जागरण संवाददाता, सहरसा: मधेपुरा एसपी के मोबाइल चोरी और कालगर्ल कनेक्शन का वीडियो वायरल होने के बाद डीआइजी शिवदीप लांडे के आदेश पर हुई जांच में कालगर्ल कनेक्शन की पुष्टि नहीं हुई। मधेपुरा के डीएसपी मुख्यालय को बदनाम करने के लिए वीडियो वायरल किया गया था। वीडियो मधेपुरा के सदर एसडीपीओ ने वायरल कर पुलिस की छवि धूमिल की है। मामले में एसडीपीओ के निलंबन की अनुशंसा के अलावा डीएसपी को पद से हटाने व विभागीय कार्रवाई के लिए मुख्यालय को अनुशंसा भेजा गया है।

कोसी रेंज के डीआइजी शिवदीप लांडे ने कहा कि चार अगस्त को इंटरनेट मीडिया एवं समाचार पत्रों में मधेपुरा के डीएसपी मुख्यालय अमरकांत चौबे के संबंध में कालगर्ल संबंधी खबर प्रसारित व प्रकाशित हुई थी। आरोप की गंभीरता को देखते हुए एसपी सुपौल डी. अमरकेश के नेतृत्व में डीएसपी मुख्यालय सहरसा एजाज हाफिज मणि, मधेपुरा के इंस्पेक्टर प्रशांत कुमार, सहरसा की महिला थानाध्यक्ष प्रेमलता भूपाश्री की टीम गठित कर इस मामले की जांच कराई गई।

बचने के लिए महिला ने दिया फर्जी बयान

डीआइजी ने 36 घंटे के अंदर गठित टीम को मामले पर जांच कर रिपोर्ट फाइल करने का आदेश दिया था। टीम ने जांच के क्रम में वायरल वीडियो में दिख महिला रीना देवी का बयान लिया गया। महिला ने अपने बयान में बताया कि वो रेखा कुमारी (काल्पनिक नाम) नाम की महिला को चार-पांच बार आटो में लेकर मधेपुरा गयी थी। टीम के सदस्यों द्वारा कथित रेखा कुमारी (काल्पनिक नाम) से पूछताछ की गई तो पाया गया कि रेखा कुमारी के घर से करीब तीन-चार माह पहले रीना देवी द्वारा मोबाइल चोरी कर ली गयी थी। कथित रेखा द्वारा उक्त रीना देवी को पकड़कर स्थानीय सदर थाना सहरसा को सिपुर्द भी किया गया तथा रीना के पास से तीन-चार मोबाइल भी बरामद हुए थे। लेकिन रेखा का मोबाइल बरामद नही हुआ था। इस घटना को लेकर रीना देवी कथित रेखा के प्रति काफी क्षुब्ध रहती थी।

आटो चालकों से भी हुई पूछताछ

जांच टीम के द्वारा रीना के द्वारा बताये गये आटो चालक मु. राजू एवं मु. मिराज से पूछताछ किया गया। पूछताछ में उक्त दोनों आटो चालक ने बताया कि वे कभी भी नवहटा से बाहर आटो रिक्शा लेकर नही आये हैं। महिला से उनका कोई संबंध नही रहा है। वायरल वीडियो में बयान देने वाली महिला रीना के सामने दोनों ऑटो चालक को प्रस्तुत करने पर उक्त महिला ने पहचानने से इंकार कर दिया।

