भागलपुर [जेएनएन]। तीज का व्रत अत्यंत ही कठिन माना जाता है। यह निर्जला व्रत है। व्रत के पारण के पहले इसमें पानी का एक बूंद भी ग्रहण करना वर्जित है। महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा एवं पति के स्वस्थ्य एवं दीर्घायु जीवन के लिए ईश्वर से मंगलकामना करती है। व्रत के पूर्व रविवार को व्रती महिलाओं ने गंगा स्नान कर पूजन के लिए पकवान आदि तैयार की। इसके उपरांत घर में बने विविध प्रकार के भोजन का परिवार के साथ सेवन किया। पूजन सामग्रियों के लिए बाजारों में भी लोगों की अच्छी खासी भीड़ देखी गई।

गौरी-शंकर की होती है पूजा

तीज व्रत की महिमा को अपरंपार माना गया है। सनातन धर्म में विशेषकर सुहागिन महिलाएं गौरी-शंकर की पूजा करती है। इस दिन महिलाएं 24 घंटे से भी अधिक समय तक निर्जला व्रत करती हैं। यही नहीं रात के समय महिलाएं जागरण करती हैं। अगले दिन सुबह विधिवत्त पूजा-पाठ करने के बाद ही व्रत खोलती हैं। मान्यता है कि तीज का व्रत करने से सुहागिन महिला के पति की उम्र लंबी होती है। जबकि कुंवारी लड़कियों को मनचाहा वर मिलता है।

माता पार्वती व भगवान शिव की कथा : माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की। भाद्रपद शुक्ल तृतीया को ही उनकी मनोकामना पूरी हुई, तभी से इस तिथि पर सनातनी सौभाग्यवती महिलाएं सौभाग्य व अविवाहित बालिकाएं अनुकूल पति कामना से यह व्रत करती हैं।

तीज की तिथि और शुभ मुहूर्त

तृतीया तिथि प्रारंभ : 01 सितंबर 2019 को सुबह 08 बजकर 27 मिनट से

तृतीया तिथि समाप्त : 02 सितंबर 2019 को सुबह 4 बजकर 57 मिनट तक।

02 सितंबर को व्रत : पूजन का शुभ मुहुर्त - सूर्योदय से सुबह 08 बजकर 58 मिनट तक है। बूढ़ानाथ के पंडित राजेंद्र तिवारी ने बताया कि आज का दिन तृतीय और चतुर्थी युक्त है। कुछ पंचांगों में सूर्योदय पूर्व तक तथा कुछ पंचांगों में सूर्योदय काल पश्चात भी तृतीया युक्त चतुर्थी है। जो तीज व्रत के लिए श्रेष्ठ है।

 

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