जागरण संवाददाता, भागलपुर : अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले पक्षी वैज्ञानिक डा. असद रहमानी, जाने माने फोटोग्राफर व वन्यजीव संरक्षक धृतिमान मुखर्जी और अरविन्द मिश्रा ने शुक्रवार को सूरज की उगती किरण के साथ कदवा कोसी दियारा में गरुड़ और जांघिल की जीवंत तस्वीरें उतरीं। इसके बाद उनके भोजन इकठ्ठा करने की जगहों की तलाश में कुर्सेला में कोसी नदी के चौर, कलबलिया धार और जगतपुर झील का दौरा किया। जगतपुर गांव में मोबाइल टावर के ऊपर बनाए गए लौह सारंग जैसे बड़े पक्षी के घोसले में पक्षी और उनके बच्चे को देखा। पक्षी वैज्ञानिक ने कहा कि यह उनके जीवन की एक अजीब घटना है। इससे साफ है कि इलाके में उपयुक्त पेड़ों की कितनी कमी है।

संध्या समय सुंदरवन में वन विभाग के प्रशाल में डा. असद रहमानी और धृतिमान मुखर्जी ने एनसीसी के 50 कैडेट, ब्रिगेडिअर मृगेंद्र कुमार, कर्नल चन्द्र शेखर, पटना से आए कर्नल अमित सिन्हा, शहर के पक्षी और वन्यजीव प्रेमियों के बीच ज्ञानपूर्ण व्याख्यान स्लाइड शो के माध्यम से दिया, जो मंदार नेचर क्लब और वन विभाग के सौजन्य से आयोजित किया गया। अध्यक्ष डा. तपन कुमार घोष और सचिव डा. सुनील अग्रवाल ने अंग वस्त्र भेंट कर अथिथियों का स्वागत किया। क्लब के वरीय सदस्यों डा. डीएन चौधरी, राहुल रोहिताश्व ने भी अपने विचार रखे।

डा. असद रहमानी ने बताया कि ऐसी कोई मशीन अभी तक नहीं बनी जो पक्षियों का विकल्प बन सके। पक्षियों की 1318 प्रजातियां हमारे देश में हैं, जबकि भौगोलिक दृष्टि से हमसे तीन गुणा बड़े देश अमेरिका में लगभग 900 प्रजातियां हैं। हिमालयन माउंटेन थ्रश जैसी नई नई नई प्रजातियों की खोज हो रही है और शार्प टेल्ड सैंड पाइपर जैसे विलुप्त मान लिए जाने वाले पक्षी को 137 वर्षों के बाद देखा जा रहा है। हमारे देश में पक्षियों की 60 ऐसी प्रजातियां हैं, जो स्थान विशेष में ही पाई जाती हैं। बार टेल्ड गोडविट जैसे प्रवासी पक्षी ने आठ दिनों तक लगातार उडऩ भरते हुए 11600 किलोमीटर की दूरी अपने प्रवास में तय की। ऐसी अद्भुत घटनाओं और विशेषताओं का संसार है, इन पक्षियों का।

धृतिमान मुखर्जी ने बताया कि फोटोग्राफी से हमें वैज्ञानिक तथ्यों का पता चलता है, जिसकी मदद से हम उनके लिए संरक्षण नीति निर्धारित करते हैं। हमने जंगलों में अपना घर बनाया और फिर चिल्लाने लगे कि जानवर हम पर हमला करते हैं। दुनिया का सबसे खतरनाक जीव इंसान है, न तो शार्क है और न ही अनाकोंडा। 10 करोड़ शार्क हर साल मार दी जाती हैं, जबकि उनके द्वारा मनुष्य के साथ साल भर में घटनाएं मात्र 25-30 होती हैं। इतने ही आदमी मुंबई जैसे शहर में रोज सड़क दुर्घटना में मारे जाते हैं। यदि हम वन्य जीवों को सम्मान देंगें तो वो कभी खतरनाक नहीं होंगे। आगंतुकों को धन्यवाद ब्रिगेडिअर मृगेंद्र कुमार ने किया।

Edited By: Dilip Kumar Shukla