भागलपुर [संजय सिंह]। पंचायत चुनाव के पहले और बाद में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को लेकर हिंसक वारदात बढ़ गई है। अब तक बिहार में पांच मुखिया की हत्या की जा चुकी है। कई पंचायत प्रतिनिधि पुलिस से सुरक्षा मांग रहे हैं। कुछ ने तो हथियार के लाइसेंस भी मांगे हैं। इसके बाद पुलिस महकमे में खलबली मची हुई है। अपराधियों की धर-पकड़ के लिए उच्च अधिकारी अपने अधीनस्थों पर दबाव बनाए हुए हैं। एसपी को इस बात की जिम्मेदारी दी गई है कि ऐसी घटनाओं का पर्यवेक्षण वे स्वयं करें।

पूर्व बिहार, कोसी और सीमांचल में सर्वाधिक हिंसा की घटनाएं मधेपुरा में हुई हैं। मधेपुरा की दीपापुर पंचायत में अपराधियों ने गोली चलाई थी। इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई थी। उधर, आलमनगर की बडग़ांव पंचायत में भी दो मुखिया प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच हुई गोलीबारी में दो लोगों की जान चली गई। सुपौल में भी एक पूर्व मुखिया के पोते सुमन कुमार की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। खगडिय़ा में भी भदार दक्षिणी पंचायत के मुखिया पूजा कुमारी और उनके पति संजीव कुमार पर अपराधियों ने जानलेवा हमला किया। दोनों किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहे, लेकिन इनकी स्कार्पियो अपराधियों ने जला दी। इधर, लखीसराय जिले के बड़हिया प्रखंड की गिरधरपुर पंचायत के मुखिया गोपाल कुमार और सूर्यगढृा प्रखंड की अबगिल पंचायत के मुखिया मु. सलीम ने प्रशासन से सुरक्षा मांगी है।

पूरे राज्य में अब तक पांच मुखिया की हत्या की जा चुकी है। मुंगेर जिले के धरहरा प्रखंड की अजीबगंज पंचायत के मुखिया परमानंद टुडू की नक्सलियों ने 24 दिसंबर की रात गला रेतकर हत्या कर दी। इसके पूर्व जमुई जिले के सिकंदरा प्रखंड के लछुआड़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत दरखा पंचायत के मुखिया प्रकाश महतो की हत्या पांच दिसंबर की रात अपराधियों ने गोली मारकर कर दी थी। उधर, 14 दिसंबर को पटना जिले की फरीदपुर पंचायत के मुखिया नीरज कुमार की हत्या हुई। इस दौरान बाढ़ की पंडारक पूर्वी पंचायत के मुखिया प्रियरंजन कुमार उर्फ गोरेलाल और पंडारक थाना में पदस्थापित पुलिस पदाधिकारी राजेश कुमार की हत्या बदमाशों ने गोली मारकर कर दी। भोजपुर जिले के चरपोखरी प्रखंड की बाबूबांध पंचायत के मुखिया संजय सिंह की भी हत्या हुई। लगातार हत्या की वजह से आला पुलिस अधिकारी भी हिल उठे। हत्या की घटनाओं को रोकने और जनप्रतिनिधियों को सुरक्षा देने का आवश्यक निर्देश राज्य के सभी पुलिस अधीक्षकों को अपर पुलिस महानिदेशक (विधि-व्यवस्था) ने दिया है।

उन्होंने पुलिस अधीक्षकों से घटनास्थल का खुद भ्रमण करने को कहा है। हर हाल में घटनास्थल पर एफएसएल की टीम को बुलाकर आवश्यक प्रदर्श जमा कराने का भी निर्देश दिया गया है। घटना के एक सप्ताह बाद एसपी को ही पर्यवेक्षण टिप्पणी निर्गत करनी है। घटना में शामिल अपराधियों की धर-पकड़ के लिए डीएसपी स्तर के अधिकारियों की अध्यक्षता में एसआइटी का गठन करना अनिवार्य है। अपराधियों तक पहुंचने के लिए सीडीआर, टापर डंप जैसी तकनीकों को अपनाना भी जरूरी है।

जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर पुलिस पूरी तरह सजग है। यदि किसी भी जनप्रतिनिधि को सुरक्षा की जरूरत है तो वे लिखित जानकारी थानाध्यक्ष को दें। आवेदन की समीक्षा के बाद ऐसे लोगों को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। - शिवदीप बामनराव लांडे, डीआइजी, सहरसा

Edited By: Dilip Kumar Shukla