भागलपुर, जेएनएन। Vishwakarma Puja 2020 : सिल्क सिटी में विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर धार्मिक एकता की नई मिसाल देखने को मिल रही है। सबौर के मिस्टर बाइक सर्विस सेंटर में मो. मिस्टर पिछले कई सालों से अपने गैरेज में भगवान विश्वकर्मा की पूजा धूमधाम से करते आ रहे हैं। वह विश्वकर्मा भगवान की फोटो को अपने गैरेज में रखकर पूजा करते आ रहे हैं। इतना ही नहीं वे विश्वकर्मा पूजा की हर परंपरा को हिंदू पंडितों के द्वारा बताए गए विधि-विधान से सम्पन्न करते हैं।

गुरुवार को विश्वकर्मा पूजा के दिन सुबह से ही शहर और आस पास के लोग अपनी बाइक की धुलाई कराने उनके सर्विस सेंटर पर पहुंच गए थे। इससे उनके यहां दोपहर तक लोगों की भीड़ लग गई। इन बाइकों की धुलाई के बाद वे भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना की तैयारी में जुट गए। मो. मिस्टर ने बताया कि वह हर साल भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना करते हैं।

यह है मान्यता

पं सचिन कुमार दुबे कहते है पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा जी ने उनको इस सृष्टि का शिल्पीकार नियुक्त किया था। जिसके बाद से वह इस संसार में निर्मित होने वाली सभी चीजों के मूल में विद्यामान माने जाते हैं। उस कार्य के निॢवघ्न पूर्ण होने के लिए भगवान विश्वकर्मा की आराधना की जाती है। स्वर्ग का निर्माण हो या फिर द्वारिका नगरी की, सोने की लंका बनानी हो या फिर जगन्नाथ पुरी मंदिर की मूर्तियां, सदैव भगवान विश्वकर्मा वहां विद्यमान रहे। इस वजह से वे देवताओं के शिल्पी कहे जाते हैं।

उन्होंने बताया कि कन्या संक्रांति के दिन सुबह फैक्ट्री, वर्कशाप, आफिस, दुकान आदि के स्वामी और उनकी पत्नी स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें। उसके बाद पूजा स्थान पर आसन ग्रहण करें। सर्वप्रथम दोनों लोग हाथ में जल लेकर विश्वकर्मा पूजा का संकल्प करें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करें। उसके बाद एक कलश में पंचपल्लव, सुपारी, दक्षिणा आदि डालें और उसमें कपड़ा लपेट दें। फिर एक मिट्टी के पात्र में अक्ष रख लें और उसे कलश के मुंह पर रखें। उस पर भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित कर दें।

 

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