अंजुम आलम, जमुई: World Disability Day 2021 गरीब परिवार के बीच पले-बढ़े पवन किसी तरह मैकेनिक की डिग्री हासिल कर धीरे-धीरे खुद एक जख्मी ई रिक्शा का गैरेज खोल लिया, और ई-रिक्शा की मरम्मती कर परिवार का भ्रण-पोषण करने लगा। धीरे-धीरे मेहनत की कमाई के बाद उसने दिव्यांगों की मदद करनी शुरू कर दी और वह दिव्यांगों के ट्राय साइकिल को नि:शुल्क घर पे जाकर बनाने लगा। दिव्यांगों के फोन की घंटी बजते ही पवन उसके घर पर पहुंच जाता है और नि:शुल्क ट्राय साइकिल की मरम्मती करता है।

यह काम वो लगभग साढ़े तीन वर्षों से कर रहा है। दरअसल पवन पासवान सदर प्रखंड के सरारी गांव निवासी आनंद पासवान का पुत्र है। पवन बताते हैं कि उन्हें दिव्यांगों की सेवा करने में जो आनंद मिलता है वह कोई दूसरे कार्यों में नहीं मिलता है। दिव्यांगों की सेवा करने की जिज्ञासा उन्हें लगभग साढ़े तीन वर्ष पहले जगी है और संसद चिराग पासवान द्वारा जमुई में दिव्यांगों के बीच ट्राय साइकिल वितरण करने के दौरान ही उन्होंने मन मे ठान ली थी कि इन सभी ट्राय साइकिल की मरम्मति का कार्य वे नि:शुल्क करेंगे।

उस वक्त ही उसने कई दिव्यांगों को अपना मोबाइल नंबर भी दिया था। जिले भर में अगर किसी भी दिव्यांग की ट्राय साइकिल खराब होती है तो पवन उसकी मदद के लिए पहुंच जाता है। उसने बताया कि यह कार्य वे किसी लोभ या लालच में नहीं बल्कि दिव्यांगों की मदद के लिए कर रहे हैं।

दुर्घटना में घायल और गर्भवती के लिए हमेशा रहता है तैयार

दिव्यांगों की नि:शुल्क मदद के बाद अब पवन गर्भवती और सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की मदद में भी दिन-रात लगा रहता है। पवन ने बताया कि वह गर्भवती को नि:शुल्क अस्पताल तक पहुंचाने के लिए सोसल मीडिया के माध्यम से प्रचार प्रसार भी कर रहा है। रात के चाहे 12 बजे हों या फिर सुबह तीन बजे का समय हो, गर्मी, बरसात या ठंड वे हमेशा गर्भवती की मदद के लिए घर पर पहुंचकर उसे अस्पताल पहुंचाने का काम कर रहा है। अगर उसे किसी सड़क दुर्घटना की सूचना मिली तो वह फौरन घटना स्थल पर पहुंचकर घायलों को नि:शुल्क अस्पताल पहुंचाने का काम कर रहा है। छोटी सी उम्र में पवन की जितनी तारीफ की जाए वह कम है।

Edited By: Shivam Bajpai