बिहार की लाइफलाइन पर संकट : भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के तीन पिलर कमजोर, प्रोटेक्शन वाल टूटे
भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के तीन पिलरों (17, 18, 19) के प्रोटेक्शन वाल गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, ...और पढ़ें
HighLights
विक्रमशिला सेतु के तीन पिलरों के प्रोटेक्शन वाल क्षतिग्रस्त।
मुख्य पिलरों पर बढ़ा खतरा, बाढ़ से स्थिति गंभीर।
समय पर मरम्मत न होने पर सेतु के अस्तित्व पर संकट।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर को कोसी-सीमांचल समेत देश के विभिन्न हिस्सों से जोड़ने वाले विक्रमशिला सेतु के तीन पिलरों के प्रोटेक्शन वाल गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। एक पिलर का प्रोटेक्शन वाल पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है, जबकि दूसरा टूटकर लटक रहा है और तीसरे का आधा हिस्सा टूट गया है।

गंगा नदी के मध्य स्थित 17, 18 और 19 नंबर प्रोटेक्शन वाल के टूटकर लटकने से मुख्य पिलरों पर खतरा बढ़ गया है। ये क्षतिग्रस्त हिस्से बार-बार पिलर से टकराकर संरचना को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

बाढ़ और टक्कर से बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ के दौरान तेज बहाव में जहाज, नाव या भारी वस्तुओं के सीधे पिलर से टकराने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है। इससे पिलर के हिलने की आशंका भी जताई जा रही है।

इसके अलावा, बाढ़ के समय पानी के कैप के भीतर प्रवेश करने से पिलर के नीचे की मिट्टी खिसक सकती है और बालू निकलने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में पिलरों में दरार पड़ने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

समय पर मरम्मत नहीं हुई तो बढ़ेगा संकट
यदि इस समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो भागलपुर की लाइफलाइन माने जाने वाले इस सेतु के अस्तित्व पर खतरा मंडरा सकता है। वर्ष 2001 में चालू हुए इस पुल की स्थिति का जायजा लेने के लिए एनएच विभाग की टीम हाल ही में नाव से मौके पर पहुंची थी।

जांच में पिलर संख्या 16 से 20 के बीच तीन पिलरों के प्रोटेक्शन वाल के क्षतिग्रस्त होने की पुष्टि हुई है। इसकी रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी गई है।

क्या होता है प्रोटेक्शन वाल
पिलरों को तेज जलधारा से बचाने के लिए प्रोटेक्शन वाल बनाया जाता है। यह पानी के करंट से पिलर के नीचे की मिट्टी को दरकने से रोकता है। हालांकि, जलस्तर घटने के बाद प्रोटेक्शन वाल की मरम्मत संभव है।

पिलरों का वेल फाउंडेशन करीब 60 मीटर नीचे होने के कारण फिलहाल बड़े खतरे की संभावना कम मानी जा रही है। इधर, प्रोटेक्शन वाल खिसकने के साथ ही सेतु के एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरारें भी बढ़ने लगी हैं, जो भविष्य के लिए चिंता का विषय है।

विक्रमशिला पुल का पिलर गंगा नदी में 60 मीटर नीचे तक है। इसलिए प्रोटेक्शन वाल के क्षतिग्रस्त होने से पिलरों पर बहुत ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद कम है। मुख्यालय को रिपोर्ट भेज दी गई है। क्षतिग्रस्त पिलरों के प्रोटेक्शन वाल को दुरुस्त कराया जाएगा।
साकेत कुमार रौशन, कार्यपालक अभियंता, एनएच प्रमंडल, भागलपुर
पुल के पिलरों के वेल कैप के ऊपर प्रोटेक्शन वाल (जिसे फाल्स वाल भी कहते हैं) बनाया जाता है। प्रोटेक्शन वाल का वजन करीब 1000 किलोग्राम यानी 25 मन होता है। यह बरसात, बाढ़ के समय पानी के करंट को डायवर्ट करता है। टूटकर लटक रहे प्रोटेक्शन वाल से पिलर को नुकसान पहुंचा सकता है। आंधी, बाढ़ में पानी के तेज करंट के बार-बार टकराने से पिलर में क्रेक कर सकता है, वह हिल भी सकता है। प्रोटेक्शन वाल के क्षतिग्रस्त होने से बाढ़ में पानी कैप के अंदर घुसने से मिट्टी खिसकने व बालू निकलने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए जितना जल्दी संभव हो प्रोटेक्शन वाल का निर्माण कराना जरूरी है। जरूरत महसूस होने पर सेतु पर भारी वाहनों के संचालन पर भी रोक लगाना पड़ सकता है।
