बॉबी मिश्रा, सुल्तानगंज: साढ़े सात फीट ऊंची और ढाई टन वजनी बुद्ध की अनोखी प्रतिमा सुल्तानगंज स्टेशन के खुदाई के दौरान सन 1862 ई में मिली थी, जो आज भी इंग्लैंड के बर्मिंघम म्यूजियम में है। अब इसकी वापसी की मांग उठने लगी है, विदित हो कि कई बार इसकी वापसी को लेकर पत्राचार हुआ है लेकिन अब तक सुल्तानगंज वांशियों को निराशा ही हाथ लगी है। लेकिन आप बांका के सांसद गिरधारी यादव ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर बुद्ध प्रतिमा को विदेश से भारत लाने की मांग कर दी है।

डेढ़ सौ साल से इंग्लैंड के बर्मिंघम म्यूजियम में यह प्रतिमा सैलानियों और विशेषज्ञों के आकर्षण का केंद्र रही है।यदि उस वक्त सुल्तानगंज से इस मूर्ति को अंग्रेज अपने साथ ले गए होते तो आज यह बिहार के गौरवशाली इतिहास का हिस्सा होती। इससे जुड़ी एक और विडंबना यह भी है कि इसे अब बर्मिंघम बुद्धा के नाम से पुकारा जाने लगा है। इतिहासकारों की मानें तो यह मूर्ति गुप्त पाल शासनकाल यानी 500 से 700 ईसवी के समय की है।ढाई क्विंटल से अधिक की वजनी यह मूर्ति शुद्ध तांबे से बनी हुई है। इसमें गौतम बुध खड़े हैं और उनका एक हाथ अभय मुद्रा में है।

बर्मिंघम के उद्योगपति सैमुअल थॉर्टन ने तब 200 पाउंड में इस मूर्ति को खरीदा था और फिर इसे बर्मिंघम म्यूजियम में रखवा दिया था। ब्रिटिश संग्रहालय में रखी तांबे की मूर्ति के बारे में पुरातत्व विभाग का कहना है कि या नालंदा शैली जैसी लगती है। उनके अनुसार सुप्रसिद्ध इतिहासकार राखल दास बनर्जी ने इसे पाटलिपुत्र शैली में निर्मित बताया था। इसका निर्माण काल 500 से 700 ई बताया जा रहा है।

इससे पूर्व भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इसे अंग प्रदेश की विरासत बताते हुए इस को भारत लाने की मांग कर चुके हैं। लेकिन बावजूद इसके अब तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई। इससे पूर्व तत्कालीन केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी प्रतिमा वापस लाने की पहल की थी लेकिन इसका कोई असर नहीं दिखा।

'सुल्तानगंज स्टेशन खुदाई के दौरान बुद्ध की प्रतिमा निकली थी, जो अब इंग्लैंड में है। प्रतिमा सुल्तानगंज ही नहीं बल्कि बिहार वासियों के लिए ऐतिहासिक धरोहर हैं। इसे भारत लाने के लिए प्रयास तेज करना होगा। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में धरोहरों को सहेजा जा रहा है, ऐसी उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में यह प्रतिमा इंग्लैंड से भारत आएगी और बिहार का शान बढ़ाएगी।'- गिरधारी यादव,सांसद ,बांका

Edited By: Shivam Bajpai