहने वाली सात वर्षीय बच्ची बाल यौन शोषण की शिकार होकर बदहवाशी की हालत में जब घर पहुंची तो उसे माता-पिता की प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता। परेशान हो वह घर से फरार हो गई। दूसरे दिन शहर के एक बस स्टैंड के समीप वह बेसुध पड़ी थी। संवेदनशील लोगों ने इसकी सूचना पुलिस के साथ चाइल्ड लाइन संस्था को दी। बच्ची इतनी डरी सहमी थी कि वह किसी को कुछ भी बताने को तैयार नहीं हो रही थी।करीबी रिश्ते के मौसा ने ही उसके साथ घिनौना काम किया था। एक तो घिनौनी हरकत की शिकार और दूसरी ओर माता-पिता के आक्रोश के कारण वह काफी तनाव में थी। कुठ भी पूछने पर दहाड़ मार रोते-रोते बेसुध हो जाती थी। सूचना पर संस्थान के निदेशक मनोज पांडेय अपने साथ दो महिला काउंसिलर अर्चना झा एवं गुंजन कुमारी के साथ बस स्टैंड पहुंचे। महिला काउंसिलरों ने उसे तुरंत लाड- प्यार दिया। खाने को मिठाई और फल दिए। इसके बाद उसे लेकर अपनी संस्था चले गए।

24 घंटे के अंदर संस्था के अधिकारियों एवं काउंसिलिरों ने उसके साथ ऐसा मित्रवत व्यवहार किया कि उसके चेहरे खिल उठे। ऐसा लगा कि उसे संजीवनी मिल गई हो।

इसके बाद उसने अपने साथ घटित तमाम घटनाओं को एक-एक कर बयां कर दिया। निदेशक पांडेय ने बताया कि उसकी पूरी रिपोर्ट कार्ड तैयार कर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सामने पेश की गई। इसके बाद उसे बाल संरक्षण सेल्टर भेज दिया गया।

निदेशक ने कहा कि हमारी संस्था ऐसी घटनाओं से आहत परिवार के सदस्यों के बीच भी जाती है। इस केस के अनुसंधान में लगे पुलिस अधिकारियों से भी संपर्क साधती है। दोनों को अपराध के शिकार बच्ची के साथ कैसे संवेदनशील होना चाहिए इस बात की भी जानकारी देती है।

Posted By: Jagran

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