मोबाइल बरामद होने पर महिला से हुई पूछताछ

डीआइजी ने बताया कि एसपी की चोरी की मोबाइल एक महिला के घर से बरामद हुई थी। टीम के सदस्यों द्वारा महिला से पूछताछ करने पर बतायी कि रीना देवी करीब साल भर पहले किराया पर उनके मकान में रहती थी तथा अपने को सदर अस्पताल मधेपुरा का नर्स बताती थी। बताती थी कि इनकी ड्यूटी रात्रि में ही रहती है। परंतु किराया नहीं देने के कारण इनको मकान से निकाल दिया गया। पैसा की मांग करने पर 23 अगस्त 2022 को एक मोबाइल लाकर दी। भारती ने बताया कि ये मूल रूप से मोबाइल चोरी का कार्य करती हैं। रीना के द्वारा भारती को फंसाने के लिए यह कार्य किया गया। जांच के क्रम में टीम द्वारा पाया गया कि रीना देवी चोरी का कार्य ही करती है। मधेपुरा शहर में इनके द्वारा तीन दिन पहले मोबाइल चोरी की गयी जिसका वीडियो फुटेज भी है। इस संदर्भ में मधेपुरा सदर थाना में कांड भी दर्ज किया गया है।

मोबाइल नंबर की हुई तकनीकी जांच

जांच टीम द्वारा रीना देवी के मोबाइल नंबर का सीडीआर प्राप्त कर विश्लेशण किया गया तो पाया गया कि ये माह जुलाई में तीन बार एवं अगस्त में तीन बार मधेपुरा गयी थी। महिला सदर अस्पताल मधेपुरा में जाया करती थी तथा वहां कार्यरत निजी सुरक्षा गार्ड से साठगांठ रखने की बात प्रकाश में आयी है। जांच टीम द्वारा पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय मधेपुरा का तीनों मोबाईल नंबर अंगरक्षक, चालक, आदेशपाल आदि का मोबाइल नंबर का सीडीआर प्राप्त कर विश्लेशण किया गया तो पाया गया कि इस महिला से कभी भी इनका एवं इनके कर्मी का कोई बात नहीं हुई है।

तस्वीर दिखाकर कराई गई पहचान

जांच टीम द्वारा तीन अन्य व्यक्तियों के साथ पुलिस उपाधीक्षक (मु.), मधेपुरा की तस्वीर को एक साथ दिखाकर उक्त महिला से पुलिस उपाधीक्षक मु. मधेपुरा की पहचान करने को कहा गया तो उक्त महिला रीना द्वारा पहचान नही किया गया। रीना द्वारा बतायी गयी कि उस दिन रात को ये पैसेंजर ट्रेन से मधेपुरा गयी थी तथा सदर अस्पताल, मधेपुरा में किसी सुरक्षा कर्मी अजय (काल्पनिक नाम) के इशारे पर पुलिस उपाधीक्षक मु. के आवास जिसका मुख्य दरवाजा जो रस्सी से बंधा हुआ रहता था को खोलकर उनके आवास में घुस गई तथा मोबाइल चोरी की घटना कारित की। टीम के द्वारा अजय की पहचान हेतु डीएसपी के खाना बनाने वाले को दो अन्य कर्मियों के साथ रीना से करायी गई तो रीना ने खाना बनाने वाले को ही अजय बताया तथा बताया कि ये सदर अस्पताल मधेपुरा में रहते हैं। आमी का वर्दी पहनते है तथा गार्ड का काम करते हैं। इनका आवास सदर अस्पताल स्थित गार्ड रूम में है। जबकि ये पुलिस उपाधीक्षक (मु.) के कुक का काम करते हैं। रीना देवी द्वारा कुक की गलत पहचान की गई।

चोरी का कार्य करती है महिला

डीआइजी ने बताया कि तथ्यों के विश्लेषण एवं जांच टीम के रिपोर्ट के आधार पर यह पाया गया कि उक्त महिला मूलतः चोरी की कार्य करती है। मोबाइल चोरी करने के बाद ये अपने बचने के लिए बेबुनियाद एवं मनगढंत आरोप लगा रही थी। मोबाइल बरामदगी पश्चात, टेक्निकल टीम मधेपुरा एवं सहरसा तथा सदर थाना सहरसा के कर्मी/पदाधिकारी के द्वारा बिना सत्यापन, वरीय पदाधिकारी के अनुमति के डीएसपी मधेपुरा को बदनाम करने के लिए उक्त महिला का बयान लेकर मीडिया को लीक कर वायरल कर दिया गया।

Edited By: Shivam Bajpai

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